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झारखंड: मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ़्तार खनन सचिव पूजा सिंघल निलंबित

झारखंड की खनन सचिव पूजा सिंघल को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने खूंटी में मनरेगा निधि के कथित गबन और अन्य संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के मामले में गिरफ़्तार किया है. सिंघल से कथित तौर पर जुड़े चार्टर्ड अकाउंटेंट सुमन कुमार के बाद यह इस मामले में हुई दूसरी गिरफ़्तारी है. कुमार के परिसर से छापेमारी में 19 करोड़ रुपये से अधिक नकद बरामद किया गया था.

झारखंड की खनन सचिव पूजा सिंघल. (फोटो: पीटीआई)

रांची: झारखंड की खनन सचिव पूजा सिंघल को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 2009-2010 में खूंटी में उनके डिप्टी कमिश्नर रहते हुए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) निधि के कथित गबन और अन्य संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के मामले में बुधवार को गिरफ्तार कर लिया.

अधिकारियों ने जानकारी दी कि गिरफ्तारी के एक दिन बाद झारखंड सरकार ने पूजा सिंघल को निलंबित कर दिया है. एक अधिकारी ने कहा, ‘सरकार ने पूजा सिंघल को अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन और अपील नियम, 1969) प्रावधानों के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है.’

भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की 2000-बैच की अधिकारी को मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की प्रासंगिक धाराओं के तहत ईडी ने लगातार दो दिन की पूछताछ के बाद हिरासत में लिया.

सूत्रों ने दावा किया कि सिंघल जवाब देने में टालमटोल कर रही थीं, जिसके चलते उन्हें गिरफ्तार किया गया.

ईडी ने उन्हें विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया और जहां से सिंघल को पांच दिनों के लिए ईडी की हिरासत में भेजे जाने के बाद बुधवार की रात उन्हें होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार भेज दिया गया।

अधिकारी दूसरे दिन पूछताछ के लिए सुबह करीब 10 बजकर 40 मिनट पर रांची के हिनू इलाके में एजेंसी के क्षेत्रीय कार्यालय पहुंची थीं और शाम करीब पांच बजे उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया.

इससे पहले मंगलवार को भी सिंघल करीब नौ घंटे तक ईडी दफ्तर में थीं जहां उनका बयान दर्ज किया गया था. सूत्रों ने कहा कि कम से कम तीन मौकों पर उनके कारोबारी पति अभिषेक झा का बयान भी मामले में दर्ज किया गया है.

मुख्यमंत्री ने कहा, भाजपा के कार्यकाल में सिंघल को दी गई थी क्लीनचिट

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, जांच 2010-2011 में एक पूर्व सरकारी जूनियर इंजीनियर राम बिनोद प्रसाद सिन्हा के खिलाफ दर्ज 16 एफआईआर से जुड़ी है, लेकिन कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कथित तौर पर अपने पक्ष में एक खनन पट्टा और अपनी पत्नी को जमीन का एक भूखंड आवंटित करने के लिए जांच के दायरे में हैं.

पिछले हफ्ते चुनाव आयोग ने खनन पट्टे के मुद्दे पर सोरेन के भाई और दुमका विधायक बसंत सोरेन को नोटिस जारी किया था. चुनाव आयोग ने पहले मुख्यमंत्री को नोटिस भेजकर आरोपों पर उनका रुख पूछा था.

गिरफ्तारी पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य सरकार को इस विषय में जो भी कानूनी कार्रवाई करनी होगी, वह शुरू करेगी.’

इन अटकलों पर कि ईडी की कार्रवाई को उन आरोपों से जोड़ा जा सकता है कि उन्होंने खनन पट्टा पाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया था, मुख्यमंत्री ने कहा, ‘चोर मचाए शोर. अब तो भाजपा को ये बोलना चाहिए ​कि 20 सालों तक जो उनकी सरकार रही, उसकी पूरी जांच होनी चाहिए.’

सोरेन ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के कार्यकाल में ही 2017 में उन्हें ‘क्लीनचिट’ दी गई थी. उन्हें क्लीनचिट देने वालों की जांच होनी चाहिए.

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘आप (भाजपा) उनसे गलत काम करवाते हैं और आप ही उन्हें क्लीनचिट देते हैं.’

दूसरी ओर, भाजपा ने झामुमो के नेतृत्व वाले गठबंधन पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप लगाया और गिरफ्तार आईएएस अधिकारी को निलंबित करने की मांग की.

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सदस्य दीपक प्रकाश ने आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार ने भ्रष्टाचार के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. उन्होंने सवाल किया कि सिंघल को अब तक निलंबित क्यों नहीं किया गया.

इसी बीच झारखंड के निर्दलीय विधायक और भाजपा के पूर्व मंत्री सरयू रॉय ने कहा कि सिंघल के खिलाफ 24 करोड़ रुपये के उसी मनरेगा घोटाले में कार्रवाई की जा रही है, जिसमें 2014-19 की डबल इंजन सरकार ने उन्हें क्लीनचिट दी थी.

रॉय ने ट्वीट किया, ‘इसमें उपर पांच फीसदी कमीशन लेने का आरोप है, जो 1.20 करोड़ रुपये होता है. पर उनके चार्टर्ड अकाउंटेंट के यहां पकड़ा गया 19 करोड़ रुपये. क्या यह धन क्लीनचिट देने वालों के समय का है?’

मामले में दूसरी गिरफ्तारी

सिंघल से कथित तौर पर जुड़े चार्टर्ड अकाउंटेंट व वित्तीय सलाहकार सुमन कुमार के बाद यह इस मामले में हुई दूसरी गिरफ्तारी है. कुमार को ईडी ने सात मई को गिरफ्तार किया था. इससे एक दिन पहले उनके परिसरों और विभिन्न राज्यों में अन्य जगहों पर केंद्रीय एजेंसी ने छापेमारी की थी.

रिपोर्ट के मुताबिक, इसके एक दिन पहले 6 मई को ईडी ने चार राज्यों में 18 स्थानों पर छापे मारे थे, जिसमें आईएएस अधिकारी सिंघल से जुड़े परिसर भी शामिल थे. चार्टर्ड एकांडटेंट के परिसर से 19 करोड़ रुपये से अधिक नकद बरामद होने की सूचना है.

सिंघल के पति अभिषेक झा से जुड़े परिसरों में भी छापे मारे गए थे, जिसमें उनके अस्पताल भी शामिल थे. झा पल्स संजीवनी हेल्थकेयर प्राइवेट हॉस्पिटल के प्रबंध निदेशक हैं, जिसके द्वारा रांची में पल्स अस्पताल और पल्स डायग्नोस्टिक्स सेंटर संचालित किए जाते हैं.

मनी लॉन्ड्रिंग के इस मामले की जांच एक पूर्व सरकारी जूनियर इंजीनियर राम बिनोद प्रसाद सिन्हा और अन्य के खिलाफ 2010-2011 में दर्ज 16 एफआईआर से जुड़ी है, जिनमें 2006 और 2010 के बीच खूंटी में 18.06 करोड़ रुपये के सार्वजनिक धन के कथित गबन करने और सेवा में रहते हुए उनके तथा उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर निवेश करने का आरोप लगाया गया है.

अधिकारियों के अनुसार, खूंटी जिले में मनरेगा के तहत सरकारी परियोजनाओं के निष्पादन के लिए यह धनराशि निर्धारित की गई थी.

जनता के धन की हेराफेरी

सिंघल और अन्य के खिलाफ ईडी की जांच मनी लॉन्ड्रिंग के उस मामले से संबंधित है, जिसमें झारखंड सरकार में पूर्व जूनियर इंजीनियर राम बिनोद प्रसाद सिन्हा को एजेंसी ने 2012 में मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम के तहत दर्ज राज्य सतर्कता ब्यूरो की एफआईआर के संबंध में 17 जून, 2020 को पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया था.

सिन्हा के खिलाफ जनता के धन की हेराफेरी करने के आरोप में धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार से संबंधित भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की आपराधिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था.

सिन्हा ने इस धन को एक अप्रैल 2008 से 21 मार्च 2011 तक जूनियर इं​जीनियर के रूप में काम करते हुए अपने तथा अपने परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर निवेश किया था.

एजेंसी ने पहले कहा था कि उक्त धन को खूंटी जिले में मनरेगा के तहत सरकारी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए रखा गया था. सिन्हा ने ईडी से कहा, ‘उन्होंने जिला प्रशासन को पांच प्रतिशत कमीशन (धोखाधड़ी किए गए धन में से) का भुगतान किया.’

रिपोर्ट के मुताबिक, खनन सचिव पूजा सिंघल 2007 और 2013 के बीच चतरा, खूंटी और पलामू के उपायुक्त/जिला मजिस्ट्रेट के रूप में कार्य किया था. सिंघल 2009-2010 के बीच खूं​टी की डिप्टी कमिश्नर (उपायुक्त) थीं. ईडी के सूत्रों ने कहा कि 2007-2013 के दौरान उनके खिलाफ अनियमितताओं के कई आरोप थे.

ईडी ने पहले अदालत को बताया था, ‘पूजा सिंघल और अभिषेक झा के (बैंक) खातों में इस अवधि के दौरान 1.43 करोड़ रुपये की बड़ी नकदी जमा है. विभिन्न वित्तीय वर्षों में जमा की गई नकदी वेतन से अधिक थी.’

पूजा सिंघल पर शिकायत मिलने के बाद भी कार्रवाई न करने का आरोप

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, इस साल फरवरी में झारखंड हाईकोर्ट में दायर एक हलफनामे में ईडी ने कहा था कि पूजा सिंघल ने विभिन्न शिकायतों के बावजूद सिन्हा के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की.

मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम, 2002 के तहत दर्ज अपने बयान में सिन्हा ने दावा किया था कि वह इंजीनियरिंग अनुभाग में अपने वरिष्ठों को कमीशन के रूप में मनरेगा परियोजना की लागत का 5 प्रतिशत और प्रशासन पक्ष को 5 प्रतिशत का भुगतान करते थे, जिसमें खूंटी में डिप्टी कमिश्नर का कार्यालय भी शामिल है.

सिन्हा ने बयान में यह भी कहा था कि डिप्टी कमिश्नर को सीधे तौर पर कोई कमीशन नहीं दिया जाता था और जिला प्रशासन के लिए दिए गए 5 प्रतिशत कमीशन में इसका ध्यान रखा जाता था.

ईडी ने कहा कि सिन्हा को ग्रामीण विकास विभाग द्वारा 11 सितंबर, 2006 से 17 मई, 2010 तक निलंबित किए जाने के बावजूद उन्होंने विशेष डिवीजन के साथ-साथ जिला बोर्ड के साथ खूंटी जिले में काम करना जारी रखा.

ईडी ने अपने हलफनामे में कहा था, ‘यह भी देखा गया कि डिप्टी कमिश्नर के रूप में पूजा सिंघल के कार्यकाल के दौरान आरोपी जूनियर इंजीनियर राम बिनोद प्रसाद सिन्हा दिए गए अग्रिम भुगतान को रोकने के लिए और इस राशि की वसूली के संबंधी में कोई कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी.’

हलफनामे में कहा था, ‘उनके कार्यमुक्त होने के बाद भी जिला प्रशासन द्वारा उन्हें पहले से दी गई धनराशि की वसूली के लिए या किसी अन्य जूनियर इंजीनियर को कार्यभार देने के लिए उन्हें (राम बिनोद प्रसाद सिन्हा) मजबूर करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया था.’

झारखंड-कैडर की आईएएस अधिकारी, सिंघल ने पिछली भाजपा सरकार में कृषि सचिव से लेकर वर्तमान झामुमो के नेतृत्व वाली सरकार में पर्यटन और उद्योग सचिव तक कई शीर्ष पदों पर कार्य किया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)