नॉर्थ ईस्ट

असम एनआरसी प्रमुख ने आंकड़ों में ‘विसंगतियों’ के आरोप में हजेला के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराई

राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के असम समन्वयक हितेश देव शर्मा ने अपने पूर्ववर्ती प्रतीक हजेला और अन्य पर रजिस्टर को अद्यतन करते समय राष्ट्र विरोधी और आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाते हुए सीआईडी में एक शिकायत दर्ज कराई है. हालांकि एक अधिकारी ने बताया कि सीआईडी ने अभी आरोपियों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज नहीं की है.

प्रतीक हजेला. (फोटो साभार: फेसबुक/विकिपीडिया)

गुवाहाटी: राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के असम समन्वयक हितेश देव शर्मा ने अपने पूर्ववर्ती प्रतीक हजेला और अन्य पर रजिस्टर को अद्यतन करते समय ‘राष्ट्र विरोधी’ और आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाते हुए सीआईडी में एक शिकायत दर्ज कराई है.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) ने अभी तक आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की है. आरोपियों में इस प्रक्रिया से जुड़े कई अधिकारी और डेटा एंट्री ऑपरेटर शामिल हैं.

असम में रह रहे मूल भारतीय नागरिकों के आधिकारिक रिकॉर्ड एनआरसी को सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में अद्यतन किया गया था और 31 अगस्त 2019 को यह सूची जारी की गई थी, जिसमें 19 लाख से अधिक आवेदकों को बाहर कर दिया गया था. हालांकि, भारत के रजिस्ट्रार जनरल ने इसे अधिसूचित नहीं किया है.

एक अधिकारी ने नाम न उजागर करने की शर्त पर बताया, ‘हमें एनआरसी कार्यालय से एक शिकायत मिली है. सीआईडी द्वारा किसी भी मामले को दर्ज करने से पहले उचित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा. हम इस शिकायत पर विचार कर रहे हैं.’

इस शिकायत की एक प्रति समाचार एजेंसी ‘पीटीआई’ के पास उपलब्ध है. शिकायत में शर्मा ने एनआरसी को अद्यतन करने की प्रक्रिया के दौरान ‘फैमिली-ट्री वेरिफिकेशन’ और अन्य दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया में कथित विसंगतियों का आरोप लगाया है.

नागरिकता दस्तावेज को अद्यतन करने की प्रक्रिया के दौरान विरासत के आंकड़ों की सटीकता स्थापित करने के लिए ‘फैमिली-ट्री’ बनाए गए थे.

शर्मा ने आरोप लगाया है कि हजेला ने ‘फैमिली-ट्री’ के मिलान के दौरान गुणवत्ता की जांच के कोई आदेश नहीं दिए.

उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर में भी गुणवत्ता की जांच की कोई गुंजाइश नहीं थी, इसलिए अधिकारियों को उनके निहित स्वार्थों को पूरा करने के लिए गलत नतीजे अपलोड करने की पूरी छूट मिली.

शिकायत में कहा गया है कि हो सकता है कि प्रतीक हजेला ने ऐसे सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल का आदेश देकर एनआरसी में अयोग्य लोगों के नामों को शामिल करने के लिए अनिवार्य गुणवत्ता जांच को जान-बूझकर नजरअंदाज किया हो, जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने वाले राष्ट्र-विरोधी कृत्य के तौर पर देखा जा सकता है.

शर्मा ने दावा किया कि अद्यतन प्रक्रिया के कई अन्य चरणों में भी विसंगतियां पाई गई हैं. उन्होंने हजेला तथा अन्य लोगों पर धोखाधड़ी, जालसाजी व अन्य अपराधों में शामिल होने का आरोप लगाते हुए एक मामला दर्ज करने की मांग की है.

पहले भी अन्य लोगों ने ऐसे मुद्दों को लेकर हजेला के खिलाफ शिकायतें दी हैं. सुप्रीम कोर्ट में भी कई याचिकाएं लंबित हैं.

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने 10 मई 2021 को कार्यभार संभालने के बाद कहा था कि उनकी सरकार असम के सीमावर्ती जिलों के लिए एनआरसी में 20 प्रतिशत नामों का पुन: सत्यापन कराना चाहती है.

असम-मेघालय कैडर के 1995 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी प्रतीक हजेला को सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में एनआरसी का राज्य समन्वयक नियुक्त किया था. उन्हें 12 नवंबर 2019 को इस प्रभार से मुक्त कर दिया गया था. अदालत ने हजेला का असम से उनके गृह राज्य मध्य प्रदेश में तबादला करने का आदेश दिया था. उन्होंने राज्य के विशेष अधिकारी एवं आयुक्त (स्वास्थ्य सेवाएं) का कार्यभार संभाला था.

अप्रैल 2020 में देश में कोरोना महामारी की शुरुआत के समय मध्य प्रदेश में सत्ता में वापसी के कुछ दिनों के भीतर ही मुख्यमंत्री शिवराज चौहान ने प्रतीक हजेला को प्रदेश के स्वास्थ्य प्रमुख के पद से हटा दिया था.

पिछले साल जून में गैर सरकारी संगठन असम पब्लिक वर्क्स (एपीडब्ल्यू) ने पूर्व एनआरसी संयोजक प्रतीक हजेला और अन्य के विरुद्ध राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) प्रक्रिया में गड़बड़ी करने के आरोप में अपराध जांच विभाग (सीआईडी) में शिकायत दर्ज कराई थी.

एपीडब्ल्यू ने आरोप लगाया था कि हजेला और उनके नजदीकी सहयोगियों ने प्रवासी पृष्ठभूमि वाले कुछ अधिकारियों, डेटा एंट्री ऑपरेटरों, कुछ अल्पसंख्यक नेताओं और कुछ राष्ट्र विरोधी तत्वों के साथ मिलकर ‘फैमिली-ट्री’ सत्यापन प्रक्रिया में गड़बड़ी कर अपडेटेड एनआरसी में अवैध प्रवासियों का नाम जोड़ा दिया था.

बता दें मई 2021 में असम एनआरसी के समन्वयक हितेश शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में एक आवेदन दायर कर दावा किया था कि एनआरसी अपडेट करने की प्रक्रिया में कई गंभीर, मौलिक और महत्वपूर्ण त्रुटियां सामने आई हैं, इसलिए इसके पुन: सत्यापन की आवश्यकता है. सत्यापन का कार्य संबंधित जिलों में निगरानी समिति की देखरेख में किया जाना चाहिए.

एनआरसी राज्य समन्वयक शर्मा ने दावा किया था कि कई अयोग्य व्यक्तियों को सूची में शामिल कर लिया गया है, जिसे बाहर किया जाना चाहिए.

मालूम हो कि असम के नागरिकों की तैयार अंतिम सूची यानी कि अपडेटेड एनआरसी 31 अगस्त, 2019 को जारी की गई थी, जिसमें 31,121,004 लोगों को शामिल किया गया था, जबकि 1,906,657 लोगों को इसके योग्य नहीं माना गया था.

नवंबर, 2019 में असम पब्लिक वर्क्स (एपीडब्ल्यू) ने पूर्व संयोजक प्रतीक हजेला पर एनआरसी अपडेट करने की प्रक्रिया में बड़े स्तर पर सरकारी धनराशि के गबन करने का आरोप लगाया था और उसके खिलाफ सीबीआई की भ्रष्टाचार रोधी शाखा में एफआईआर दर्ज कराई थी.

उससे पहले अक्टूबर 2019 में एनआरसी की अंतिम सूची में कथित विसंगतियों के कारण प्रतीक हजेला के खिलाफ दो मामले दर्ज किए गए थे.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)