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असम: कथित हिरासत में मौत के बाद भीड़ ने थाना जलाया, प्रशासन ने आरोपियों के घर पर बुलडोज़र चलाया

एक मछली व्यापारी सफीकुल इस्लाम की कथित तौर पर हिरासत में मौत के बाद भीड़ ने बीते 21 मई को असम के नगांव ज़िले के बटाद्रवा थाने आग लगा दी थी. रविवार को प्रशासन ने सलोनाबारी गांव में अतिक्रमण अभियान चलाकर उन आरोपियों के घर गिरा दिए, जो कथित तौर पर आगज़नी में शामिल थे. पुलिस ने हिरासत में मौत से भी इनकार किया है. हालांकि मृतक के परिवार के सदस्यों ने दावा किया कि पुलिस ने उसकी रिहाई के लिए 10,000 रुपये और एक बत्तख रिश्वत के रूप में मांगी थी.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

नगांव: असम के नगांव जिले में एक व्यक्ति की कथित तौर पर हिरासत में मौत के बाद भीड़ ने शनिवार (21 मई) को एक पुलिस थाने में आगजनी की थी. बटाद्रवा थाने में की गई इस आगजनी के आरोप में रविवार को आठ व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया और घटना की जांच के लिए जल्द ही एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया जाएगा.

यह जानकारी पुलिस के एक शीर्ष अधिकारी ने रविवार को दी. अधिकारी ने कहा कि एक स्थानीय निवासी की कथित तौर पर हिरासत में मौत की अलग से जांच का आदेश दिया गया है, जिसके बाद थाने पर हमला हुआ था.

असम के विशेष डीजीपी (कानून और व्यवस्था) जीपी सिंह ने कहा, ‘भीड़ में लगभग 40 लोग थे. हमने आठ की पहचान की है और गिरफ्तार किया है और 15 को हिरासत में लिया गया है. पकड़े जाने वालों में एक महिला और एक नाबालिग भी शामिल है.’

बटाद्रवा 16वीं शताब्दी के वैष्णव कवि-संत श्रीमंत शंकरदेव के जन्मस्थान है, जिसे असमिया समुदाय के लिए पवित्र माना जाता है.

जिला प्रशासन ने रविवार को सलोनाबारी गांव में अतिक्रमणकारियों को हटाने का एक अभियान शुरू किया, जिसके निवासियों ने एक दिन पहले एक स्थानीय व्यक्ति सफीकुल इस्लाम की कथित तौर पर हिरासत में मौत के बाद कथित रूप से हमला किया था और पुलिस थाने में आग लगा दी थी.

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि रविवार की सुबह बुलडोजर लेकर प्रशासन के लोग पुलिस थाने से करीब छह किलोमीटर दूर गांव पहुंचे और थाने में आग लगाने वालों के ‘अवैध’ घरों को ध्वस्त कर दिया.

इस्लाम को घटना से पहले वाली रात (20 मई) हिरासत में लिया गया था.

रविवार को बटाद्रवा का दौरा करने वाले पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) भास्कर ज्योति महंत ने इससे पहले दिन में महंत ने कहा था कि हिरासत में मौत के आरोप में स्थानीय लोगों ने पिछले दिन जिस बटाद्रवा थाने में आगजनी की थी, उसके प्रभारी को निलंबित कर दिया गया है.

डीजीपी महंत ने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर विस्तार से बताया कि 39 वर्षीय मछली व्यापारी सफीकुल इस्लाम को शराब के नशे में होने की शिकायत मिलने के बाद 20 मई को रात 9.30 बजे पुलिस थाने लाया गया था.

उन्होंने बताया, ‘वह वास्तव में थाने लाए जाने से पहले एक सड़क पर पड़ा हुआ था. चिकित्सकीय जांच के बाद उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया. अगले दिन उसे रिहा कर दिया गया और उसकी पत्नी को सौंप दिया गया. उसकी पत्नी ने उसे कुछ पानी/भोजन भी दिया.’

उन्होंने कहा, ‘बाद में उसने तबीयत बिगड़ने की शिकायत की और इसके बाद उसे एक के बाद एक दो अस्पतालों में ले जाया गया. दुर्भाग्य से, उसे मृत घोषित कर दिया गया.’

उन्होंने कहा कि इसके बाद भीड़ ने यह आरोप लगाते हुए शनिवार (21 मई) दोपहर को थाने और कई दोपहिया वाहनों में आग लगा दी कि मछली व्यापारी की मौत पुलिस की प्रताड़ना के कारण हुई.

हालांकि सलोनाबारी गांव के मछली व्यापारी के परिवार के सदस्यों ने दावा किया कि पुलिस ने उसकी रिहाई के लिए 10,000 रुपये और एक बत्तख रिश्वत के रूप में मांगी थी और उसकी पत्नी शनिवार की सुबह एक बत्तख के साथ पुलिस थाने गई थी.

उन्होंने दावा किया कि बाद में जब वह पैसे लेकर लौटी तो उसे पता चला कि उसके पति को नगांव सिविल अस्पताल ले जाया गया है. उन्होंने दावा किया कि वहां पहुंचने के बाद उसने अपने पति को मृत पाया.

आरोप है कि इसके बाद ग्रामीणों ने यातना के कारण व्यक्ति की मौत का आरोप लगाते हुए थाने का घेराव किया, कथित तौर पर ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारियों के साथ मारपीट की और फिर इमारत को आग लगा दी.

घटना के वीडियो में एक महिला को थाने के सामने खड़े दोपहिया वाहनों पर कुछ ज्वलनशील तरल पदार्थ छिड़कते और आग लगाते हुए देखा गया. कुछ ही देर में थाना आग की चपेट में आ गया और दमकल की गाड़ियों ने बाद में आग पर काबू पाया.

विशेष डीजीपी (कानून व्यवस्था) जीपी सिंह ने बटाद्रवा का दौरा किया और कहा कि फॉरेंसिक विशेषज्ञों से आगजनी स्थल से अवशेष एकत्र करने का अनुरोध किया गया है, क्योंकि आरोप हैं कि मिट्टी के तेल या पेट्रोल जैसे ज्वलनशील तरल पदार्थों का इस्तेमाल किया गया था.

थाने में रखी केस डायरी और अन्य साक्ष्यों के नुकसान के विषय पर सिंह ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में सभी एफआईआर ऑनलाइन दर्ज की गईं और केस डायरी की प्रतियां दो अन्य कार्यालयों में भी रखी गई हैं.

उन्होंने कहा कि पड़ोसी जिले कार्बी आंगलोंग के एक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एसपी) प्रकाश सोनोवाल को हिरासत में मौत के आरोप की स्वतंत्र जांच करने का काम सौंपा गया है.

उन्होंने कहा, ‘मैंने एक तस्वीर देखी है जो स्पष्ट रूप से इस ओर इंगित करती है कि इस्लाम को जब शुक्रवार (20 मई) रात थाने लाया गया था, तब उसने शराब पी रखी थी या अधिक मात्रा में मादक पदार्थ का सेवन किया था. तकनीकी रूप से, उसकी हिरासत में मौत हो गई. पुलिस पर गलती करने के आरोप हैं और स्वतंत्र जांच ही इसका निर्धारण करेगी.’

थाने में आगजनी के लिए एसआईटी का गठन होगा

महंत ने हिंसक घटना का जिक्र करते हुए बताया, ‘उस दिन बाद में क्या हुआ, हम सभी जानते हैं. कुछ स्थानीय शरारती तत्वों ने कानून को अपने हाथ में ले लिया और थाने में आग लगा दी. इनमें महिलाएं, पुरुष, युवा और बुजुर्ग सभी शामिल थे. लेकिन जिस तैयारी के साथ वे आए थे और पुलिस पर उन्होंने जिस क्रूर और संगठित तरीके से हमला किया, उसने हमें गहराई से सोचने पर मजबूर कर दिया है.’

डीजीपी ने इस बात पर जोर दिया कि असम पुलिस को नहीं लगता कि हमलावर मृतक के शोक संतप्त परिजन थे, बल्कि यह पहचान कर ली गई है, ‘वे सभी खराब चरित्र के थे और उन लोगों के रिश्तेदार थे, जिनका आपराधिक रिकॉर्ड थाने के भीतर सबूत के तौर पर था, जो आग में जलकर नष्ट हो गए. इसलिए यह मत सोचिए कि यह एक साधारण क्रिया के बदले की गई प्रतिक्रिया की घटना है. इसमें और भी बहुत कुछ है.’

महंत ने कहा, ‘आगजनी की घटना की जांच करने के लिए एक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया जाएगा. आठ व्यक्तियों को पहले ही पकड़ा जा चुका है और अन्य की पहचान करने और उन्हें पकड़ने के लिए जांच जारी है.’

हमले के पीछे जिहादियों की संभावित संलिप्तता के सवाल पर महंत ने कहा, ‘मैं उन्हें जिहादी नहीं कहूंगा. लेकिन शायद भीड़ को उन लोगों ने जुटाया था, जिन्हें भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल संगठनों द्वारा प्रशिक्षित किया गया था.’

डीजीपी ने कहा कि पुलिस के पास सूचना है कि कट्टरपंथी संगठन अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (एबीटी) नगांव और आसपास के इलाकों में अपना अड्डा जमाने की कोशिश कर रही है.

डीजीपी ने कहा, ‘असम, त्रिपुरा और भोपाल में हाल में एबीटी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया गया था. हम जानते हैं कि उनमें से कुछ इन क्षेत्रों में सक्रिय हैं. उन्होंने मस्जिदों और मदरसों में प्रवेश किया है, लेकिन उन्हें आम लोगों का समर्थन नहीं है.’

उन्होंने कहा, ‘वे स्लीपर सेल बनाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि विदेशी मुजाहिदीनों को यहां लाया जा सके.’

महंत ने कहा कि घटना ‘व्यवस्थित और सुनियोजित’ लग रही है. उन्होंने दावा किया, ‘इस विशेष घटना में, हमें तैयारियों का संकेत मिला है. लोगों को उकसाया गया था.’

डीजीपी ने यह भी कहा कि थाने में आग लगाने वाली भीड़ में एक मादक पदार्थ तस्कर और एक लुटेरे की पहचान की गई है, साथ ही पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या हमला सबूत और केस डायरी को जलाने के उद्देश्य से किया गया था.

कथित हिरासत में मृत इस्लाम का घर अतिक्रमण अभियान में गिराया गया

सलोनाबारी गांव में अभियान के बारे में पूछे जाने पर विशेष डीजीपी (कानून व्यवस्था) जीपी सिंह ने कहा कि घटना में शामिल कई लोगों ने उन जमीनों पर कब्जा कर लिया है, जिन पर वे रहते हैं और स्वामित्व दिखाने के लिए जाली दस्तावेज तैयार किए हैं.

पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘हमने मामला दर्ज कर लिया है और जिला प्रशासन को सतर्क कर दिया है, जिसने बेदखली अभियान चलाया.’

स्थानीय खबरों के अनुसार, लगभग छह मकानों को रविवार को प्रशासन द्वारा ध्वस्त कर दिया गया, जिसमें मृतक इस्लाम का मकान भी शामिल है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार शाम को असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने कहा कि यह घटना उस ‘खतरनाक’ समय का प्रतिबिंब थी, जिसमें असम के लोग रह रहे थे.

उन्होंने कहा, ‘एक पुलिस स्टेशन को जला दिया गया. जब तक हमारी सरकार सत्ता में है, हम ऐसे अपराधों को माफ नहीं करेंगे.’

उन्होंने कहा, ‘बटाद्रवा में बहुत सारी जमीन ‘अवैध कब्जे’ में थी. मैंने जिला प्रशासन को ऐसे क्षेत्रों की पहचान करने का निर्देश दिया है. हम असम की शांति भंग करने की कोशिश करने वाले किसी भी तत्व के खिलाफ या तो बेदखली या अन्य कानूनों के माध्यम से कार्रवाई करेंगे.’

इस बीच, एआईयूडीएफ के एक पूर्व विधायक अनवर हुसैन लस्कर ने इस्लाम की मौत को लेकर असम राज्य मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई है.

अतिक्रमण अभियान के बाद बारपेटा के कांग्रेस सांसद अब्दुल खलीक ने सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा, ‘हम कभी भी पुलिस स्टेशन पर हमले का समर्थन नहीं करते हैं, लेकिन पुलिस द्वारा हमलावरों के घरों को बुलडोजर बनाना सीधे तौर पर मानवाधिकारों का उल्लंघन है.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)