अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की शोध छात्रा ने ख़ुदकुशी की कोशिश की, प्रताड़ना का आरोप लगाया

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि पीएचडी छात्रा ने कुलपति से की गई शिकायत में आरोप लगाया है कि उनके दो शोध सुपरवाइज़रों द्वारा उनकी पीएचडी थीसिस जमा करने से मना कर दिया, जिससे उन्होंने यह क़दम उठाया. मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने दो सदस्यीय जांच समिति गठित कर उसे तीन दिन के अंदर अपनी रिपोर्ट देने को कहा है.

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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी. (फोटो: पीटीआई)

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि पीएचडी छात्रा ने कुलपति से की गई शिकायत में आरोप लगाया है कि उनके दो शोध सुपरवाइज़रों द्वारा उनकी पीएचडी थीसिस जमा करने से मना कर दिया, जिससे उन्होंने यह क़दम उठाया. मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने दो सदस्यीय जांच समिति गठित कर उसे तीन दिन के अंदर अपनी रिपोर्ट देने को कहा है.

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी. (फोटो: पीटीआई)

अलीगढ़: उत्तर प्रदेश में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में शोध-पत्र जमा करने के नाम पर वरिष्ठ सुपरवाइजर द्वारा कथित रूप से प्रताड़ित किए जाने के कारण एक शोध छात्रा के आत्महत्या का प्रयास करने के मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय समिति गठित की गई है. एएमयू के अधिकारियों ने यह जानकारी दी.

एएमयू के प्रवक्ता उमर पीरजादा ने मंगलवार को बताया कि कुलपति तारिक मंसूर ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सांख्यिकी विभाग के प्रोफेसर काजी मजहर अली और गणित विभाग की प्रोफेसर सुबूही खान की सदस्यता वाली एक जांच समिति गठित कर उसे तीन दिन के अंदर अपनी रिपोर्ट देने को कहा है.

एएमयू के अधिकारियों के मुताबिक, एक शोध छात्रा ने पिछले रविवार (22 मई) को नींद की गोलियां खाकर कथित रूप से आत्महत्या का प्रयास किया था. उन्हें गंभीर हालत में जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया था. छात्रा की हालत अब खतरे से बाहर बताई जाती है.

पीरजादा ने बताया कि शोध छात्रा ने कुलपति से की गई शिकायत में आरोप लगाया है कि उसके शोध सुपरवाइजर और सह-सुपरवाइजर शोध-पत्र जमा करने के नाम पर उसे प्रताड़ित कर रहे थे.

अस्पताल में भर्ती शोध छात्रा ने एएमयू प्रशासन को दी अपनी शिकायत में अपने दो सुपरवाइजरों पर उस पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है. यह आरोप भी है सुपरवाइजरों ने छात्रा को पीएचडी थीसिस जमा करने से मना कर दिया, जिससे उन्होंने यह कदम उठाया.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, एएमयू प्रॉक्टर मोहम्मद वसीम अली ने कहा, ‘उन्होंने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि उसके दो सुपरवाइज- इंटरडिसिप्लिनरी ब्रेन रिसर्च सेंटर में सहायक प्रोफेसर डॉ. मेहदी हयात शाही और बायोकेमिस्ट्री विभाग के सह-पर्यवेक्षक प्रोफेसर मोइनुद्दीन ने उन्हें यह कदम उठाने के लिए मजबूर किया.’

प्रॉक्टर ने कहा, ‘सुपरवाइज स्पष्ट रूप से उन्हें पीएचडी थीसिस जमा करने से मना कर रहे थे… हम दूसरे पक्ष को अपना पक्ष भेजने का मौका देंगे.’

सूत्रों ने कहा कि एएमयू से इंटरडिसिप्लिनरी ब्रेन रिसर्च सेंटर से पीएचडी कर रहीं छात्रा ने बीते 22 मई को बड़ी संख्या में नींद की गोलियों खा ली थीं, जब वह परिसर के पास अपने किराये के अपार्टमेंट में अकेली थी.

एक अधिकारी ने बताया, जब उनके पति लौटे, तो उन्होंने पीएचडी छात्रा को अस्वस्थ पाया और उन्हें अस्पताल ले गए. अस्पताल में छात्रा ने अपने सुपरवाइजरों के खिलाफ अस्पताल प्रशासन को लिखित शिकायत दी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)