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निजी कंपनियों का दावा- पेट्रोल पर 20-25, डीज़ल पर 14-18 रुपये लीटर का नुकसान, सरकार को पत्र लिखा

फेडरेशन ऑफ इंडियन पेट्रोलियम इंडस्ट्री ने निजी ईंधन खुदरा विक्रेताओं को राहत प्रदान करने, उनके लिए एक अधिक व्यवहार्य निवेश वातावरण बनाने और इस क्षेत्र में निवेश, रोज़गार सृजन को आकर्षित करने के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय के हस्तक्षेप की मांग की है. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी छत्तीसगढ़ को पर्याप्त ईंधन देने के लिए केंद्र को पत्र लिखा है.

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बावजूद दाम नहीं बढ़ने की वजह से ईंधन की खुदरा बिक्री करने वाली निजी क्षेत्र की जियो-बीपी और नायरा एनर्जी जैसी कंपनियों ने दावा​ किया है कि उन्हें डीजल की बिक्री पर प्रति लीटर 20 से 25 रुपये और पेट्रोल पर 14 से 18 रुपये का नुकसान हो रहा है.

इन कंपनियों ने पेट्रोलियम मंत्रालय को इस बारे में पत्र लिखा है और सरकार से एक व्यवहार्य निवेश वातावरण बनाने के लिए कदम उठाने की मांग की है.

फेडरेशन ऑफ इंडियन पेट्रोलियम इंडस्ट्री (एफआईपीआई) ने 10 जून को पेट्रोलियम मंत्रालय को लिखे पत्र में कहा है कि पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर नुकसान से खुदरा कारोबार में निवेश सिमट जाएगा.

एफआईपीआई निजी क्षेत्र की कंपनियों के अलावा इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (एचपीसीएल) को अपने सदस्यों में गिनता है.

पत्र में दावा किया गया है,अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और इसके उत्पादों की कीमतें एक दशक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं, लेकिन सरकारी ईंधन खुदरा विक्रेताओं ने पेट्रोल और डीजल कीमतों को ‘फ्रीज’ किया हुआ है. सरकारी कंपनियों का ईंधन खुदरा कारोबार में 90 प्रतिशत का हिस्सा है. इस समय ईंधन के दाम लागत के दो-तिहाई पर ही हैं, जिससे निजी कंपनियों को नुकसान हो रहा है.

कहा गया है कि इससे जियो-बीपी, रोसनेफ्ट समर्थित नायरा एनर्जी और शेल के सामने या तो दाम बढ़ाने या अपने ग्राहक गंवाने का संकट पैदा हो गया है.

पेट्रोल और डीजल के लिए खुदरा बिक्री मूल्य में नवंबर, 2021 की शुरुआत और 21 मार्च, 2022 के बीच कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद रिकॉर्ड 137 दिन तक कोई वृद्धि नहीं हुई थी.

22 मार्च, 2022 से खुदरा बिक्री मूल्य को 14 मौकों पर प्रतिदिन औसतन 80 पैसे प्रति लीटर की दर से बढ़ाया गया, जिससे पेट्रोल और डीजल दोनों के दामों में 10 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई.

22 मार्च के बाद से 6 अप्रैल तक 16 दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 10 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी.

मालूम हो कि उत्तर प्रदेश और पंजाब समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव प्रक्रिया शुरू होने से पहले चार नवंबर, 2021 से ही पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें स्थिर बनी हुई थीं. 10 मार्च को चुनाव नतीजे आने के साथ ही पेट्रोल एवं डीजल के दाम में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही थी और 22 मार्च से लगातार इनकी कीमतों में इजाफा किया गया था.

एफआईपीआई के महानिदेशक गुरमीत सिंह ने पत्र में दावा किया कि निजी कंपनियों को लागत से कम मूल्य पर ईंधन की बिक्री (अंडर-रिकवरी) से डीजल पर प्रति लीटर 20-25 रुपये और पेट्रोल पर प्रति लीटर 14-18 रुपये का नुकसान हो रहा है.

छह अप्रैल से ईंधन के खुदरा दाम नहीं बढ़े हैं. वहीं राज्य परिवहन उपक्रमों जैसे थोक खरीदारों को बेचे जाने वाले ईंधन के दाम में अंतरराष्ट्रीय कीमतों के अनुरूप बढ़ोतरी हुई है.

एफआईपीआई ने दावा किया कि इससे बड़ी संख्या में थोक खरीदार खुदरा आउटलेट से खरीद कर रहे हैं, जिससे निजी क्षेत्र की कंपनियों का नुकसान और बढ़ रहा है.

पत्र में सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप की अपील की गई है. एफआईपीआई ने कहा कि निजी क्षेत्र की सभी पेट्रोलियम विपणन कंपनियां खुदरा क्षेत्र में भारी निवेश कर रही हैं, लेकिन इस समय उन्हें एक मुश्किल हालात से जूझना पड़ रहा है.

पत्र में कहा गया है कि इससे निजी कंपनियों की निवेश के साथ-साथ परिचालन की क्षमता प्रभावित हो रही है. साथ ही वे अपने नेटवर्क का भी विस्तार नहीं कर पा रही हैं.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, इसमें कहा गया है कि यह नुकसान आगे निवेश करने के साथ-साथ अपने नेटवर्क को संचालित और विस्तारित करने की उनकी क्षमता को सीमित कर देगा.

एफआईपीआई ने निजी ईंधन खुदरा विक्रेताओं को कुछ राहत प्रदान करने, उनके लिए एक अधिक व्यवहार्य निवेश वातावरण बनाने और इस क्षेत्र में और निवेश, रोजगार सृजन को आकर्षित करने के लिए सही वातावरण और पारिस्थितिकी तंत्र के विकास का समर्थन करने के लिए मंत्रालय के हस्तक्षेप की मांग की.

पत्र में कहा, ‘हाल के दिनों में निजी कंपनी के आउटलेट पर अधिक कीमतों और उनमें से कुछ की बिक्री में कमी के कारण सार्वजनिक क्षेत्र के पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ हुई, जिससे उनमें से कुछ मध्य प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक और गुजरात जैसे राज्यों में स्टॉक से बाहर हो गए.’

भूपेश बघेल ने केंद्र को पत्र लिखकर कहा, छत्तीसगढ़ को पर्याप्त ईंधन दें

रायपुर: इस बीच छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रविवार को कहा कि उन्होंने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पत्र लिखकर अनुरोध किया कि राज्य में पेट्रोल-डीजल की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए.

बघेल ने पत्र में यह भी लिखा कि ईंधन की ‘कमी’ से जहां लोगों को समस्या है, वहीं कृषि गतिविधियों पर भी असर पड़ रहा है.

रायपुर के स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डे पर संवाददाताओं से बघेल ने कहा, ‘पिछले कुछ महीनों से राज्य में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति में कमी आई है, जिसके परिणामस्वरूप कई पेट्रोल पंपों पर ईंधन नहीं है.’

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ पेट्रोलियम डीलर कल्याण संघ के अनुसार, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के राज्य में 750 खुदरा केंद्र हैं, जो ईंधन की अनियमित आपूर्ति के कारण बिक्री को रोकने के लिए मजबूर हैं.

उन्होंने कहा कि समीक्षा से पता चला कि पहले पेट्रोलियम डिपो में 4-5 दिनों के लिए बफर स्टॉक हुआ करता था, लेकिन अब उसके पास केवल एक दिन के लिए बफर स्टॉक है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ एक कृषि प्रधान राज्य है और मानसून की शुरुआत के साथ कृषि गतिविधियां शुरू हो गई हैं, लेकिन डीजल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं होने से किसानों को ट्रैक्टर से काम करने में परेशानी हो रही है.

बघेल ने कहा कि ईंधन की कमी के कारण एम्बुलेंस जैसी आवश्यक सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं.

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय मंत्री पुरी से राज्य में एचपीसीएल, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड और भारत पेट्रोलियम के डिपो में ईंधन की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है, ताकि आम लोगों और किसानों को समस्या का सामना न करना पड़े.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)