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असम बाढ़: 12 और लोगों की मौत, 55 लाख लोग प्रभावित; ब्रह्मपुत्र, बराक नदियों का जलस्तर बढ़ना जारी

असम में बाढ़ और भूस्खलन से अभी तक 101 लोगों की मौत हो गई है. इस साल बाढ़ की मौजूदा लहर में 99,026 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र के फसल को नुकसान पहुंचा है. काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में बाढ़ के पानी से कुल 233 शिविरों में से कम से कम 26 जलमग्न हो गए हैं और 11 जानवरों की डूबने से मौत हो गई है.

(फोटो: पीटीआई)

गुवाहाटी: असम में बाढ़ की स्थिति बुधवार को भी बेहद गंभीर बनी रही. अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ से राज्य में 12 और व्यक्तियों की मौत हो गई है, जबकि 32 जिलों में 55 लाख लोग इससे प्रभावित हैं.

अधिकारियों ने बताया कि राज्य की दो प्रमुख नदियों- ब्रह्मपुत्र और बराक का जलस्तर लगातार बढ़ने से नए इलाकों में बाढ़ का पानी भरने लगा है.

उन्होंने बताया कि होजाई में चार लोगों की मौत हुई है, जबकि बारपेटा और नलबाड़ी में तीन-तीन और कामरूप जिले में दो लोगों की मौत हुई है. उन्होंने बताया कि राज्य में बाढ़ और भूस्खलन से अभी तक 101 लोगों की मौत हुई है.

अधिकारियों ने बताया कि बराक घाटी के तीन जिलों – कछार, करीमगंज और हैलीकांडी में हालत अभी भी गंभीर है.

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकार द्वारा जारी बुलेटिन के अनुसार, राज्य के 36 में से 32 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं जिसके कारण 54,57,601 लोग बाढ़ की चपेट में हैं.

आउटलुक के मुताबिक, सबसे बुरी तरह प्रभावित जिलों में बारपेटा है, जहां 11,29,390 लोग प्रभावित हैं. उसके बाद कामरूप जिला है, जहां 7,89,496 लोग प्रभावित हैं. इसी तरह धुबरी में 5,97,153 लोग तबाही की चपेट में हैं.

केंद्रीय जहाजरानी मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने नागांव जिले के कपिली ब्लॉक के फुलगुरी हायर सेकेंडरी स्कूल में राहत शिविर का दौरा किया और प्रभावित लोगों से बातचीत की.

उन्होंने कहा कि एक केंद्रीय टीम जल्द ही राज्य का दौरा करेगी, नुकसान का आकलन करेगी, एक रिपोर्ट तैयार करेगी और पुनर्वास और सहायता के लिए इसे सरकार को सौंपेगी.

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने भी स्थिति की समीक्षा करने के लिए ट्रेन से नागांव की यात्रा की. उन्होंने एक नाव में विभिन्न बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और कामरूप कॉलेज और राहा हायर सेकेंडरी स्कूल में राहत शिविरों में शरण लिए हुए लोगों से बातचीत की.

उन्होंने चापर्मुख रेलवे स्टेशन पर शरण लिए हुए बाढ़ प्रभावित लोगों से भी बातचीत की. शर्मा ने मोरीगांव जिले के नेल्ली में राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे अस्थायी राहत शिविरों में बाढ़ प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और उन्हें हरसंभव मदद का आश्वासन दिया. स्थिति का जायजा लेने के लिए मुख्यमंत्री के गुरुवार को कछार, सिलचर जाने की संभावना है.

अधिकारियों ने कहा कि लगातार बारिश के कारण आई विनाशकारी बाढ़ से 112 राजस्व मंडल और 4,941 गांव प्रभावित हुए हैं. उन्होंने बताया कि राज्य में कुल मिलाकर 2,71,125 लोगों ने 845 राहत शिविरों में शरण ली है.

केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के अनुसार, नागांव जिले के कामरूप में कोपिली नदी और निमाटीघाट, तेजपुर, गोआलपाड़ा व धुबरी में दिसांग तथा ब्रह्मपुत्र खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं.

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में बाढ़ के पानी से कुल 233 शिविरों में से कम से कम 26 जलमग्न हो गए हैं और 11 जानवरों की डूबने से मौत हो गई है.

इंडिया टुडे के मुताबिक, चिरांग जिले में बुधवार को बाढ़ की स्थिति बिगड़ने के बाद दमकल और आपातकालीन सेवा के जवान हरकत में आ गए.

बाजाली, बक्सा, बारपेटा, विश्वनाथ, बोंगाईगांव, कछार, चिरांग, दरांग, धेमाजी, धुबरी, डिब्रूगढ़, दीमा-हसाओ, गोआलपाड़ा, गोलाघाट, हैलाकांडी, होजई, कामरूप, कामरूप मेट्रोपॉलिटन, कार्बी आंगलोंग वेस्ट, करीमगंज, कोकराझार, लखीमपुर, माजुली , मोरीगांव, नागांव, नलबाड़ी, शिवसागर, सोनितपुर, दक्षिण सलमारा, तामूलपुर, तिनसुकिया और उदलगुरी जिले बाढ़ के पानी में डूबे हुए हैं.

इस साल बाढ़ की मौजूदा लहर में 99,026 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र के फसल को नुकसान पहुंचा है.

सेना के अलावा, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा प्रबंधन बल (एसडीआरएफ) और असम पुलिस की अग्निशमन और आपातकालीन सेवाएं राहत और बचाव कार्यों में लगी हुई हैं.

सेना ने बुधवार को दरांग, बारपेटा और कामरूप जिलों में राहत और बचाव अभियान जारी रखा. सेना के कम से कम सात संयुक्त दल बाढ़ पीड़ितों तक पहुंचने के लिए चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं ताकि दूर-दराज के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और दवाएं उपलब्ध कराई जा सकें.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)