हिरासत में लेने से कुछ मिनट पहले ही यूपी पुलिस ने रोहित रंजन पर एफ़आईआर दर्ज की थी: रिपोर्ट

एक रिपोर्ट बताती है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी के एक बयान को ‘ग़लत संदर्भ’ में प्रसारित करने के मामले में  ज़ी न्यूज़ के दो पूर्व कर्मचारियों के ख़िलाफ़ दर्ज एक एफ़आईआर में यूपी पुलिस ने उसी सुबह एंकर रोहित रंजन का नाम जोड़ा था, जिस दिन उन्हें हिरासत में लिया गया था और उसी दिन उनकी ज़मानत भी हो गई थी.

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ज़ी न्यूज़ के एंकर रोहित रंजन. (फोटो साभार: ट्विटर)

एक रिपोर्ट बताती है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी के एक बयान को ‘ग़लत संदर्भ’ में प्रसारित करने के मामले में  ज़ी न्यूज़ के दो पूर्व कर्मचारियों के ख़िलाफ़ दर्ज एक एफ़आईआर में यूपी पुलिस ने उसी सुबह एंकर रोहित रंजन का नाम जोड़ा था, जिस दिन उन्हें हिरासत में लिया गया था और उसी दिन उनकी ज़मानत भी हो गई थी.

जी न्यूज़ के एंकर रोहित रंजन. (फोटो साभार: ट्विटर)

नई दिल्ली: बीते 5 जुलाई को छत्तीसगढ़ पुलिस जब समाचार चैनल जी न्यूज के एंकर रोहित रंजन को गिरफ्तार करने के लिए उनके गाजियाबाद स्थित घर पहुंची थी, तब उत्तर प्रदेश पुलिस ने उनको हिरासत में ले लिया था.

एक रिपोर्ट के अनुसार, हिरासत में लिए जाने के चंद मिनट पहले 5 जुलाई की सुबह 8:33 बजे रोहित रंजन के खिलाफ नामजद यूपी पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी.

और इस प्रकार छत्तीसगढ़ पुलिस को उन्हें गिरफ्तार करने से रोक दिया गया था, इसे लेकर दोनों राज्यों के पुलिस के बीच नोकझोंक भी हुई थी. इंडियन एक्सप्रेस अखबार की एक रिपोर्ट में यह सामने आया है.

बता दें कि रोहित रंजन कांग्रेस नेता राहुल गांधी की एक भ्रामक वीडियो क्लिप चलाने के मामले में कुछ राज्यों में एफआईआर का सामना कर रहे हैं.

बीते एक जुलाई को समाचार चैनल जी न्यूज़ ने अपने प्राइम टाइम शो ‘डीएनए’ में कांग्रेस नेता राहुल गांधी का एक बयान चलाकर कहा था कि वह उदयपुर हत्याकांड के आरोपियों को ‘बच्चा’ बता रहे हैं, जबकि उक्त बयान उन्होंने केरल के वायनाड में उनके कार्यालय में तोड़-फोड़ करने वाले एसएफआई कार्यकर्ताओं के संदर्भ में दिया था.

इस शो की एंकरिंग रो​हित रंजन ने की थी. इसके प्रसारण के बाद हुए विवाद के बाद उन्होंने अपने चैनल जी न्यूज पर ऑन एयर माफी भी मांगी थी. उन्होंने कथित अपराध के लिए दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा की मांग हेतु सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है.

बीते दो जुलाई रंजन ने अपने शो पर कहा था, ‘कल (एक जुलाई) हमारे शो डीएनए में राहुल गांधी का बयान उदयपुर की घटना से जोड़ कर गलत संदर्भ में चल गया था, ये एक मानवीय भूल थी जिसके लिए हमारी टीम क्षमा प्रार्थी है, हम इसके लिए खेद जताते हैं.’

इस बीच, द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, 5 जुलाई को गाजियाबाद से रोहित रंजन को हिरासत में लेने में सफल न हो पाने के बाद छत्तीसगढ़ पुलिस ने रंजन को ‘फरार’ घोषित कर दिया है.

उस दिन रंजन के घर पर उनकी हिरासत को लेकर छत्तीसगढ़ पुलिस का उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ विवाद हो गया था. नौबत धक्का-मुक्की और हाथापाई तक आ गई थी. इस हाई वोल्टेज ड्रामा के बीच यूपी पुलिस ने अंतत: रंजन को छत्तीसगढ़ पुलिस के हाथों गिरफ्तार होने से बचा लिया था.

भिलाई के कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव की शिकायत के आधार पर छत्तीसगढ़ पुलिस गिरफ्तारी के लिए कोर्ट वारंट लेकर 5 जुलाई को तड़के रोहित रंजन के घर पहुंची थी. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि चैनल ने ‘आतंकवाद फैलाने और देश की एकता को तोड़ने’ के लिए राहुल के बयान की ‘वीडियो क्लिप को ​​एडिट किया और झूठी’ रिपोर्ट चलाई.

कांग्रेस शासित राज्य छत्तीसगढ़ की पुलिस जी न्यूज के कार्यालय भी गई थी, जहां रंजन काम करते हैं. साथ ही, गाजियाबाद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के समक्ष इंदिरापुरम पुलिस थाने के पुलिसकर्मियों के खिलाफ यह शिकायत भी दर्ज कराई कि उन्होंने उन्हें उनकी ड्यूटी निभाने से रोका.

रिपोर्ट के अनुसार, जिस एफआईआर को लेकर गाजियाबाद पुलिस ने रंजन को हिरासत में लिया था, वह मूल रूप से चैनल के दो पूर्व प्रोड्यूसर के खिलाफ दर्ज की गई थी और उसमें रंजन का नाम नहीं था.

जी मीडिया कॉरपोरेशन के प्रतिनिधि बीआर वेंकटरमन द्वारा दो पूर्व प्रोड्यूसरों के खिलाफ बीते 3 जुलाई को दायर एक शिकायत के आधार पर यह एफआईआर दर्ज की गई थी.

नोएडा पुलिस ने रंजन का नाम धारा 505(2) (विभिन्न समुदायों के बीच शत्रुता, घृणा या वैमनस्य की भावनाएं पैदा करने के आशय से असत्य कथन) के तहत उसी दिन यानी 5 जुलाई (मंगलवार) की सुबह 8:33 बजे जोड़ा, जिस दिन उन्हें गिरफ्तार किया गया था. उसी दिन रंजन को जमानत मिल गई थी.

बहरहाल, रोहित रंजन की गिरफ्तारी को लेकर उत्तर प्रदेश की पुलिस के साथ टकराव के दूसरे दिन छत्तीसगढ़ की रायपुर पुलिस छह जुलाई को एक बार फिर रंजन के घर पहुंची थी, लेकिन वह वहां नहीं मिले. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक पुलिस ने रंजन का फरारी पंचनामा तैयार किया है.

रायपुर जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रशांत अग्रवाल ने बताया, ‘रायपुर का पुलिस दल आज (बुधवार) सुबह करीब नौ बजे रोहित रंजन के गाजियाबाद स्थित निवास पर पहुंचा. घर में ताला लगाकर फरार पाए जाने से आरोपी का फरारी पंचनामा तैयार किया गया है. अन्य संभावित स्थानों पर आरोपी की तलाश की जा रही है.’

अग्रवाल ने कहा, ‘नोएडा पुलिस ने रोहित को जमानत पर रिहा किया है. उन्हें रायपुर पुलिस को सूचित करना चाहिए था, क्योंकि पुलिस दल रोहित के संबंध में जानकारी लेने 5 जुलाई को सेक्टर-20 पुलिस थाने गया था. उन्होंने हमें उसके बारे में कुछ नहीं बताया और उसी दिन देर शाम एक प्रेस नोट जारी कर कहा कि वह जमानत पर रिहा हैं.’

बाद में उत्तर प्रदेश की नोएडा पुलिस ने उन पर आईपीसी की धारा 505 (2) (सार्वजनिक शरारत और दुश्मनी बढ़ाने वाला बयान) के तहत मामला दर्ज किया. उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और मंगलवार को बाद में उन्हें जमानत दे दी गई.

भाजपा शासित उत्तर प्रदेश की नोएडा पुलिस द्वारा जारी बयान में कहा गया, ‘आज दिनांक पांच जुलाई को थाना सेक्टर-20 में पंजीकृत मामले की विवेचना के क्रम में जी न्यूज के एंकर रोहित रंजन को पूछताछ के लिए उनके आवास न्यू स्कोटिस सोसाइटी, अहिंसा खंड, इंदिरापुरम से नोएडा लाया गया. पूछताछ के बाद साक्ष्यों के आधार पर उनकी गिरफ्तारी की गई. उनके ऊपर लगी धाराओं के जमानतीय अपराध होने के चलते उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया है. विवेचनात्मक कार्रवाई प्रचलित है.’

एसपी अग्रवाल ने बताया कि कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव की शिकायत पर रायपुर जिले के सिविल लाइंस थाने में रविवार को रंजन और अन्य के खिलाफ विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने और लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का मामला दर्ज किया गया था.

उन्होंने बताया कि यादव ने शिकायत में कहा है कि जी न्यूज चैनल के द्वारा कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के वायनाड में सांसद कार्यालय पर हमले और तोड़फोड़ पर दिए गए वक्तव्य से जुड़े वीडियो को आपराधिक आशय और मनगढ़ंत तरीके से एडिट कर उदयपुर की घटना से जोड़कर राष्ट्रीय एकता और अखंडता को खंडित कर देश में आतंकवाद फैलाने के उद्देश्य से प्रसारित किया गया है.

शिकायत के मुताबिक, इससे कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता और आम नागरिकों में भारी आक्रोश और तनाव व्याप्त है. वहीं, इससे हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच घृणा और वैमनस्यता की भावना पैदा होकर सांप्रदायिक तनाव और लोक शांति को गंभीर खतरा पैदा हो गया है.

पुलिस अधिकारी ने बताया कि विधायक की शिकायत के बाद पुलिस ने जी ग्रुप के चेयरमैन और निदेशक, जी न्यूज चैनल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, प्रसारित कार्यक्रम के निर्माता तथा कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाले एंकर रोहित रंजन और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है.

उन्होंने बताया कि एफआईआर दर्ज होने के बाद रायपुर पुलिस का एक दल विधानसभा क्षेत्र के शहर पुलिस अधीक्षक उद्यन बेहार के नेतृत्व में रंजन के घर पहुंचा था, लेकिन उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा सका.

राहुल गांधी का वीडियो ‘गलत संदर्भ’ में दिखाने के मामले में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में तीन सांसदों और एक विधायक समेत पांच भाजपा नेताओं के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई है.

कांग्रेस ने बीते चार जुलाई को एक बयान में कहा था कि राहुल गांधी का एक वीडियो उदयपुर की घटना से जोड़कर प्रसारित किए जाने के संदर्भ में पूर्व सूचना एवं प्रसारण मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़, भाजपा सांसद सुब्रत पाठक एवं भोला सिंह और भाजपा विधायक कमलेश सैनी और कुछ अन्य के खिलाफ छह राज्यों में शिकायत दर्ज कराई गई है.

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने दो जुलाई को भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा को पत्र लिखकर कहा था कि वह राहुल गांधी के बारे में ‘झूठ’ फैलाने के लिए अपने नेताओं की तरफ से माफी मांगें, अन्यथा कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

खेड़ा ने सोमवार को संवाददाताओं से कहा, ‘हमारे महासचिव जयराम रमेश ने नड्डा को 24 घंटे का वक्त दिया था. कल रात तक कोई जवाब नहीं आया. हमने छह राज्यों- राजस्थान, झारखंड, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, दिल्ली और छत्तीसगढ़ में राठौर और कुछ अन्य भाजपा नेताओं के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई हैं. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में राठौर और चार अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई है.’

ज्ञात हो कि रोहित रंजन ने जी न्यूज पर अपने शो ‘डीएनए’ में राहुल गांधी के एक बयान को उदयपुर के हत्याकांड के बारे में उनके द्वारा दिया गया बयान बताकर चलाया था, जबकि उक्त बयान गांधी ने केरल के अपने वायनाड कार्यालय पर हुए हमले के संदर्भ में दिया था और हमलावर स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया के कार्यकर्ताओं के लिए कहा था कि वे बच्चे हैं, उन्हें माफ कर देना चाहिए.

चैनल ने इसको लेकर बाद में माफी मांग ली थी और बीते दो जुलाई रंजन ने अपने शो पर कहा था, ‘कल (एक जुलाई) हमारे शो डीएनए में राहुल गांधी का बयान उदयपुर की घटना से जोड़ कर गलत संदर्भ में चल गया था, ये एक मानवीय भूल थी जिसके लिए हमारी टीम क्षमा प्रार्थी है, हम इसके लिए खेद जताते हैं.’

रंजन के खिलाफ छत्तीसगढ़ के रायपुर में भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए (दो अलग-अलग वर्गों में वैमनस्य को बढ़ावा देना), 295ए (किसी भी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के इरादे से जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कार्य करना), 467 (जालसाजी), 469 (प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए जालसाजी) और 504 (जानबूझकर अपमान करना) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है.

छत्तीसगढ़ पुलिस ने जी न्यूज के अधिकारियों को जांच के लिए रायपुर तलब किया

वहीं, अब छत्तीसगढ़ पुलिस ने निजी समाचार चैनल जी न्यूज के एंकर रोहित रंजन और उनके कुछ सहयोगियों को राहुल गांधी का छेड़छाड़ किया गया, वीडियो प्रसारित करने के आरोपों की जांच के लिए तलब किया है. अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी.

छत्तीसगढ़ पुलिस की एक टीम बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में दूसरे दिन भी रुकी रही और उसने टेलीविजन समाचार प्रस्तोता रोहित रंजन के गिरफ्तारी वारंट के साथ अपनी तलाश जारी रखी.

छत्तीसगढ़ के एक पुलिस अधिकारी ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया, ‘जी न्यूज के फरार न्यूज एंकर रोहित रंजन के घर के बाहर एक नोटिस चिपकाया गया है, जबकि कार्यालय में उनके सहयोगियों को समन जारी किया गया है. उन्हें हमारी जांच के संबंध में अपना बयान दर्ज कराने के लिए 12 जुलाई को रायपुर आने के लिए कहा गया है.’

अधिकारी ने कहा कि छत्तीसगढ़ पुलिस की टीम ने छह जुलाई की सुबह गाजियाबाद के स्थानीय इंदिरापुरम पुलिस थाने को भी सूचित किया और बाद में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) कार्यालय में अपनी जांच से संबंधित शिकायत दी.

नोएडा में छत्तीसगढ़ के पुलिसकर्मी एक बार फिर सेक्टर 20 पुलिस थाने में एफआईआर की कॉपी और रंजन के ठिकाने जैसी जानकारी लेने गए, लेकिन दावा किया कि उन्हें कोई मदद नहीं मिली.

इस बीच, नोएडा पुलिस भी बुधवार दोपहर छत्तीसगढ़ पुलिस के वहां पहुंचने के तुरंत बाद जी न्यूज कार्यालय गई.

अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (नोएडा) रणविजय सिंह ने जी न्यूज के कार्यालय के बाहर संवाददाताओं से कहा, ‘हम यहां कानून व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए आए थे क्योंकि स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा विरोध प्रदर्शन किए जाने की सूचना थी.’

हालांकि, वहां कोई विरोध प्रदर्शन नहीं हुआ.

छत्तीसगढ़ पुलिस के असहयोग के आरोपों पर सिंह ने सभी आरोपों का जोरदार खंडन किया. उन्होंने कहा, ‘वे गाजियाबाद से किसी को गिरफ्तार करने आए थे, उन्हें स्थानीय पुलिस के साथ समन्वय करना चाहिए था. नोएडा पुलिस उन्हें कोई जानकारी देने के लिए बाध्य नहीं है.’

सिंह ने कहा, ‘अगर वे हमें पत्र लिखते हैं या प्रक्रिया के अनुसार किसी भी मामले के लिए हमसे संपर्क करते हैं, तो हम उनसे बात करेंगे.’

हालांकि, छत्तीसगढ़ पुलिस की टीम ने दावा किया कि वे सहयोग के लिए नोएडा में एक जगह से दूसरी जगह का चक्कर लगा रहे हैं लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ.

कांग्रेस ने चैनल के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की

कांग्रेस ने अपने पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के एक बयान को कथित तौर पर गलत तरीके से उदयपुर में दर्जी कन्हैया लाल की हत्या की घटना से जोड़कर पेश किए जाने को लेकर बुधवार को ‘न्यूज ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल स्टैंडर्ड अथॉरिटी’ से आग्रह किया कि संबंधित चैनल एवं एंकर के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए.

पार्टी के मीडिया एवं प्रचार प्रमुख पवन खेड़ा ने इस संस्था के अध्यक्ष को लिखे पत्र में कहा है कि सिर्फ ‘जी न्यूज’ और उसके एंकर ने राहुल गांधी के बयान से जुड़े क्लिप को विकृत और दुर्भावनापूर्ण तरीके से पेश किया, जबकि किसी अन्य समाचार एजेंसी और चैनल ने ऐसा नहीं किया.

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि चैनल ने अपनी गलती स्वीकार करके यह माना है कि उसने केबल टेलीविजन नेटवर्क अधिनियम-1995 के प्रावधानों और प्रसारण मानक संहिता का उल्लंघन किया है.

उन्होंने कहा, ‘मैं कांग्रेस पार्टी की तरफ से आग्रह करता हूं कि समाचार चैनल और एंकर के खिलाफ त्वरित और उचित कार्रवाई की जाए.’

एंकर रोहित रंजन ने न्यायालय से तत्काल सुनवाई का आग्रह किया

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के बयान को गलत संदर्भ में दिखाते हुए एक खबर प्रसारित करने के आरोप में कुछ राज्यों में एफआईआर का सामना कर रहे  एंकर रोहित रंजन ने बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट से उनकी याचिका पर तत्काल सुनवाई का फिर से अनुरोध किया.

रंजन ने याचिका में कथित अपराध के लिए दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण की मांग की है.

जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस जेके माहेश्वरी की अवकाशकालीन पीठ ने कहा कि इसे ‘भारत के प्रधान न्यायाधीश द्वारा सूचीबद्ध किए जाने का इंतजार किया जा रहा है.’ पीठ ने कल (बुधवार) को पत्रकार की याचिका को सुनवाई के लिए बृहस्पतिवार को सूचीबद्ध किए जाने का आदेश दिया था.

पीठ ने कहा, ‘प्रधान न्यायाधीश द्वारा इसे सूचीबद्ध किए जाने का इंतजार है. हो सकता है कि यह मामला सुनवाई के लिए हमें न दिया जाए.’

टीवी एंकर की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि याचिका को आज सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए जाने का निर्देश दिया गया था, लेकिन इसे नियत कामकाज की सूची में नहीं रखा गया है. उन्होंने शुक्रवार को इसे किसी पीठ को सौंपे जाने का अनुरोध किया.

पीठ ने कहा, ‘हम देखते हैं. मामले के दस्तावेज सीजेआई के पास है. मामले को भारत के प्रधान न्यायाधीश की मंजूरी के बाद कल के लिए सूचीबद्ध किया जाए.’

एंकर की याचिका पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट बृहस्पतिवार को सुनवाई करने के लिए राजी हो गया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)