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ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक ज़ुबैर को लखीमपुर कोर्ट ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा

फैक्ट चेक वेबसाइट ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर को उत्तर प्रदेश के सीतापुर में दर्ज एक मामले में सुप्रीम कोर्ट से पांच दिन की अंतरिम ज़मानत मिलने के तुरंत बाद लखीमपुर खीरी पुलिस ने एक अन्य मामले में उसी दिन एक वॉरंट तामील कराया था. बीते साल के एक ट्वीट में ज़ुबैर ने सुदर्शन टीवी के ट्विटर हैंडल से साझा की गई मदीना मस्जिद की छेड़छाड़ की गई तस्वीर पर सवाल उठाया था. इसे लेकर लखीमपुर के सुदर्शन टीवी के एक रिपोर्टर ने उनके ख़िलाफ़ केस दर्ज करवाया है.

मोहम्मद ज़ुबैर. (फोटो साभार: ट्विटर/@zoo_bear)

लखीमपुर खीरी: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले की एक अदालत ने फैक्ट चेक वेबसाइट ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर को दुश्मनी को बढ़ावा देने के 2021 में दर्ज एक मामले में 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है.

सहायक अभियोजन अधिकारी अवधेश यादव ने सोमवार को बताया कि मोहम्मद जुबैर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) की अदालत में पेश किया गया और उन्हें 11 जुलाई से 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.

अभियोजन पक्ष ने 14 दिनों की पुलिस रिमांड की मांग की थी और जुबैर के अधिवक्ता ने इसके खिलाफ दलीलें पेश की.

यादव ने कहा कि मोहम्मद जुबैर के पुलिस रिमांड पर सुनवाई के लिए अदालत ने 13 जुलाई की तारीख मुकर्रर की है.

ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर को सीतापुर में दर्ज एक मामले में सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने के तुरंत बाद लखीमपुर पुलिस ने एक अन्य मामले में उसी दिन (8 जुलाई) को वॉरंट तामील कराया था.

अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी) अरुण कुमार सिंह ने बताया था कि लखीमपुर खीरी जिले में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) मोहम्मदी की अदालत ने मोहम्मद जुबैर के खिलाफ वॉरंट बी जारी किया था, जिसे शुक्रवार को खीरी पुलिस ने तामील करा दिया था.

मोहम्मदी थाना प्रभारी अंबर सिंह ने बताया, ‘मोहम्मद जुबैर के खिलाफ एक निजी समाचार चैनल के रिपोर्टर आशीष कटियार ने 25 नवंबर, 2021 को खीरी कोर्ट के आदेश से मामला दर्ज कराया था.’

उन्होंने कहा, ‘अपनी शिकायत में कटियार ने जुबैर पर अपने चैनल के बारे में ट्वीट कर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया था.’

रिपोर्ट के अनुसार, लखीमपुर पुलिस ने 18 सितंबर 2021 को एक अदालत के निर्देश पर मोहम्मद जुबैर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी. 16 मई, 2021 को किए गए एक ट्वीट के लिए उन पर धारा 153ए (दो समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) के तहत आरोप लगाया गया था.

इस ट्वीट में जुबैर ने बताया था कि कट्टर दक्षिणपंथी चैनल सुदर्शन टीवी ने 2021 में गाजा पट्टी पर इजरायल की बमबारी की रिपोर्ट करते हुए प्रसिद्ध मदीना मस्जिद की छेड़छाड़ की गई तस्वीर का इस्तेमाल किया था.

हैरानी की बात यह है कि जिस शिकायत के आधार पर अदालत ने यूपी पुलिस को जुबैर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया, वह लखीमपुर के सुदर्शन टीवी के एक रिपोर्टर ने दर्ज करवाई है, जिसने अपनी शिकायत में ट्विटर को भी सह-आरोपी बताया है.

16 मई, 2021 के अपने ट्वीट में जुबैर ने सुदर्शन टीवी के ट्विटर हैंडल से ली गई मदीना मस्जिद की छेड़छाड़ की गई तस्वीरें पोस्ट करते हुए सवाल किया था, ‘क्या यह रिपोर्टिंग है या हिंसा भड़काने की कोशिश?’

हिंदू दक्षिणपंथियों के सोशल मीडिया पोस्ट में मदीना की अल-मस्जिद अन नबावी मस्जिद का लगातार दुरुपयोग एक नियमित और आम बात हो चुकी है.

गाजा में इजरायली मिसाइल हमलों के दौरान मस्जिद पर बमबारी की फोटोशॉप की गई तस्वीरों को फैक्ट-चेक करते हुए जुबैर ने उत्तर प्रदेश पुलिस, नोएडा पुलिस और यूपी के डीजीपी से भी आग्रह किया कि वह हिंसा भड़काने के इस जान-बूझकर किए गए प्रयास के खिलाफ कार्रवाई करें.

हालांकि पुलिस ने तक कोई कदम नहीं उठाया. अब घटना के लगभग एक साल बाद पुलिस ने उस ज़ुबैर के खिलाफ सितंबर 2021 में दर्ज की गई एफआईआर को जुबैर के खिलाफ वॉरंट निकाला है. वो भी ऐसे समय में जब उन्हें तीन हिंदुत्ववादी नेताओं- यति नरसिंहानंद, महंत बजरंग मुनि और आनंद स्वरूप, जो हेट स्पीच के मामले में आरोपी हैं, को ‘घृणा फ़ैलाने वाला’ कहने के आरोप में सीतापुर पुलिस द्वारा दर्ज मामले में सुप्रीम कोर्ट से बीते 8 जुलाई को ही पांच दिन की अंतरिम जमानत मिली है.

मोहम्मद जुबैर को सबसे पहले दिल्ली पुलिस ने बीते 27 जून को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 295 (किसी भी वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करके उनकी धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए किया गया जान-बूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य) और 153 (धर्म, जाति, जन्म स्थान, भाषा आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच विद्वेष को बढ़ाना) के तहत मामला दर्ज कर गिरफ़्तार किया गया था.

बीते दो जुलाई को दिल्ली पुलिस ने जुबैर के खिलाफ एफआईआर में आपराधिक साजिश, सबूत नष्ट करने और विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम की धारा 35 के तहत नए आरोप जोड़े हैं. ये आरोप जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की दखल का द्वार खोलते हैं.

जुबैर की गिरफ्तारी चार साल पुराने 2018 के उस ट्वीट को लेकर हुई थी जिसमें 1983 में बनी फिल्म ‘किसी से न कहना’ का एक स्क्रीनशॉट शेयर किया गया था.

ज़ुबैर के खिलाफ दर्ज एफआईआर में उल्लेख था, ‘हनुमान भक्त (@balajikijaiin) नामक ट्विटर हैंडल से मोहम्मद जुबैर (@zoo_bear) के ट्विटर हैंडल द्वारा किए गए एक ट्वीट को साझा किया गया था, जिसमें जुबैर ने एक फोटो ट्वीट की थी, जिसमें एक जिस पर साइनबोर्ड पर होटल का नाम ‘हनीमून होटल’ से बदलकर ‘हनुमान होटल’ दिखाया गया था. तस्वीर के साथ जुबैर ने ‘2014 से पहले हनीमून होटल…  2014 के बाद हनुमान होटल…’ लिखा था.’

इस संबंध में दिल्ली पुलिस की एफआईआर के अनुसार, ट्विटर यूजर (@balajikijaiin) ने साल 2018 में जुबैर द्वारा शेयर किए गए एक फिल्म के स्क्रीनशॉट वाले ट्वीट को लेकर लिखा था कि ‘हमारे भगवान हनुमान जी को हनीमून से जोड़ा जा रहा है जो प्रत्यक्ष रूप से हिंदुओं का अपमान है क्योंकि वह (भगवान हनुमान) ब्रह्मचारी हैं. कृपया इस व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करें.’

बाद में, यह ट्विटर हैंडल डिलीट कर दिया गया. अब यह हैंडल दोबारा सक्रिय हुआ है, लेकिन जुबैर से संबंधित ट्वीट डिलीट कर दिया गया है.

दो जुलाई इसी मामले में मोहम्मद जुबैर को अदालत ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था. इसके बाद सीतापुर पुलिस ने उनके यहां दर्ज एक मामले के संबंध में उनकी हिरासत मांगी थी, जिसके बाद उन्हें सीतापुर ले जाया गया. सुप्रीम कोर्ट से उन्हें इसी मामले में अंतरिम जमानत मिली है. हालांकि दिल्ली पुलिस और अब लखीमपुर पुलिस द्वारा दर्ज मामले के चलते वे अभी हिरासत में ही हैं.

इस बीच द वायर  के एक इन्वेस्टिगेशन में सामने आया है कि दिल्ली पुलिस वाले मामले में जुबैर के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाने वाला ट्विटर एकाउंट टेक फॉग ऐप और गुजरात के एक भाजयुमो नेता से संबद्ध है.

जुबैर की गिरफ्तारी गुजरात में हिंदू युवा वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष और भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के सह-संयोजक विकास अहीर से जुड़े गुमनाम और अप्रमाणिक खातों के एक नेटवर्क द्वारा सालों से चलाए जा रहे एक अभियान का नतीजा है.