सीतापुर मामले में मोहम्मद ज़ुबैर की अंतरिम ज़मानत अवधि अगले आदेश तक बढ़ाई गई

ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर ने कथित तौर पर कट्टर हिंदुत्ववादी नेताओं यति नरसिंहानंद, महंत बजरंग मुनि और आनंद स्वरूप को ‘घृणा फैलाने वाला’ कहा था. इस संबंध में उत्तर प्रदेश के सीतापुर ज़िले के ख़ैराबाद थाने में बीते एक ​जून को उनके ख़िलाफ़ केस दर्ज किया गया था. 

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हिरासत में मोहम्मद जुबैर. (फोटो: पीटीआई)

ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर ने कथित तौर पर कट्टर हिंदुत्ववादी नेताओं यति नरसिंहानंद, महंत बजरंग मुनि और आनंद स्वरूप को ‘घृणा फैलाने वाला’ कहा था. इस संबंध में उत्तर प्रदेश के सीतापुर ज़िले के ख़ैराबाद थाने में बीते एक ​जून को उनके ख़िलाफ़ केस दर्ज किया गया था.

हिरासत में मोहम्मद जुबैर. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कथित तौर पर ‘धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने’ के आरोप में सीतापुर में दर्ज प्राथमिकी के सिलसिले में आरोपी ‘ऑल्ट न्यूज’ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर की अंतरिम जमानत अवधि मंगलवार को अगले आदेश तक बढ़ा दी.

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एएस बोपन्ना की एक पीठ से कहा कि वे सीतापुर में दर्ज प्राथमिकी खारिज करने को लेकर मोहम्मद जुबैर की ओर से दायर याचिका के खिलाफ एक हलफनामा दाखिल करना चाहते हैं.

इसके बाद, पीठ ने पत्रकार जुबैर की इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा एफआईआर खारिज करने को चुनौती देने वाली याचिका को अंतिम सुनवाई के वास्ते करीब दो महीने बाद सात सितंबर के लिए सूचीबद्ध किया और उत्तर प्रदेश सरकार से चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा.

मोहम्मद ज़ुबैर ने एक ट्वीट में कट्टर हिंदुत्ववादी नेताओं यति नरसिंहानंद, महंत बजरंग मुनि और आनंद स्वरूप को ‘घृणा फैलाने वाला’ कहा था. इस संबंध में उत्तर प्रदेश के सीतापुर ज़िले के ख़ैराबाद थाने में बीते एक ​जून को उनके ख़िलाफ़ केस दर्ज किया गया था.

शीर्ष अदालत की अवकाशकालीन पीठ ने आठ जुलाई को इस मामले में जुबैर को पांच दिन की अंतरिम जमानत प्रदान की थी.

देश के अग्रणी फैक्ट-चेकर्स में से एक जुबैर, जो फर्जी खबरों को खारिज करने वाली जानकारियां ट्वीट करने के लिए जाने जाते हैं, पर दो सप्ताह के भीतर दिल्ली और उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा कई मामले दर्ज किए गए हैं.

वर्तमान में जुबैर चार मामलों का सामना कर रहे हैं- एक फिल्म के दृश्य के स्क्रीनशॉट को 2018 में ट्वीट करने के लिए ट्विटर पर एक अनाम खाते द्वारा दर्ज शिकायत पर दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर, एक कथित एफसीआरए उल्लंघन का मामला, मई 2022 के ट्वीट और 2021 में सुदर्शन न्यूज़ की झूठी खबर के खिलाफ ट्वीट के लिए यूपी पुलिस की दो एफआईआर।

मोहम्मद जुबैर को बीते 27 जून को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 295 (किसी भी वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करके उनकी धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए किया गया जान-बूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य) और 153 (धर्म, जाति, जन्म स्थान, भाषा आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच विद्वेष को बढ़ाना) के तहत दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज कर गिरफ़्तार किया गया था.

बीते दो जुलाई को दिल्ली पुलिस ने जुबैर के खिलाफ एफआईआर में आपराधिक साजिश, सबूत नष्ट करने और विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम की धारा 35 के तहत नए आरोप जोड़े हैं. ये आरोप जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की दखल का द्वार खोलते हैं.

जुबैर की गिरफ्तारी 2018 के उस ट्वीट को लेकर हुई थी जिसमें 1983 में बनी फिल्म ‘किसी से न कहना’ का एक स्क्रीनशॉट शेयर किया गया था.

ज़ुबैर के खिलाफ दर्ज एफआईआर में उल्लेख था, ‘हनुमान भक्त (@balajikijaiin) नामक ट्विटर हैंडल से मोहम्मद जुबैर (@zoo_bear) के ट्विटर हैंडल द्वारा किए गए एक ट्वीट को साझा किया गया था, जिसमें जुबैर ने एक फोटो ट्वीट की थी, जिसमें एक जिस पर साइनबोर्ड पर होटल का नाम ‘हनीमून होटल’ से बदलकर ‘हनुमान होटल’ दिखाया गया था. तस्वीर के साथ जुबैर ने ‘2014 से पहले हनीमून होटल…  2014 के बाद हनुमान होटल…’ लिखा था.’

इस संबंध में दिल्ली पुलिस की एफआईआर के अनुसार, ट्विटर यूजर (@balajikijaiin) ने साल 2018 में जुबैर द्वारा शेयर किए गए एक फिल्म के स्क्रीनशॉट वाले ट्वीट को लेकर लिखा था कि ‘हमारे भगवान हनुमान जी को हनीमून से जोड़ा जा रहा है जो प्रत्यक्ष रूप से हिंदुओं का अपमान है क्योंकि वह (भगवान हनुमान) ब्रह्मचारी हैं. कृपया इस व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करें.’

बाद में, यह ट्विटर हैंडल डिलीट कर दिया गया. अब यह हैंडल दोबारा सक्रिय हुआ है, लेकिन जुबैर से संबंधित ट्वीट डिलीट कर दिया गया है.

बीते दो जुलाई को हिंदू देवता के बारे में कथित ‘आपत्तिजनक ट्वीट’ करने के मामले में मोहम्मद जुबैर को अदालत ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था.

जुबैर की जमानत याचिका पर 14 जुलाई को सुनवाई करेगी दिल्ली की अदालत

मंगलवार को ही दिल्ली की एक अदालत 2018 के ट्वीट संबंधी मामले में मोहम्मद जुबैर की जमानत याचिका पर 14 जुलाई को सुनवाई करने को सहमत हुई.

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश देवेंद्र कुमार जांगला ने मामले की सुनवाई को गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दिया. अभियोजन पक्ष ने मामले में विस्तृत जिरह के लिए समय मांगा था.

वीडियो लिंक के जरिये सुनवाई में शामिल हुए विशेष लोक अभियोजक अतुल श्रीवास्तव ने अदालत से मामले को स्थगित करने का अनुरोध करते हुए कहा कि जुबैर के खिलाफ दायर अन्य मुकदमों पर मंगलवार को उच्चतम न्यायालय में सुनवाई होनी है.

इसके बाद, जुबैर की वकील वृंदा ग्रोवर ने अदालत से मामले पर बुधवार को सुनवाई करने का अनुरोध किया. इस पर विशेष लोक अभियोजक ने कहा कि वह भोपाल में हैं और बुधवार को सुनवाई के लिए प्रस्तुत नहीं हो पाएंगे.

ग्रोवर ने दलील दी कि श्रीवास्तव अगर उपलब्ध नहीं हैं, तो मामले को किसी और अभियोजक को सौंपा जाए. उन्होंने कहा, ‘वह वीडियो लिंक के जरिये सुनवाई में शामिल हो सकते हैं. जमानत याचिका दाखिल की गई है. यह किसी की स्वतंत्रता का सवाल है. मामले पर कल सुनवाई हो. वह वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये पेश हो सकते हैं.’

श्रीवास्तव ने फिर कहा कि मामले को 14 जुलाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए, जिसकी न्यायाधीश ने अनुमति दे दी.

गौरतलब है कि मजिस्ट्रेटी अदालत ने दो जुलाई को जुबैर की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी और 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था. अदालत ने जुबैर के खिलाफ आरोपों की प्रकृति और गंभीरता का हवाला दिया था और कहा था कि मामला जांच के शुरुआती स्तर पर है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

(नोट: (5 नवंबर 2022) इस ख़बर को टेक फॉग ऐप संबंधी संदर्भ हटाने के लिए संपादित किया गया है. टेक फॉग संबंधी रिपोर्ट्स को वायर द्वारा की जा रही आंतरिक समीक्षा के चलते सार्वजनिक पटल से हटाया गया है.)