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लक्षद्वीप: मिड-डे मील में छात्रों को पहले की तरह मांस उत्पाद परोसने का आदेश

स्कूली बच्चों के लिए मिड-डे मील के मेन्यू से चिकन सहित मांस उत्पादों को हटाने और डेयरी फार्म बंद करने संबंधी लक्षद्वीप प्रशासन के फैसले को बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त कर दिया था, जिसके परिणामस्वरूप शिक्षा निदेशालय ने एक आदेश जारी करके स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को शीर्ष अदालत के आदेश का पालन करने के लिए कहा है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

कवरत्ती: केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप के प्रशासन ने स्कूल अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश पर अमल करने का निर्देश दिया है, जिसके तहत स्कूली छात्र मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) में चिकन और अन्य मांस उत्पादों से वंचित नहीं रहेंगे.

शिक्षा निदेशालय ने शुक्रवार (22 जुलाई) को जारी एक आदेश में लक्षद्वीप के स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को शीर्ष अदालत के 2 मई के आदेश का पालन करने के लिए कहा, जिसमें बच्चों को पहले की तरह मांस, चिकन, मछली और अंडे सहित मिड-डे मील परोसने का निर्देश दिया गया था.

निदेशालय ने अपने आदेश में स्कूलों के संदर्भ के लिए शीर्ष अदालत के निर्देश के प्रासंगिक अंश भी संलग्न किए हैं, जिनमें कहा गया है, ‘लक्षद्वीप के स्कूली छात्रों को अगले आदेश तक पहले की तरह मांस, चिकन, मछली व अंडा और अन्य वस्तुओं समेत भोजन परोसा जाए. इस पर अमल करते हुए पुरानी व्यवस्था जारी रहनी चाहिए.’

सुप्रीम कोर्ट ने डेयरी फार्म को बंद करने और स्कूली बच्चों के मिड-डे मील से मांस उत्पादों को हटाने के लक्षद्वीप प्रशासन के फैसले को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए केरल हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखने का निर्देश दिया था.

केरल हाईकोर्ट ने डेयरी फार्म को बंद करने और स्कूली बच्चों के मिड-डे मील से मांस उत्पादों को हटाने के लक्षद्वीप प्रशासन के आदेशों के अमल पर 22 जून 2021 को रोक लगा दी थी.

उल्लेखनीय है कि 22 जून 2021 को हाईकोर्ट ने लक्षद्वीप प्रशासन के दो आदेश, डेयरी को बंद करने और स्कूली बच्चों के मिड-डे मील की व्यंजन सूची से चिकन सहित मांस उत्पादों को हटाने के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी थी.

केरल हाईकोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में निर्देश दिया था कि डेयरी फार्मों का कामकाज अगले आदेश तक जारी रखा जाना चाहिए और लक्षद्वीप के स्कूली बच्चों को मिड-डे मील, जिसमें मांस, चिकन, मछली और अंडा और अन्य पदार्थ, तैयार और परोसा जाता है, पहले की तरह अगले आदेश तक जारी रखा जाए.

हाईकोर्ट ने तब कहा था, ‘हम यह समझने में असमर्थ हैं कि बच्चों को दिए जाने वाले खाद्य पदार्थों के मेनू में बदलाव कैसे हो सकता है, जिसे स्वास्थ्य कारक के महत्वपूर्ण पहलू को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है. प्रथमदृष्टया हमें मांस और चिकन हटाकर खाद्य पदार्थों में बदलाव का कोई कारण नहीं मिलता है. इसलिए, हम लक्षद्वीप में स्कूल के बच्चों को मांस और चिकन को शामिल करके, पहले की तरह भोजन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिवादियों को निर्देश देते हुए एक अंतरिम आदेश पारित करने के लिए इच्छुक हैं.’

हालांकि, 17 सितंबर 2021 को हाईकोर्ट ने प्रशासन द्वारा लिए गए निर्णयों को मंजूरी देते हुए रिट याचिका को खारिज कर दिया.

याचिका लक्षद्वीप के वकील अजमल अहमद ने लगाई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि प्रफुल्ल्ल खोड़ा पटेल के द्वीप प्रशासक के रूप में कार्यभार संभाले जाने के बाद उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता पशुपालन विभाग द्वारा चलाए जा रहे डेयरी फार्म को बंद करना और प्राचीन काल से चली आ रही द्वीपवासियों की भोजन की आदतों पर ‘हमला’ करना है.

हाईकोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद वे सुप्रीम कोर्ट चले गए,

सुप्रीम कोर्ट ने उनके द्वारा दायर एसएलपी (स्पेशल लीव पिटीशन) पर विचार करते हुए बीते 2 मई को निर्देश दिया कि 23 जून 2021 को हाईकोर्ट द्वारा पारित अंतरिम आदेश जारी रहेगा.

बता दें कि मुस्लिम बहुल आबादी वाला लक्षद्वीप पिछले साल लाए गए कुछ प्रस्तावों को लेकर विवादों में घिरा हुआ था. वहां के प्रशासक प्रफुल्ल्ल खोड़ा पटेल को हटाने की मांग की जा रही थी.

दिसंबर 2020 में लक्षद्वीप का प्रभार मिलने के बाद प्रफुल्ल्ल खोड़ा पटेल लक्षद्वीप पशु संरक्षण विनियमन, लक्षद्वीप असामाजिक गतिविधियों की रोकथाम विनियमन, लक्षद्वीप विकास प्राधिकरण विनियमन और लक्षद्वीप पंचायत कर्मचारी नियमों में संशोधन के मसौदे ले आए थे, जिसका तमाम विपक्षी दल विरोध कर रहे थे.

उन्होंने पटेल पर मुस्लिम बहुल द्वीप से शराब के सेवन से रोक हटाने, पशु संरक्षण का हवाला देते हुए बीफ (गोवंश) उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने और तट रक्षक अधिनियम के उल्लंघन के आधार पर तटीय इलाकों में मछुआरों के झोपड़ों को तोड़ने का आरोप लगाया था.

इन कानूनों में बेहद कम अपराध क्षेत्र वाले इस केंद्र शासित प्रदेश में एंटी-गुंडा एक्ट और दो से अधिक बच्चों वालों को पंचायत चुनाव लड़ने से रोकने का भी प्रावधान भी शामिल था.

(समाचार एजेंसी पीटीआई से इनपुट के साथ)