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धनबाद जज हत्या: अदालत ने दोषियों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई

धनबाद के 49 वर्षीय जज उत्तम आनंद पिछले साल 28 जुलाई की सुबह टहलने निकले थे, जब एक ऑटो रिक्शा उन्हें पीछे से टक्कर मारकर भाग गया था. सीबीआई की एक विशेष अदालत ने ऑटोरिक्शा चालक और उसके सहायक को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाते हुए उन पर 30 हज़ार रुपये जुर्माना भी लगाया है.

जज उत्तम आनंद.

धनबाद: धनबाद की विशेष सीबीआई अदालत ने जिला न्यायाधीश उत्तम आनंद की हत्या के मामले में शनिवार को दो दोषियों को मृत्यु तक कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, बचाव पक्ष के वकील कुमार बिमलेंदु ने शनिवार को कहा कि लखन वर्मा और राहुल वर्मा, जिन्हें पिछले महीने झारखंड के धनबाद की एक सत्र अदालत ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद की हत्या के लिए दोषी ठहराया था, को मौत तक कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है. दोनों दोषियों पर 30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है.

सीबीआई की विशेष अदालत के रजनीकांत पाठक ने बीते 28 जुलाई को दोनों आरोपियों – लखन वर्मा और राहुल वर्मा को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 201 (सबूत गायब करना) और 34 (सामान्य इरादे) के तहत दोषी ठहराया था.

बचाव पक्ष के वकील कुमार बिमलेंदु ने कहा, ‘आईपीसी की धारा 302, 34 तहत दोषियों को मृत्यु तक कठोर कारावास और प्रत्येक को 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है. आईपीसी की धारा 201 के तहत कोर्ट ने 10-10 साल कैद और 10-10 हजार रुपये की सजा सुनाई. हालांकि, अदालत का विस्तृत फैसला मंगलवार को आएगा.’

न्यायाधीश आनंद की हत्या के मामले में सुनवाई इसी साल फरवरी में शुरू हुई थी. अदालत ने सुनवाई के दौरान 58 गवाहों के बयान दर्ज किए थे.

गौरतलब है कि धनबाद के 49 वर्षीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद पिछले साल 28 जुलाई की सुबह टहलने निकले थे, जब रणधीर चौक के पास एक ऑटो रिक्शा उन्हें पीछे से टक्कर मारकर भाग गया. पहले इस घटना को हिट एंड रन केस माना जा रहा था, लेकिन घटना का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पता चला कि ऑटो रिक्शा चालक ने कथित तौर पर जान-बूझकर जज को टक्कर मारी थी.

मामले की जांच के लिए शुरू में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया था, लेकिन बाद में झारखंड सरकार ने मामले को सीबीआई को सौंप दिया था.

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल न्यायाधीश के ‘दुखद निधन’ पर स्वत: संज्ञान लिया था और झारखंड के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से इस मामले में स्थिति रिपोर्ट मांगी थी.

सीबीआई के अतिरिक्त लोक अभियोजक अमित जिंदल ने कहा कि अदालत ने पाया कि दोनों आरोपी नशे में नहीं थे. जिंदल ने कहा कि अदालत ने यह भी फैसला सुनाया कि यह जान-बूझकर की गई हत्या का मामला है.

हालांकि, बचाव पक्ष के वकील कुमार बिमलेंदु ने मीडियाकर्मियों से कहा कि ‘सीबीआई ने हत्या की मनगढ़ंत कहानी रची.’ उन्होंने कहा कि लखन और राहुल फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे.

हत्या के इस मामले की सीबीआई जांच की झारखंड हाईकोर्ट, सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर निगरानी कर रहा है. हाईकोर्ट ने मामले की सीबीआई जांच पर अनेक बार सवाल उठाए थे और कहा था कि सीबीआई मामले की जांच उचित ढंग से नहीं कर रही है.

हाईकोर्ट ने अक्टूबर 2021 में कहा था कि सीबीआई द्वारा दायर की गई चार्जशीट एक उपन्यास की तरह है और एजेंसी दो आरोपियों के विरुद्ध हत्या के आरोप की पुष्टि नहीं कर पाई है.

22 अक्टूबर 2021 को अदालत ने कहा था कि ऐसा लग रहा है कि एजेंसी जांच पूरी करते हुई और ‘घिसे-पिटे ढर्रे’ पर आरोप-पत्र दाखिल करते हुए ‘बाबुओं’ की तरह काम कर रही है. ऐसा लगता है कि यह केवल औपचारिकता पूरी करने के लिए दाखिल किया गया है.

उससे पहले अगस्त 2021 में सीबीआई द्वारा जांच अपने हाथ में लेने के बाद पहली बार इस मामले की सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने जांच का उचित अपडेट नहीं दे पाने के लिए एजेंसी के जांच अधिकारी की खिंचाई करते हुए कहा था कि उन्हें विवरण के साथ मामले की पूरी जानकारी होनी चाहिए.

बीते 21 जनवरी को हाईकोर्ट ने कहा था कि ऐसा प्रतीत होता है कि सीबीआई अब इस मामले से अपना पिंड छुड़ाना चाहती है और वह आरोपियों को बचा रही है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)