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पैगंबर टिप्पणी: सुप्रीम कोर्ट ने टाइम्स नाउ एंकर नविका कुमार को गिरफ़्तारी से संरक्षण दिया

भाजपा की निलंबित प्रवक्ता नूपुर शर्मा ने पैगंबर मोहम्मद के ख़िलाफ़ टिप्पणी ‘टाइम्स नाउ’ के प्राइम टाइम शो में की थी, जिसे नविका कुमार होस्ट कर रही थीं. इसे लेकर नविका के ख़िलाफ़ कई एफआईआर दर्ज हुई थीं. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें भविष्य में दर्ज हो सकने वाली एफआईआर के संबंध में भी दंडात्मक कार्रवाई से राहत दी है.

नविका कुमार. (फोटो साभार: ट्विटर)

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने पैगंबर मोहम्मद पर टिप्पणियों के सिलसिले में पत्रकार नविका कुमार के खिलाफ दर्ज प्राथमिकियों के संबंध में सोमवार को उन्हें गिरफ्तारी से अंतरिम राहत प्रदान कर दी.

कुमार के खिलाफ यह प्राथमिकियां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पूर्व प्रवक्ता नुपुर शर्मा की ओर से टीवी पर प्रसारित एक परिचर्चा कार्यक्रम के दौरान पैगंबर मोहम्मद पर टिप्पणियां करने के सिलसिले में दर्ज की गई थीं. इस परिचर्चा कार्यक्रम की प्रस्तोता (एंकर) कुमार थीं.

जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने कुमार की उनके खिलाफ कार्यवाही को रद्द करने का आग्रह करने वाली याचिका पर केंद्र, पश्चिम बंगाल सरकार एवं अन्य को नोटिस जारी किया.

पीठ ने कहा, ‘एक अंतरिम उपाय के तहत संबंधित प्राथमिकियों/शिकायतों या 26 मई को प्रसारित हुए कार्यक्रम के संबंध में भविष्य में दर्ज की जाने वाली प्राथमिकियों/शिकायतों के संबंध में याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाए.’

कुमार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि ज्ञानवापी मस्जिद पर चर्चा की जा रही थी, तभी अचानक से एक वक्ता ने कुछ कहा और फिर अन्य वक्ता ने जवाब दिया.

रोहतगी ने कहा कि समाचार प्रस्तोता ने कुछ भी नहीं कहा और उनके खिलाफ कई प्राथमिकियां दर्ज करा दी गईं. अधिवक्ता ने कहा कि कुमार ने यह कहकर आग बुझाई कि ‘हमें संविधान का पालन करना है.’

पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश हुईं वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि प्राथमिकी कोलकाता में दर्ज की गई है और दिल्ली में दर्ज प्राथमिकी इससे संबंधित नहीं है.

रोहतगी ने कहा, ‘पश्चिम बंगाल राज्य की इस मामले में क्या विशेष रुचि है?’ पीठ ने फिर मामले में नोटिस जारी किया और दो हफ्ते में जवाब तलब किया.

मालूम हो कि पैगंबर मोहम्मद को लेकर शर्मा की टिप्पणी के बाद खाड़ी देशों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी जिसके बाद भाजपा ने पांच जून को पार्टी ने इसकी राष्ट्रीय प्रवक्ता नूपुर शर्मा को निलंबित और दिल्ली इकाई के प्रवक्ता नवीन जिंदल को निष्कासित कर दिया था.

इसके बाद दोनों भाजपा नेताओं की गिरफ्तारी की मांग पर बीते 10 जून को देश भर के कई शहरों और कस्बों में विरोध प्रदर्शन हुए थे. इस दौरान झारखंड की राजधानी रांची में हिंसक प्रदर्शन के दौरान दो लोगों की मौत हो गई थी.

इस टिप्पणी के लिए नूपुर शर्मा के खिलाफ देश के कई देशो में केस दर्ज किए गए हैं. बीते महीने शीर्ष अदालत ने इन टिप्पणियों के सिलसिले में दर्ज प्राथमिकियों के संबंध में शर्मा को 10 अगस्त तक अंतरिम संरक्षण प्रदान किया था. कोर्ट ने शर्मा को भविष्य में दर्ज हो सकने वाली एफआईआर/शिकायतों में भी दंडात्मक कार्रवाई से राहत दी.

इस विवाद को लेकर टाइम्स नाउ की भी खासी आलोचना हुई थी, जिसके बाद चैनल ने एक बयान जारी कर खुद को विवादास्पद टिप्पणियों से दूर कर लिया था. बयान में चैनल ने कहा था, ‘हम हमारी बहस में शामिल होने वाले प्रतिभागियों से संयम बनाए रखने और साथी पैनलिस्टों के खिलाफ असंसदीय भाषा इस्तेमाल न करने की अपील करते हैं.’

उस समय नविका कुमार को ‘डिबेट शो’ को सही ढंग से संचालित न करने के चलते आलोचना का सामना करना पड़ा था.

यह पहली बार नहीं है जब टाइम्स नाउ इस तरह की आलोचनाओं का सामना कर रहा है और नविका कुमार द्वारा आयोजित शो में वक्ताओं द्वारा की गई टिप्पणियों से खुद को दूर करने की कोशिश की है.

नवंबर 2021 में कंगना रनौत द्वारा की गईं टिप्पणियों ने भी विवाद खड़ा कर दिया था. रनौत ने कहा था 1947 में भारत को जो मिला वो ‘भीख’ थी और ‘सच्ची आजादी’ 2014 में मिली थी, जब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने सत्ता संभाली थी.

रनौत के बयान से भाजपा नेताओं तक ने नाराजगी जताई थी और इसे ‘लाखों स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान’ करार दिया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)