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असम की अदालत ने हिमंता बिस्वा शर्मा मानहानि मामले में मनीष सिसोदिया को समन भेजा

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बीते चार जून को मीडिया में आईं ख़बरों का ज़िक्र  करते हुए आरोप लगाया था कि लॉकडाउन के दौरान असम सरकार ने अन्य कंपनियों से 600 रुपये प्रति किट के हिसाब से पीपीई किट ख़रीदी और राज्य के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा की पत्नी व बेटे के व्यापारिक साझेदारों की कंपनियों को 990 रुपये के हिसाब से तत्काल इन किट की आपूर्ति करने के आदेश दिए थे.

हिमंता बिस्वा शर्मा और मनीष सिसोदिया. (फोटो: पीटीआई)

गुवाहाटी: असम की एक अदालत ने मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा की ओर से दायर मानहानि मामले में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को मंगलवार (23 अगस्त) को समन जारी कर 29 सितंबर को पेश होने के लिए कहा.

कामरूप की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मोनमी शर्मा ने हिमंता बिस्वा शर्मा के खिलाफ कथित रूप से मानहानिकारक बयान देने के लिए सिसोदिया को समन जारी किया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने सिसोदिया के खिलाफ इस संबंध में 5 अगस्त को अदालत के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया था.

मालूम हो कि बीते 4 जून को मनीष सिसोदिया ने मीडिया (‘द वायर’ और ‘द क्रॉस करंट’ की एक संयुक्त रिपोर्ट) में आई एक खबर का जिक्र करते हुए पत्रकारों से कहा था कि एक ओर असम सरकार ने अन्य कंपनियों से 600 रुपये में व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) किट खरीदी थी, तो दूसरी ओर उन्होंने अपनी पत्नी व बेटे के व्यापारिक भागीदारों की कंपनियों को 990 रुपये के हिसाब से तत्काल पीपीई किट की आपूर्ति के ऑर्डर दिए थे.

उन्होंने आरोप लगाया था कि शर्मा की पत्नी की फर्म चिकित्सा उपकरणों का कारोबार भी नहीं करती है.

सिसोदिया ने खबर के हवाले से कहा था, ‘हालांकि शर्मा की पत्नी की फर्म को दिया गया अनुबंध रद्द कर दिया गया था, क्योंकि कंपनी पीपीई किट की आपूर्ति नहीं कर सकती थी, एक अन्य आपूर्ति आदेश उनके बेटे के व्यापारिक साझेदारों से संबंधित कंपनी को 1,680 रुपये प्रति किट की दर से दिया गया था.’

उन्होंने कहा था, ‘यह असम के मुख्यमंत्री और उनके करीबी सहयोगियों द्वारा किया गया एक बड़ा घोटाला है. यह भ्रष्टाचार का मामला है और ईडी (सत्येंद्र) जैन के पीछे लगी है, जो दिल्ली के निवासियों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं.’

उन्होंने आरोप लगाया था, ‘शर्मा के बेटे के व्यापारिक साझेदारों को भी 990 रुपये प्रति किट की दर से पीपीई किट की आपूर्ति करने का आकर्षक ऑर्डर मिला. शर्मा की पत्नी के एक व्यापारिक साझेदार के स्वामित्व वाली कंपनी एजाइल एसोसिएट्स को 2,205 रुपये प्रति किट के हिसाब से 10,000 पीपीई किट देने का ऑर्डर मिला.’

सिसोदिया ने आरोप लगाया था, ‘ऑर्डर की अधूरी आपूर्ति के बावजूद शर्मा परिवार के इन करीबी सहयोगियों को 1,680 रुपये प्रति किट की दर से अधिक पीपीई किट की आपूर्ति करने का ऑर्डर मिला.

हालांकि चार जून को ही असम सरकार ने इन आरोपों का खंडन किया था कि मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा का परिवार महामारी के दौरान पीपीई किट की आपूर्ति में कथित कदाचार में शामिल था.

असम के मुख्यमंत्री की पत्नी रिनिकी भुइयां शर्मा ने 21 जून को दिल्ली के उपमुख्यमंत्री सिसोदिया के खिलाफ 100 करोड़ रुपये की मानहानि का मुकदमा दाखिल किया था.

बीते एक जून को प्रकाशित ‘द वायर’ और गुवाहाटी स्थित ‘द क्रॉस करंट’ की एक संयुक्त रिपोर्ट में बताया गया है कि असम सरकार ने उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना कोविड-19 संबंधित चार आपातकालीन चिकित्सा आपूर्ति के ऑर्डर मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा की पत्नी रिनिकी भुइयां शर्मा और उनके परिवार के व्यापारिक सहयोगी के स्वामित्व वाली तीन फर्मों को दिए थे.

महत्वपूर्ण रूप से जेसीबी इंडस्ट्रीज, जिसमें मुख्यमंत्री की पत्नी मालिक हैं, को राज्य के स्वास्थ्य मंत्रालय से तत्काल आपूर्ति आदेश (Order) उस समय मिला था, जब उनके पति हिमंता बिस्वा शर्मा स्वास्थ्य मंत्री थे.

इस कंपनी का चिकित्सा उपकरण और सुरक्षा गियर की आपूर्ति या उत्पादन का कोई इतिहास नहीं था. गुवाहाटी स्थित यह फर्म सैनिटरी नैपकिन का उत्पादन करने के लिए जानी जाती है, लेकिन उसे 5,000 पीपीई किट की आपूर्ति के लिए एक तत्काल कार्य आदेश दिया गया था.

रिपोर्ट के अनुसार, 24 मार्च, 2020 की रात को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कोविड-19 महामारी के बढ़ते प्रकोप के कारण राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन की घोषणा से कुछ दिन पहले 18 मार्च, 2020 को पीपीई किट डिलिवर करने का यह ऑर्डर जेसीबी इंडस्ट्रीज को दिया गया था.

अधिकांश अन्य राज्यों की तरह भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली असम की राज्य सरकार ने भी प्रधानमंत्री के अचानक लॉकडाउन आदेश के तत्काल बाद में सुरक्षा गियर (जैसे पीपीई किट) और कोविड-19 परीक्षण किट स्टॉक करने के लिए ‘तत्काल आपूर्ति आदेश’ दिया था.

हालांकि, राज्य के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के आरटीआई जवाब से पता चलता है कि तब शर्मा के नेतृत्व वाले स्वास्थ्य विभाग ने लॉकडाउन से पहले न केवल उनकी पत्नी की फर्म को बल्कि दो कंपनियों- जीआरडी फार्मास्युटिकल्स और मेडिटाइम हेल्थकेयर को भी ‘तत्काल आपूर्ति’ आदेश दिया था, जो उनके परिवार के व्यापारिक सहयोगी घनश्याम धानुका के स्वामित्व में हैं.

घनश्याम के पिता अशोक धानुका आरबीएस रियल्टर्स (अब वशिष्ठ रियल्टर्स) के निदेशक हैं, जिसमें हिमंता बिस्वा शर्मा के बेटे नंदिल बिस्वा शर्मा वर्तमान में बहुसंख्यक शेयरधारक हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)