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म्यांमार में बंधक बनाए गए भारतीयों के रिहा कराने के हरसंभव प्रयास जारी: विदेश मंत्रालय

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने बताया कि म्यांमार के म्यावड्डी क्षेत्र में फंसे 80-90 भारतीयों में से अब तक 32 लोगों को बचा लिया गया है. उन्होंने कहा कि भारतीय नागरिकों को नौकरी को लेकर लुभाने वाली कंपनियों से सचेत रहना चाहिए.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची. (फोटो साभार: एएनआई)

नई दिल्ली: विदेश मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि म्यांमार में ‘अवैध रूप से बंधक’ बनाए गए 32 भारतीयों को सुरक्षित निकाल लिया गया है और शेष लोगों को रिहा कराने के हरसंभव प्रयास जारी हैं.

मंत्रालय ने साथ ही भारतीय नागरिकों को नौकरी को लेकर लुभाने वाली ऐसी कंपनियों से सचेत रहने का भी सुझाव दिया.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने संवाददाताओं से कहा, ‘जहां तक दक्षिण पूर्वी म्यांमार के म्यावड्डी क्षेत्र में बंधक बनाए गए भारतीयों का सवाल है, हम इस बात से अवगत हैं कि थाईलैंड में आईटी कंपनियां रोजगार के लिए भारतीय श्रमिकों की भर्ती करती हैं, जिन्हें म्यांमार ले जाया जाता है.’

उन्होंने कहा कि इनमें से कुछ के अवैध रूप से जाने की भी खबरें आती हैं.

उन्होंने कहा कि म्यांमार में फंसे भरतीयों को लेकर मदद का पूरा प्रयास हो रहा है तथा उनसे संपर्क बनाए रखा गया है.

बागची ने कहा, ‘हमारे प्रयासों से कई लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है. अभी तक 32 लोग बाहर आ गए हैं.’

उन्होंने कहा, ‘हम सहायता करने का पूरा प्रयास कर रहे हैं, साथ ही भारतीय नागरिकों को नौकरी को लेकर लुभाने वाली कंपनियों से सचेत रहना चाहिए.’

उन्होंने कहा, ‘म्यांमार और थाईलैंड में हमारे मिशन ने परामर्श जारी किया है और हम उनसे संपर्क बनाए हुए हैं.’

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, बागची ने कहा, कुछ धोखाधड़ी करने वाली आईटी कंपनियां डिजिटल स्कैमिंग और जाली क्रिप्टो गतिविधियों में लिप्त प्रतीत होती हैं. ऐसा लगता है कि वे दुबई, बैंकॉक और भारत में एजेंटों के माध्यम से काम कर रहे हैं और थाईलैंड में आईटी क्षेत्र में रोजगार के अवसरों के बहाने भारतीय श्रमिकों की भर्ती कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि श्रमिकों को थाईलैंड में अत्यधिक आकर्षक डेटा एंट्री नौकरियों के सोशल मीडिया विज्ञापनों का लालच दिया जाता है.

उन्होंने कहा, ‘दुर्भाग्य से इन श्रमिकों को सीमा पार से म्यांमार के म्यावड्डी क्षेत्र में अवैध रूप से ले जाया जाता है और जैसा कि आप जानते हैं कि स्थानीय सुरक्षा स्थितियों के कारण उस क्षेत्र तक पहुंचना मुश्किल है.’

बागची ने कहा कि फिर भी म्यांमार और थाईलैंड में भारतीय मिशनों के प्रयासों के लिए धन्यवाद. इनमें से कुछ पीड़ितों को कैद या जबरन श्रम से बचाने में मदद मिली है और दूसरों की मदद करने के प्रयास किए जा रहे हैं.

उन्होंने कहा कि म्यावड्डी में फंसे 80-90 भारतीयों में से अब तक 32 लोगों को बचा लिया गया है.

उन्होंने कहा, ‘हम भारतीय नागरिकों से इस तरह की नौकरी की पेशकश करने से पहले अत्यधिक सावधानी बरतने का आग्रह करना चाहेंगे.’

उन्होंने कहा, ‘थाईलैंड और म्यांमार में हमारे दूतावासों ने इस संबंध में सलाह जारी की है, कृपया उनका पालन करें. भारत ने म्यांमार और थाईलैंड की सरकारों के साथ भी इस मामले को उठाया है.’

भारत में फंसे कुछ भारतीयों ने हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर वीडियो संदेश पोस्ट कर मदद मांगी थी.

गौरतलब है कि म्यांमार में भारतीय दूतावास ने दो दिन पहले ही बताया था कि सुरक्षा चुनौतियों तथा अन्य कानूनी एवं आवागमन से जुड़ीं समस्याओं के बावजूद म्यांमार में ‘अवैध रूप से बंधक’ बनाए गए भारतीयों में से कई लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है. शेष को रिहा कराने के लिए सभी संभव प्रयास किए जा रहे है.

भारतीय दूतावास का यह बयान ऐसे समय में आया था, जब 300 भारतीयों को म्यांमार में एक गिरोह द्वारा बंधक बनाए जाने की खबरें आई हैं, जिसमें अनेक लोग तमिलनाडु से हैं.

विदेश राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन ने बीते 21 सितंबर को ट्वीट कर बताया था कि उन्होंने राजदूत विनय कुमार से म्यांमार में भारतीयों के बंधक बनाए जाने के बारे में बात की.

उन्होंने बताया था, ‘राजदूत ने घटनाक्रम के बारे में जानकारी दी और बताया कि सभी भारतीयों को जल्द से जल्द रिहा कराने को लेकर सभी प्रयास किए जा रहे हैं. मिशन इस मामले पर करीबी नजर रखे हुए है.’

इस बीच तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने म्यांमार में ‘अवैध रूप से बंधक’ बनाए गए भारतीयों को बचाने एवं वापस लाने के लिए बुधवार (21 सितंबर) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप करने की मांग की थी.

उन्होंने दावा किया था कि इन भारतीयों से जबरन अवैध कार्य कराए जा रहे हैं.

स्टालिन ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखी चिट्ठी में कहा था कि राज्य सरकार को करीब 50 तमिलों सहित करीब 300 भारतीयों के म्यांमार में फंसे होने की सूचना मिली है, जो बहुत मुश्किलों का सामना कर रहे हैं.

मुख्यमंत्री ने कहा था, ‘जानकारी मिली है कि वे शुरुआत में निजी भर्ती एजेंसी के जरिये आईटी (सूचना प्रौद्योगिकी) क्षेत्र संबंधी नौकरी के लिए थाईलैंड गए थे. अब समझा जाता है कि गैरकानूनी ऑनलाइन नौकरी कराने के लिए उन्हें जबरन थाईलैंड से म्यांमार लाया गया है. काम करने से इनकार करने पर नियोक्ताओं द्वारा उनके साथ मारपीट की जा रही है.’

स्टालिन ने कहा था कि राज्य सरकार ऐसे 17 तमिलों के संपर्क में है जो ‘उन्हें बचाने के लिए सरकार की मदद का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)