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यूपी: अस्पताल में महिला के नमाज़ पढ़ने पर विवाद को लेकर पुलिस ने कहा- कोई अपराध नहीं हुआ

इलाहाबाद के तेज बहादुर सप्रू अस्पताल में नमाज़ पढ़ रही एक महिला के वीडियो को लेकर पुलिस ने कहा कि वो बिना किसी ग़लत इरादे के, किसी के काम या आवाजाही में बाधा डाले बिना उनके मरीज़ के शीघ्र स्वस्थ होने को लेकर नमाज़ अदा कर रही थीं. यह अपराध की श्रेणी में नहीं आता.

इलाहाबाद के एक अस्पताल में नमाज अदा करती महिला. (स्क्रीनग्रैब साभार: सोशल मीडिया)

इलाहाबाद: इलाहाबाद के एक अस्पताल ने परिसर में नमाज अदा करने वाली एक महिला का वीडियो सामने आने के बाद जांच समिति गठित की है. हालांकि, पुलिस ने शुक्रवार को कहा कि कोई अपराध नहीं हुआ है.

तेज बहादुर सप्रू अस्पताल (बेली अस्पताल) के अधीक्षक डॉक्टर एमके अखौरी ने बताया कि गुरुवार को डेंगू वॉर्ड में भर्ती महिला शाहीन की तीमारदार सबीहा उससे मिलने आई थी और दोपहर में अचानक वह उसी वॉर्ड में नमाज पढ़ने बैठ गई.

उन्होंने बताया कि किसी व्यक्ति ने महिला द्वारा नमाज पढ़ने का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया. साथ ही उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रशासन के लोग मौके पर पहुंचे और महिला को ऐसा नहीं करने के लिए आगाह किया.

डॉक्टर अखौरी ने बताया कि अस्पताल प्रशासन ने इस घटना की जांच के लिए एक समिति गठित की है.

इस बीच, इलाहाबाद पुलिस ने घटना को लेकर एक ट्वीट में कहा कि महिला का कृत्य अपराध की श्रेणी में नहीं आता है. साथ ही, पुलिस ने स्पष्ट किया कि इस संबंध में कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है.

पुलिस ने एक ट्वीट में कहा, ‘वायरल वीडियो की जांच में पाया गया कि महिला ने बिना किसी गलत इरादे के, किसी के कार्य या आवाजाही में बाधा डाले बिना अस्पताल में भर्ती अपने मरीज के शीघ्र स्वस्थ होने को लेकर नमाज अदा की.’

इस घटना पर प्रतिक्रिया जताते हुए ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि क्या उत्तर प्रदेश पुलिस के पास कोई और काम नहीं है? जहां भी नमाज पढ़ी जाती है, वहां नमाजियों पर प्राथमिकी दर्ज हो जाती है.

उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘अस्पताल में भर्ती अपने रिश्तेदार की देखभाल करने वाले किसी कोने में, किसी को तकलीफ़ दिए बग़ैर अपने मज़हब के मुताबिक इबादत करते हैं तो इसमें जुर्म क्या है? क्या उत्तर प्रदेश पुलिस के पास कोई और काम नहीं है? जहां भी नमाज पढ़ी जाती है, वहां नमाजियों पर प्राथमिकी दर्ज हो जाती है.’

हाल के दिनों में उत्तर प्रदेश में कई घटनाएं सामने आई हैं, जहां पुलिस ने नमाज के दौरान कथित तौर पर शांति भंग करने के लिए लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की है.

पिछले महीने मुरादाबाद जिले के छजलैट क्षेत्र के दुल्लेपुर गांव में कथित तौर पर ‘खुले में’ नमाज पढ़ने के आरोप में 25 लोगों के खिलाफ दर्ज मुकदमा दर्ज किया गया था. हालांकि बाद में पुलिस ने मामले को निरस्त कर दिया था.

बलिया में विरोध के बाद कलेक्‍ट्रेट परिसर में नमाज पढ़ने पर लगी रोक 

उधर, प्रदेश के बलिया जिले में जिला प्रशासन ने कुछ हिंदूवादी संगठनों की आपत्ति पर कलेक्ट्रेट परिसर में नमाज अदा करने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है.

नगर मजिस्ट्रेट प्रदीप कुमार ने शुक्रवार को बताया कि जिला मुख्यालय पर कलेक्ट्रेट परिसर में अधिवक्ता भवन के पास सरकारी भूमि पर कलेक्ट्रेट में कार्यरत कर्मचारी और वकील नमाज अदा करते थे.

उन्होंने कहा कि पहले नमाज पढ़ने वालों की संख्या लगभग 25 होती थी, लेकिन पिछले कुछ समय से पास के मोहल्‍ले के लोगों के भी इसी स्‍थान पर नमाज अदा करने की वजह से यह संख्या तकरीबन 300 हो गई थी.

उन्होंने बताया कि हिंदूवादी संगठनों की तरफ से एक सप्ताह पहले ट्वीट कर सरकारी भूमि पर सार्वजनिक रूप से नमाज अदा करने को लेकर शिकायत की गई थी. कलेक्‍ट्रेट कर्मियों के अलावा अन्‍य लोगों की भीड़ एकत्रित होने पर भी आपत्ति जताई गई थी.

इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने नमाज अदा करने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है और अब जिला प्रशासन की लिखित अनुमति के बाद ही इस स्थान पर नमाज अदा की जाएगी.

बता दें कि 2019 में यूपी पुलिस ने राज्य भर में सड़कों पर नमाज अदा करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के निर्देश जारी किए थे.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)