राज्य और केंद्रशासित प्रदेश 30 नवंबर तक मिड-डे मील योजना का सोशल ऑडिट पूरा करें: केंद्र

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत मिड-डे मील योजना का सोशल ऑडिट किया जाना अनिवार्य है, लेकिन देश भर के स्थानीय प्राधिकरण इस कार्य को पूरा करने में निर्धारित समयसीमा से पीछे चल रहे हैं.

/
(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत मिड-डे मील योजना का सोशल ऑडिट किया जाना अनिवार्य है, लेकिन देश भर के स्थानीय प्राधिकरण इस कार्य को पूरा करने में निर्धारित समयसीमा से पीछे चल रहे हैं.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: केंद्र ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 30 नवंबर तक हर जिले में मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) योजना का सोशल ऑडिट करने का निर्देश दिया है, देश भर के स्थानीय प्राधिकरण इस कार्य को पूरा करने में तय समय से पीछे चल रहे हैं, जो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत अनिवार्य है.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, इस दौरान कई राज्यों ने केंद्र सरकार को सूचित किया है कि उनके अधिकार क्षेत्र में सोशल ऑडिट की कवायद शुरू हो चुकी है लेकिन अतीत में कई मामलों में, शिक्षा मंत्रालय के तहत स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग को अंतिम रिपोर्ट कभी प्रस्तुत नहीं की गई.

उदाहरण के लिए, मंत्रालय ने इस साल फरवरी में मेघालय सरकार को बताया कि उसे वर्ष 2019-20 की अंतिम ऑडिट रिपोर्ट अब तक नहीं मिली है. असम के मामले में 2020-21 की रिपोर्ट का इंतजार है.

योजना की सोशल ऑडिट रिपोर्ट इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह न केवल अनियमितताओं (जिनमें फंड की हेराफेरी या डायवर्जन शामिल है) का पता लगाने में मदद करती है,बल्कि राज्य और केंद्र सरकार को ग्राम सभा स्तर पर स्थानीय समुदायों से प्रत्यक्ष प्रतिक्रिया प्राप्त करने में भी मदद करती है.

इस साल की शुरुआत में यह सामने आया था कि कम से कम नौ राज्यों और चार केंद्रशासित प्रदेशों में 2021-22 का सोशल ऑडिट शुरू तक नहीं हुआ है.

मंत्रालय ने 31 अगस्त को राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों को सूचित किया, ‘पीएबी-पीएम पोषण बैठकों के दौरान भी राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया गया था कि वे वर्ष 2021-22 के लिए सभी जिलों के सभी स्कूलों में सोशल ऑडिट कराएं और साथ में सलाह दी गई थी कि हर साल सभी जिलों में योजना का सोशल ऑडिट कराएं. अत: आपसे अनुरोध है कि अपने राज्य/केंद्रशासित प्रदेश में वर्ष 2021-22 के लिए सभी जिलों में प्राथमिकता के आधार पर ‘पीएम पोषण’ की सोशल ऑडिट की कार्रवाई शुरू करें और इसे मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार 30 नवंबर तक संपन्न करें. ‘

जिन राज्यों ने 2021-22 में सोशल ऑडिट करने की सूचना नहीं दी है, उनमें अरुणाचल प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, तेलंगाना, पंजाब, ओडिशा, हरियाणा, छत्तीसगढ़ शामिल हैं.

रिकॉर्ड दिखाते हैं कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, पुडुचेरी, लद्दाख और लक्षद्वीप में कभी भी सोशल ऑडिट नहीं किया गया है.

इस दौरान कई लोगों ने ऐसा नहीं करने के पीछे का एक कारण कोविड-19 के कारण स्कूल बंद होना बताया है. इन्हें ड्राय किट के वितरण का भी ऑडिट करना है, जिसने स्कूलों के लंबे समय तक बंद रहने के दौरान गर्म पके भोजन की जगह ली थी.

दूसरी ओर, जिन राज्यों ने तकनीकी तौर पर ऑडिट किया, उन्होंने दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया. उदाहरण के लिए, गुजरात ने सूचित किया कि वह केवल तीन जिलों के 60 स्कूलों में ऑडिट कर रहा है, न कि नियमानुसार सभी स्कूलों में.

केंद्र सरकार ने राज्यों को लिखे अपने 31 अगस्त के पत्र में कहा, ‘सोशल ऑडिट का लक्ष्य योजना के बारे में लाभार्थियों के बीच जागरुकता पैदा करना, सरकार को जवाबदेह ठहराने के लिए जनता/लाभार्थियों को सशक्त बनाना, समस्याओं का समाधान करना और जमीनी स्तर पर बाधाओं की पहचान करना है, ताकि योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाया जा सके और यह जमीनी स्तर पर योजना को लोकप्रिय बनाने और मजबूती देने में भी मदद करता है.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)