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बीते एक साल में आटे की खुदरा क़ीमत 19 फीसदी तक बढ़ी, चावल के दामों में भी 8 फीसदी की वृद्धि

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय द्वारा देश भर से एकत्र खुदरा और थोक क़ीमतों के आंकड़े दिखाते हैं कि गेहूं के खुदरा दामों में भी 14 फीसदी की वृद्धि हुई है. वहीं, देश में प्राकृतिक गैस के दाम में 40 फीसदी की रिकॉर्ड वृद्धि के बाद पाइपलाइन गैस और सीएनजी के दाम बढ़ने की संभावना है, जो बीते एक साल में 70 प्रतिशत से अधिक बढ़ चुके हैं.

(फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक साल में चावल, गेहूं और आटे की औसत खुदरा कीमतें 8 से 19 फीसदी तक बढ़ गई हैं.

सरकारी आंकड़ों के हवाले से टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर बताती है कि सर्वाधिक वृद्धि आटे (गेहूं के आटे) की कीमतों में हुई है. गुरुवार को आटे की खुदरा कीमत 36.2 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जो पिछले साल की तुलना में करीब 19 फीसदी अधिक है.

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय द्वारा देश भर से एकत्र किए गए खुदरा और थोक कीमतों के आंकड़े दिखाते हैं कि गेंहूं की भी खुदरा कीमतें 14 फीसदी बढ़ गई हैं, एक साल पहले यह 27 रुपये प्रति किलोग्राम थीं, जबकि गुरुवार को 31 रुपये प्रति किलोग्राम रहीं.

इसी तरह चावल का औसत खुदरा मूल्य 38.2 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है, जो पिछले एक साल में करीब 8 फीसदी की बढ़ोतरी है.

शुक्रवार को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास के भाषण में भी अनाज की कीमतों में वृद्धि का उल्लेख किया गया था. उन्होंने कहा था कि खाद्य पदार्थों की महंगाई का मुद्रास्फीति प्रत्याशाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.

बताया गया है कि महंगाई के दबाव के मद्देनजर केंद्र सरकार ने बुधवार को पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) को दिसंबर तक बढ़ा दिया है.

इस बीच, खाद्य मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) के पास राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) की जरूरतों को पूरा करने के लिए अनाज का पर्याप्त भंडारण है.

प्राकृतिक गैस के दाम में 40 प्रतिशत की वृद्धि, महंगी होजी सीएनजी, पीएनजी

दूसरी तरफ, वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतों में उछाल के साथ ही प्राकृतिक गैस की कीमतों में शुक्रवार को 40 प्रतिशत की रिकॉर्ड बढ़ोतरी कर दी गई. इससे देश में बिजली उत्पादन, उर्वरक बनाने और वाहन चलाने में इस्तेमाल होने वाली गैस महंगी हो जाने की आशंका है.

तेल मंत्रालय के पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (पीपीएसी) की तरफ से जारी आदेश के अनुसार, पुराने गैस क्षेत्रों से उत्पादित गैस के लिए भुगतान की जाने वाली दर को मौजूदा 6.1 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (एमबीटीयू) से बढ़ाकर 8.57 डॉलर प्रति एमबीटीयू कर दिया गया है. इसी दर पर देश में उत्पादित गैस के लगभग दो तिहाई हिस्से की बिक्री होगी.

इस आदेश के मुताबिक, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और उसके भागीदार बीपी पीएलसी द्वारा केजी बेसिन में संचालित डी-6 ब्लॉक जैसे मुश्किल एवं नए क्षेत्रों से निकाली जाने वाली गैस की कीमत 9.92 डॉलर से बढ़ाकर 12.6 डॉलर प्रति इकाई कर दी गई है.

अप्रैल 2019 के बाद से गैस की दरों में यह तीसरी वृद्धि होगी.

प्राकृतिक गैस उर्वरक बनाने के साथ बिजली पैदा करने के लिए एक प्रमुख कच्चा माल है. इसे सीएनजी में भी परिवर्तित किया जाता है और पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) यानी रसोई गैस के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है.

दरों में भारी वृद्धि से सीएनजी और पीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी होने की आशंका है, जो पहले से ही पिछले एक साल में 70 प्रतिशत से अधिक बढ़ चुकी हैं.

सरकार हर छह महीने यानी एक अप्रैल और एक अक्टूबर को गैस की कीमतें तय करती है.

गैस की उच्च कीमतें मुद्रास्फीति को और भी बढ़ा सकती हैं जो पिछले आठ महीनों से आरबीआई के संतोषजनक स्तर से ऊपर चल रही है.

सूत्रों ने कहा कि प्राकृतिक गैस की कीमतों में वृद्धि से दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में सीएनजी और रसोई गैस की दरों में वृद्धि होने की संभावना है.

इससे बिजली पैदा करने की लागत में भी वृद्धि होगी, लेकिन उपभोक्ताओं को कोई बड़ी परेशानी नहीं होगी क्योंकि गैस से पैदा होने वाली बिजली का हिस्सा बहुत कम है.

इसी तरह, उर्वरक उत्पादन की लागत भी बढ़ जाएगी लेकिन सरकार की तरफ से उर्वरक सब्सिडी देने से दरों में वृद्धि की संभावना नहीं है. हालांकि, इस फैसले से उत्पादकों की आय में वृद्धि होने की संभावना है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)