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कर्नाटक: चोरी के संदेह में दलित किशोर को बांधकर बेरहमी से पीटा, दस के ख़िलाफ़ मामला दर्ज

घटना राजधानी बेंगलुरु से 80 किमी दूर चिक्कबल्लापुर ज़िले के केम्पडेनहल्ली गांव की है. जहां कथित उच्च जातियों से आने वाले दस लोगों ने जेवर चुराने के संदेह में चौदह साल के एक दलित किशोर को खंबे से बांधकर बुरी तरह पीटा. पुलिस के अनुसार, घायल किशोर का अस्पताल में इलाज चल रहा है.

(इलस्ट्रेशन: परिप्लब चक्रवर्ती/द वायर)

नई दिल्ली: कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर जिले में ‘उच्च’ जातियों से आने वाले दस लोगों पर चोरी करने के संदेह में एक 14 साल के दलित किशोर को बांधकर पीटने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, यह घटना 29 सितंबर को कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से 80 किमी दूर केम्पडेनहल्ली गांव में हुई.

बच्चे की मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए कहा है कि इस हमले में उन्हें और उनके बेटे दोनों को चोटें आई हैं.

इस परिवार के अनुसार, एक निवासी की कान की बालियां चुराने के आरोप में किशोर को कथित रूप से पकड़ने के क्रम में ग्रामीणों ने उसे एक खंबे से बांध दिया और बेरहमी से पीटा.

द न्यूज़ मिनट के अनुसार, पीड़ित की मां ने बताया कि ‘उच्च’ जाति के आरोपियों ने उनसे पूछा था कि वे ‘किस जाति’ से हैं.

उन्होंने बताया, ‘उन्होंने कहा कि हमारी जाति के लोगों को उनके गांव में नहीं रहना चाहिए और हम सभी को मार दिया जाना चाहिए.’ उन्होंने यह भी जोड़ा कि आरोपी ने उन्हें जातिसूचक गालियां भी दीं और कहा कि भले ही पुलिस में शिकायत दर्ज की गई हो, लेकिन कोई भी उन्हें रोक नहीं सकता.

घटना के समय एक ग्रामीण ने पिटाई का एक वीडियो बना लिया था, जिसके ऑनलाइन साझा होने के बाद पुलिस को इस घटना की जानकारी मिली.

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार, घटना को लेकर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) संशोधन अधिनियम की तीन धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए हैं.

पुलिस के मुताबिक, पीड़ित किशोर का इलाज अस्पताल में चल रहा है.

बता दें कि इससे पहले पिछले महीने राज्य के कोलार ज़िले के मलूर तालुक के एक गांव में निकाले जा रहे ग्राम देवता के जुलूस में 15 साल के दलित लड़के के मूर्ति स्पर्श करने के बाद उसके परिवार से साठ हज़ार रुपये का जुर्माना देने को कहा गया था. गांव के बुजुर्गों का कहना था कि एक ‘अछूत’ के स्पर्श से मूर्ति ‘अशुद्ध’ हो गई. जुर्माना न देने पर परिवार को गांव से बाहर निकालने की धमकी दी गई थी.