भारत

मध्य प्रदेश: दलित परिवार पर हमले में दंपति व एक बेटे की मौत, दो पुत्र घायल

दमोह ज़िले के देहात थानाक्षेत्र के देवरान गांव का मामला. पुलिस के अनुसार, एक मामूली विवाद के बाद छह लोगों ने दलित दंपति और उनके पुत्र की कथित तौर पर गोली मारकर हत्या कर दी. हमले में घायल हुए दो अन्य बेटे उपचाररत हैं और मुख्य आरोपी सहित चार लोगों को गिरफ़्तार कर लिया गया है.

एक विवाद में दलित दंपति और उनके पुत्र की कथित तौर पर गोली मारकर हत्या कर दी. (फोटो: ट्विटर/@SP_DAMOHMP)

दमोह: मध्य प्रदेश के दमोह जिले में मंगलवार सुबह एक विवाद में दलित दंपति और उनके पुत्र की छह लोगों ने कथित तौर पर गोली मारकर हत्या कर दी. पुलिस ने यह जानकारी दी.

जिला पुलिस अधीक्षक डीआर तेनीवार ने बताया कि जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर देहात थानाक्षेत्र के देवरान गांव में सुबह करीब साढ़े छह बजे हुई इस घटना में दंपति के दो अन्य पुत्र घायल हो गए.

उन्होंने बताया कि मामूली विवाद के बाद यह घटना हुई. पुलिस ने मुख्य आरोपी को पकड़ लिया है जबकि पांच फरार आरोपियों को पकड़ने का प्रयास कर रही है.

इसी बीच पुलिस ने बताया कि मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है.

अधिकारी ने कहा कि आरोपियों ने गांव के निवासी 60 वर्षीय दलित व्यक्ति, उसकी 58 वर्षीय पत्नी और 32 वर्षीय पुत्र की गोली मारकर हत्या कर दी.

उन्होंने बताया कि व्यक्ति के दो अन्य पुत्र जिनकी उम्र 28 और 30 वर्ष है, हमले में घायल हो गए और उनका जिला अस्पताल में उपचार चल रहा है.

इस बीच गांव का दौरा करने वाले सागर अंचल के महानिरीक्षक अनुराग ने बताया कि हमले में जान गंवाने वाले 32 वर्षीय व्यक्ति पर मुख्य आरोपी जगदीश पटेल की पत्नी को घूरने का आरोप था.

उन्होंने कहा कि यह घटना इसी विवाद को लेकर हुई है. उन्होंने बताया कि मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है.

उन्होंने कहा कि छह आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की हत्या और अन्य धाराओं के साथ ही अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है. पुलिस फरार आरोपियों की तलाश कर रही है.

संभागायुक्त मुकेश शुक्ला ने भी गांव का दौरा किया और जिला कलेक्टर को आरोपी व उसके परिवार द्वारा सरकारी जमीन पर किए गए अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए.

द हिंदू के मुताबिक, मृतकों की पहचान – घमंडी अहिरवार (60), राजप्यारी अहिरवार (58) और मानक लाल अहिरवार (30) के रूप में हुई है.

मुख्य आरोपी जगदीश पटेल सहित चार लोगों को मंगलवार शाम तक पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया, जबकि तीन अन्य फरार बताए जा रहे हैं.

एक निजी फर्म में सुरक्षा गार्ड के रूप में काम करने वाले जगदीश ने पुलिस को बताया कि मानक ने कथित तौर पर उसकी पत्नी का यौन उत्पीड़न किया था और हत्या उसी का बदला लेने के लिए की गई थी.

जगदीश के बयान के अनुसार, उसकी पत्नी ने मानक पर उसे परेशान करने का आरोप लगाया था, जिसके कारण मंगलवार को दोनों परिवारों के बीच बहस हुई.

दमोह के पुलिस अधीक्षक डीआर तेनीवार और सागर रेंज के महानिरीक्षक अनुराग ने संवाददाताओं से कहा कि अभी तक किसी अन्य हथियार के इस्तेमाल का कोई सबूत नहीं मिला है.

पुलिस के अनुसार, सात आरोपी- जिनमें एक महिला और एक पुरुष भी शामिल हैं, जिन पर खुद छेड़छाड़ का आरोप था – मौके से भाग गए और अलग-अलग दिशाओं में तितर-बितर हो गए. जगदीश को दोपहर में गिरफ्तार कर लिया गया जबकि बाकी आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस ने अलग-अलग टीमों का गठन किया है.

पुलिस ने कहा कि अन्य कोणों से भी जांच की जाएगी. विवाद के दो अन्य कारण- एक भूमि विवाद और दोनों परिवारों की महिलाओं के बीच कहासुनी के कारण विवाद बढ़ गया और अन्य सदस्य शामिल हो गए- भी सामने आए हैं.

दैनिक भास्कर के मुताबिक, दोनों परिवार पड़ोसी हैं. आरोपी परिवार गांव का समृद्ध किसान परिवार है. बगल में पीड़ित परिवार की चार-पांच एकड़ जमीन है. आरोपी परिवार, दलित परिवार की जमीन को अपने कब्जे में लेना चाहता था, जिसे लेकर दोनों परिवारों के बीच मनमुटाव चल रहा था.

हालांकि, सागर रेंज के महानिरीक्षक अनुराग ने कहा कि भूमि विवाद की संभावना नहीं है क्योंकि पीड़ितों के परिवार के पास ज्यादा जमीन नहीं है और वे बीड़ी रोलिंग इकाइयों में श्रमिकों के रूप में काम करते हैं.

पीड़ित परिवार के परिजनों और समुदाय के अन्य लोगों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर दमोह में शवों के साथ प्रदर्शन किया. उन्होंने कहा कि आरोपियों की अवैध संपत्ति को नष्ट करने के लिए बुलडोजर का इस्तेमाल किया जाना चाहिए.

पुलिस प्रदर्शनकारियों को शांत करने में कामयाब रही, लेकिन इलाके में तनाव व्याप्त हो गया, जिसके कारण शाम तक गांव में भारी पुलिस बल मौजूद रहा, जब शवों का अंतिम संस्कार किया गया.

इसी बीच, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने दलित परिवार के तीन सदस्यों की हत्या की उच्च स्तरीय जांच की मांग की. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार दलित परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करे और उनकी हर संभव मदद करे.

वहीं, बसपा प्रमुख मायावती ने भी घटना की निंदा की और ट्वीट किया, ‘यह घटना कलयुग की याद दिलाती है, यह न केवल मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार के तहत कानून व्यवस्था की स्थिति को उजागर करती है, बल्कि गरीबों को सुरक्षा प्रदान करने में सरकार की विफलता को भी उजागर करती है, दलित, आदिवासी और महिलाएं. अपराधियों के साथ व्यवहार में कोई नरमी नहीं बरती जानी चाहिए. बसपा सख्त कार्रवाई की मांग करती है.’

जिस इलाके में यह घटना हुई वह बसपा का गढ़ माना जाता है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)