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असम मिया संग्रहालय मामला: गिरफ़्तार पांच लोगों में से तीन के ख़िलाफ़ यूएपीए के तहत केस दर्ज

असम के गोआलपाड़ा ज़िले में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवंटित एक घर में स्थापित ‘मिया संग्रहालय’ को सील किए जाने के बाद यह घटनाक्रम सामने आया है. कांग्रेस और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट ने इन गिरफ़्तारियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह वर्चस्व और सांप्रदायिक विभाजन की राजनीति का एक उदाहरण है.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

गुवाहाटी: असम मिया परिषद के अध्यक्ष और महासचिव समेत पांच लोगों में से तीन पर आतंकवादी संगठनों से संबंध रखने के आरोप में कठोर गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया है. पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी.

असम के गोआलपाड़ा जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के तहत आवंटित एक घर में स्थापित ‘मिया संग्रहालय’ को मंगलवार (25 अक्टूबर) को सील किए जाने के बाद यह घटनाक्रम सामने आया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार,असम में बंगाली मूल के मुसलमानों की संस्कृति और विरासत को संरक्षित करने के उद्देश्य से स्थापित यह संग्रहालय स्थापित किया गया था. तीनों पर अन्य धाराओं के अलावा यूएपीए के तहत आरोप लगाए गए हैं. पुलिस ने कहा कि आरोप संग्रहालय की स्थापना से संबंधित नहीं है, जिसे उद्घाटन के दो दिन बाद मंगलवार को सील कर दिया गया था.

यूएपीए के आरोप में ऑल असम मिया परिषद के अध्यक्ष एम. मोहर अली, महासचिव अब्दुल बातेन शेख, और तनु धधूमिया को गिरफ्तार किया गया है.

असम पुलिस के विशेष महानिदेशक जीपी सिंह ने ट्विटर पर कहा कि तीनों पर भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने या युद्ध छेड़ने का प्रयास करने का आरोप लगाया गया है. उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 120बी, 121, 121ए 122 और यूएपीए की धारा 10/13 के तहत केस दर्ज किया गया है.

पुलिस ने कहा कि ऑल असम मिया परिषद के अध्यक्ष एम. मोहर अली को गोआलपाड़ा जिले के दपकरभिता स्थित उनके घर, जहां संग्रहालय स्थापित किया गया था, से पकड़ा गया, जब वह धरने पर बैठ गए थे, जबकि इसके महासचिव अब्दुल बातेन शेख को मंगलवार रात धुबरी जिले के आलमगंज स्थित उसके आवास से हिरासत में लिया गया था.

उन्होंने बताया कि रविवार (16 अक्टूबर) को संग्रहालय का उद्घाटन करने वाले अहोम रॉयल सोसाइटी के सदस्य तनु धधूमिया को डिब्रूगढ़ के कावामारी गांव में उनके आवास से हिरासत में लिया गया. वह पहले आम आदमी पार्टी में थे.

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इन तीनों को अलकायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (एक्यूआईएस) और अंसारुल बांग्ला टीम (एबीटी) संगठनों के साथ संबंध के आरोप में जांच और पूछताछ के लिए गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की विभिन्न धाराओं के तहत घोगरापार थाने में दर्ज एक मामले के संबंध में नलबाड़ी ले जाया गया.

नलबाड़ी जिले के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि हाल में गिरफ्तार कुछ चरमपंथियों से पूछताछ के बाद इन तीनों का नाम सामने आया था.

पुलिस ने कहा कि दो अन्य व्यक्तियों – सादिक अली और जेकीबुल अली को पिछले सप्ताह बारपेटा के हाउली और नलबाड़ी के घोगरापार से कट्टरपंथी संगठनों के साथ उनके कथित संबंधों के चलते पकड़ा गया था.

पुलिस ने कहा कि दोनों को नलबाड़ी पुलिस ने बुधवार को गिरफ्तार किया था, लेकिन ‘मिया संग्रहालय’ की स्थापना से उनका कोई लेना-देना नहीं है.

बुधवार को सभी पांचों लोगों को अदालत में पेश किया गया, जिनमें से अली, शेख और धादुमिया को दो दिन की, जबकि दो अन्य को पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया.

इस बीच, आम आदमी पार्टी (आप) के प्रवक्ता ने गुवाहाटी में कहा कि धादुमिया को पार्टी से निकाला जा चुका है, क्योंकि वह अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में असफल रहे थे.

सरकारी अधिकारियों की एक टीम ने मंगलवार को गोआलपाड़ा जिले के दपकाभिता में ‘मिया संग्रहालय’ को सील कर दिया था और नोटिस लगाया था कि यह उपायुक्त के आदेश पर किया गया है. उन्होंने बताया कि संग्रहालय में कुछ कृषि और मत्स्य उपकरण, तौलियां और ‘लुंगी’ प्रदर्शित की गई थीं.

हिरासत में लिए जाने से पहले अली अपने दो नाबालिग बेटों के साथ अपने घर के बाहर धरने पर बैठ गए थे और संग्रहालय को तुरंत दोबारा खोलने की मांग कर रहे थे.

अली ने कहा, ‘हम उन वस्तुओं को प्रदर्शित कर रहे हैं, जिससे समुदाय अपनी पहचान जोड़ता है, ताकि अन्य समुदाय के लोग महसूस कर सकें कि ‘मिया’ उनसे अलग नहीं हैं.’

असम में ‘मिया’ शब्द बांग्ला भाषी प्रवासियों के संदर्भ में इस्तेमाल किया जाता है, जिनकी जड़ें बांग्लादेश से जुड़ती हैं.

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेताओं ने इस संग्रहालय को तत्काल बंद करने की मांग की थी और पार्टी के अल्पसंख्यक मोर्चा के सदस्य अब्दुर रहीम जिब्रान ने पीएमएवाई (प्रधानमंत्री आवास योजना) के तहत आवंटित घर में संग्रहालय की स्थापना के खिलाफ लखीपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी.

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने मंगलवार को कहा था कि ‘मिया’ समुदाय के कुछ सदस्यों की ऐसी गतिविधियां ‘असमी पहचान’ के लिए खतरा उत्पन्न करती हैं.

शर्मा ने एक कार्यक्रम के इतर कहा, ‘कैसे वे (‘मिया’ समुदाय) दावा कर सकते हैं कि हल उनकी पहचान है? इसे पूरे राज्य में सदियों से सभी किसानों द्वारा इस्तेमाल किया जाता रहा है. ‘लुंगी’ एकमात्र ऐसी वस्तु है, जिस पर वे अपना दावा कर सकते हैं.’

उन्होंने कहा कि जिन्होंने संग्रहालय स्थापित किया है, उन्हें विशेषज्ञ समिति को जवाब देना होगा कि उनके दावे का आधार क्या है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) दोनों ने इन गिरफ्तारियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि ‘संस्कृति को बनाए रखने की कोशिश करने वालों’ के खिलाफ कार्रवाई ‘वर्चस्व और सांप्रदायिक विभाजन की राजनीति का एक उदाहरण है’.

एआईयूडीएफ को राज्य में बंगाली मूल के मुसलमानों की आवाज के रूप में देखा जाता है, जिन्हें अक्सर अवैध अप्रवासी या ‘बांग्लादेशी’ के रूप में वर्णित और अपमानजनक रूप से मिया के रूप में संदर्भित किया जाता है.

ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के विधायक अमीनुल इस्लाम ने कहा कि पार्टी ‘मिया संग्रहालय’ खोलने के खिलाफ है, लेकिन इस तरह के संग्रहालय के खोलने की वजह को देखना चाहिए.

उन्होंने कहा, ‘समुदाय के लोग वर्षों से अपमानित महसूस कर रहे हैं और यह उनकी हताशा से उपजी प्रतिक्रिया है.’

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, असम में जहां भाजपा एआईयूडीएफ को राष्ट्र-विरोधी बताकर निशाना साधती है, इस्लाम ने सुझाव दिया कि मिया मुस्लिम संबंधी ये घटना भाजपा की करतूत हो सकती है. मिया मुस्लिम, असमिया मुस्लिम, सरकार इस तरह से मुसलमानों को तोड़ने की कोशिश कर रही है. वे भाजपा मसाला चाहते हैं. प्रधानमंत्री मोदी कहते हैं सबका साथ, सबका विकास, लेकिन यहां कुछ अलग किया जा रहा है.

कांग्रेस ने गिरफ्तारी की आलोचना करते हुए इसे धार्मिक ध्रुवीकरण का एक प्रयास बताया है. विपक्ष के नेता देवव्रत सैकिया ने कहा, ‘यह एक स्वतंत्र देश है. कोई भी अपने पूर्वजों की चीजों को रख सकता है और उसे संग्रहालय कह सकता है. मैंने जो सुना है, इस मामले पर मुख्यमंत्री ने भी प्रतिक्रिया दी है. अन्य गंभीर चीजें हैं, जिन पर मुख्यमंत्री को विचार करना चाहिए और उन पर कार्रवाई करनी चाहिए.’

कांग्रेस के लोकसभा सदस्य अब्दुल खालेक ने कहा कि पहले तो ‘मिया’ नाम का कोई समुदाय नहीं है, बल्कि यह एक सम्मानजनक संबोधन है.

खालेक ने कहा, ‘लोगों को अपने घर में सांस्कृतिक संग्रहालय या पुस्तकालय खोलने का अधिकार है, लेकिन मैं नहीं मानता कि समुदाय संग्रहालय स्थापित करने की जरूरत है.’

बारपेटा से सांसद खालेक ने हालांकि यह भी कहा कि किसी व्यक्ति को संग्रहालय स्थापित करने के लिए गिरफ्तार करना और आंतकवाद रोधी धाराओं में मामला दर्ज करना ‘अन्याय’ है.

खालेक ने कहा कि समुदाय को भी हल जैसी वस्तुओं पर दावेदारी करने को लेकर सचेत रहना चाहिए, क्योंकि पूरे उपमहाद्वीप के सभी किसान इनका इस्तेमाल करते हैं.

वकील नकीबुर जमन ने कहा कि यह समुदाय के एक धड़े की असमी समाज में विभाजन पैदा करने की साजिश है.

जमन ने कहा, ‘हम हाल के वर्षों में ‘मिया’ संग्रहालय, स्कूल, कविता और यहां तक धुबरी और बारपेटा को मिलाकर स्वायत्त परिषद बनाने की मांग सुन रहे हैं. हालांकि, यह कुछ ताकतों के निहित स्वार्थ की वजह से है जो असमी संस्कृति और पहचान को खतरा पैदा करना चाहते हैं.’

उल्लेखनीय है कि ‘मिया संग्रहालय’ स्थापित करने का प्रस्ताव सबसे पहले कांग्रेस विधायक शरमन अली अहमद ने वर्ष 2020 में किया था, जिसे मुख्यमंत्री ने खारिज कर दिया था.

मालूम हो कि हाल ही में असम के मोरीगांव, बोंगाईगांव और गोआलपाड़ा जिलों में चार निजी मदरसों को इन दो आतंकवादी संगठनों – अलकायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट और अंसारुल बांग्ला टीम के साथ कथित संलिप्तता के कारण ध्वस्त कर दिया गया था. इन चार में से तीन को सरकारी अधिकारियों ने ध्वस्त कर दिया, जबकि अधिकारियों ने दावा किया कि चौथे को लोगों ने खुद ही गिरा दिया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)