महाराष्ट्र: फडणवीस की वापसी के बाद फोन टैपिंग के आरोपों में घिरीं आईपीएस अधिकारी को क्लीन चिट

1988 बैच की आईपीएस अधिकारी रश्मि शुक्ला पर महाविकास अघाड़ी सरकार ने कांग्रेस और शिवसेना के कई बड़े नेताओं के फोन अवैध रूप से टैप करने के आरोप लगाए थे. रिपोर्ट के मुताबिक़, अब पुलिस ने उन्हें क्लीन चिट दे दी है और आने वाले दिनों में उन्हें राज्य पुलिस में एक वरिष्ठ पद दिए जाने की उम्मीद है.

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आईपीएस अधिकारी रश्मि शुक्ला, बैकग्राउंड में देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे. (इलस्ट्रेशन: द वायर)

1988 बैच की आईपीएस अधिकारी रश्मि शुक्ला पर महाविकास अघाड़ी सरकार ने कांग्रेस और शिवसेना के कई बड़े नेताओं के फोन अवैध रूप से टैप करने के आरोप लगाए थे. रिपोर्ट के मुताबिक़, अब पुलिस ने उन्हें क्लीन चिट दे दी है और आने वाले दिनों में उन्हें राज्य पुलिस में एक वरिष्ठ पद दिए जाने की उम्मीद है.

आईपीएस अधिकारी रश्मि शुक्ला, बैकग्राउंड में देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे. (इलस्ट्रेशन: द वायर)

मुंबई: पिछले ढाई वर्षों से, ऐसी संभावना लग रही थी कि भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) की वरिष्ठ अधिकारी रश्मि शुक्ला को महाराष्ट्र पुलिस द्वारा कांग्रेस और शिवसेना के कई नेताओं के कथित अवैध फोन टैपिंग में ‘सीधे संलिप्तता’ के लिए गिरफ्तार किया जा सकता था. उनकी गिरफ्तारी रोकने के लिए शुक्ला ने निचली अदालत से लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट तक का रुख किया था. हालांकि, पिछले कुछ हफ्तों में हवा उनके पक्ष में बदल गई है.

रिपोर्ट के अनुसार, कभी कथित फोन टैपिंग के कम से कम तीन मामलों में मुख्य आरोपी बताई गई शुक्ला को पुलिस ने अब क्लीन चिट दे दी है. इस बीच, देवेंद्र फडणवीस द्वारा संचालित महाराष्ट्र गृह विभाग के भी उन्हें राज्य कैडर में वापस लाने की संभावना है. शुक्ला को आने वाले कुछ दिनों में महानिदेशक बनाए जाने की उम्मीद है.

शुक्ला 1988 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं, जो सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और विशेष रूप से फडणवीस के साथ उनकी निकटता के लिए जानी जाती हैं. 2020 में राज्य में शिवसेना के नेतृत्व वाले महाविकास अघाड़ी (एमवीए) गठबंधन के सत्ता में आने के बाद से वे सवालों के घेरे में आ गईं. उनके खिलाफ ढेरों आरोप लगे थे, जिनमें कहा गया था कि उन्होंने शिवसेना सांसद संजय राउत और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता एकनाथ खडसे के फोन को अवैध रूप से टैप किया था.

तब तत्कालीन विपक्ष के नेता फडणवीस ने दावा किया था कि शुक्ला केवल ‘अपना फर्ज निभा रही थीं’ और कथित फोन टैपिंग से राज्य में कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के तबादलों और पोस्टिंग में भ्रष्टाचार का पता चला. उन्होंने इन अवैध तबादलों में तत्कालीन गृह मंत्री अनिल देशमुख की भूमिका होने का आरोप लगाया था. राउत और देशमुख दोनों को केंद्रीय एजेंसियों जैसे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा क्रमशः भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए गिरफ्तार किया गया है – और दोनों का ही कहना है कि उनकी गिरफ्तारी राजनीतिक प्रतिशोध का नतीजा है.

जून 2024 में सेवानिवृत्त होने वाली शुक्ला राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) हेमंत नागराले, जो अगले कुछ दिनों में सेवानिवृत्त होने वाले हैं, के बाद राज्य की सबसे वरिष्ठ अधिकारी हैं.

शुक्ला पर कई आरोपों के बाद उन्हें हैदराबाद में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के अतिरिक्त महानिदेशक के रूप में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया था. केंद्र सरकार द्वारा शुक्ला को संदेह के घेरे में होने के बावजूद केंद्रीय पोस्टिंग देने के निर्णय को एमवीए सरकार ने उन्हें ‘बचाने’ का स्पष्ट प्रयास बताते हुए आलोचना की थी.

एमवीए सरकार ने उनके खिलाफ सख्ती से जांच की और राज्य के गृह विभाग ने उनकी गिरफ्तारी से पहले की जमानत का हर स्तर पर विरोध किया. लेकिन इस साल जून में एमवीए सरकार गिरने के बाद एकनाथ शिंदे-फडणवीस के नेतृत्व वाली नई सरकार ने उनके खिलाफ आरोपों को आगे न बढ़ाने का फैसला किया.

इस महीने की शुरुआत में पुणे पुलिस ने एक मजिस्ट्रेट अदालत के समक्ष एक ऐसे मामले में, जहां आरोप लगाया गया था कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता नाना पटोले का फोन अवैध रूप से टैप किया गया था, ‘सी-समरी रिपोर्ट‘ दाखिल की. सी-समरी रिपोर्ट तब दाखिल की जाती है, जब कोई मामला ‘गलती से’ दर्ज किया गया हो. यह मामला फरवरी में दर्ज किया गया था और शुक्ला पर तब पटोले का फोन टैप करने का आरोप लगाया गया था, जब वे भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान पुणे शहर में पुलिस आयुक्त के रूप में तैनात थीं.

मार्च में कोलाबा पुलिस ने अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (विशेष शाखा) राजीव जैन द्वारा राउत और खड़से के फोन को अवैध रूप से टैप करने के आरोप वाली एक शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की. जैन ने एफआईआर  में दावा किया था कि ऐसा शुक्ला के राज्य के खुफिया विभाग (एसआईडी) के प्रमुख के बतौर कार्यकाल के दौरान हुआ था. जांच के बाद पुलिस ने मामले में 750 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की.

हालांकि, पुलिस की जांच और चार्जशीट के निष्कर्षों की अनदेखी करते हुए राज्य सरकार अब केंद्र सरकार को ‘सतर्कता मंजूरी रिपोर्ट’ भेज सकती है, जिससे शुक्ला के लिए राज्य की डीजीपी या मुंबई शहर की पुलिस आयुक्त बनने का रास्ता साफ हो जाएगा.

पुणे पुलिस आयुक्त के रूप में शुक्ला के कार्यकाल के दौरान उनके विभाग द्वारा एल्गार परिषद मामले, जिसमें कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, वकीलों और शिक्षाविदों को गिरफ्तार किया गया था, को लेकर भी उनकी खासी आलोचना की गई थी.