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ब्रिटेन के लेस्टर हिंदू-मुस्लिम तनाव को भारत के कई ट्विटर एकाउंट ने बढ़ावा दिया था: रिपोर्ट

बीते 28 अगस्त को एशिया कप में हुए भारत और पाकिस्तान के बीच मुक़ाबले के बाद ब्रिटेन के लेस्टर शहर में हिंदू-मुस्लिम समुदाय आमने-सामने आ गए थे. अब रटगर्स विश्वविद्यालय के नेटवर्क कन्टेजन रिसर्च इंस्टिट्यूट ने अपने शोध में कहा है कि अशांति फैलाने वाले कई ट्विटर एकाउंट भारत में बनाए गए थे.

फाइल फोटो.

नई दिल्ली: एक शोध में सामने आया है कि बीते 28 अगस्त को एशिया कप में हुए भारत और पाकिस्तान के बीच मुकाबले के बाद ब्रिटेन के लेस्टर शहर में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच भड़के तनाव को भारत से संचालित ट्विटर एकाउंट्स द्वारा हवा दी गई थी.

इस संबंध में इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में बताया गया है कि उक्त शोध सबसे पहले ब्लूमबर्ग न्यूज में प्रकाशित हुआ.

रिपोर्ट के मुताबिक, रटगर्स विश्वविद्यालय के नेटवर्क कन्टेजन रिसर्च इंस्टिट्यूट (Network Contagion Research Institute) के अनुसार, इस साल अगस्त के अंत और सितंबर के शुरुआत में लेस्टर में हुए दंगों के दौरान ट्विटर पर करीब 500 अप्रमाणिक एकाउंट बनाए गए थे, जिनसे हिंसा का आह्वान किया गया और मीम तथा भड़काऊ वीडियो फैलाए गए.

बता दें कि 28 अगस्त को एशिया कप में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए क्रिकेट मैच के बाद लेस्टर में सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए थे, कुछ दंगाई लाठी और डंडे लिए हुए थे और कांच की बोतलें फेंक रहे थे. जनता को शांत करने के लिए पुलिस को तैनात किया गया था.

लेस्टरशायर पुलिस के अनुसार, टकरावों के दौरान घरों, कारों और धार्मिक कलाकृतियों को नुकसान पहुंचाया गया. यह हफ्तों तक चला और 47 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया था.

मस्जिदों में आग लगाने और अपहरण के दावों के वीडियो से सोशल मीडिया भरा हुआ था, जिसने पुलिस को यह चेतावनी जारी करने के लिए मजबूर किया कि लोग ऑनलाइन प्रसारित भ्रामक खबरों पर विश्वास नहीं करें. शोधकर्ताओं का कहना है कि अशांति फैलाने वाले कई ट्विटर एकाउंट भारत में बनाए गए थे.

शोधकर्ताओं ने कहा कि एक शुरुआती वीडियो, जिसमें कथित तौर पर यह दिखाया गया था कि हिंदुत्ववादी मुसलमानों पर हमला कर रहे हैं, ने हालातों को अधिक तनावपूर्ण बनाने में सहयोग किया.

लेस्टर के मेयर पीटर सोल्स्बी के अनुसार, अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों ने टकराव को हवा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. कई मीडिया रिपोर्ट और 21 वर्षीय एडम यूसुफ समेत हिंसा में शामिल रहे लोगों ने एक जज को बताया था कि वह प्रदर्शन में एक चाकू लेकर आया था और सोशल मीडिया से प्रभावित हुआ था.

नेटवर्क कन्टेजन रिसर्च इंस्टिट्यूट (एनसीआरआई) के संस्थापक जोएल फिकेल्स्टीन ने बताया कि दोनों ही पक्ष बढ़ते जातीय तनाव के बीच सोशल मीडिया का इस्तेमाल एक हथियार के तौर पर करते हैं.

गूगल के यूट्यूब, मेटा के इंस्टाग्राम, ट्विटर और टिकटॉक से एकत्र किए डेटा का उपयोग करते हुए बुधवार को प्रकाशित एनसीआरआई की रिपोर्ट इस संबंध में सबसे विस्तृत विचार प्रस्तुत करती है कि कैसे विदेशी इंफ्लुएंसर्स स्थानीय स्तर पर गलत जानकारी फैलाते हैं, जो ब्रिटेन के सबसे विविधता भरे शहरों में से एक में संघर्ष की कारण बन जाती है.

एनसीआरआई के भाषाई विश्लेषण में पाया गया कि ‘हिंदू’ शब्द का उल्लेख ‘मुस्लिम’ के उल्लेख से लगभग 40 फीसदी अधिक है और अंतरराष्ट्रीय प्रभुत्व के लिए एक वैश्विक परियोजना में हिंदुओं को बड़े पैमाने पर हमलावरों और षड्यंत्रकारियों के रूप में चित्रित किया गया है.

उन्होंने पाया कि 70 फीसदी हिंसक ट्वीट्स लेस्टर दंगों के दौरान हिंदुओं के खिलाफ किए गए थे.

शोधकर्ताओं ने कहा कि एक विशेष तौर पर प्रभावी मीम, जिसे अंतत: ट्विटर द्वारा प्रतिबंधित कर दिया गया था, वह #HinduUnderAttackInUK हैशटैग के साथ फैलाया गया था. कार्टून में मुसलमानों को कीड़े-मकोड़े के रूप में दर्शाया गया था और आरोप लगाया गया था कि इस्लाम के विभिन्न पहलू ‘भारत को नष्ट करने के लिए एकजुट हो रहे हैं.’

शोधकर्ताओं को ऐसे एकाउंट्स के सबूत भी मिले, जिनसे हिंदू-विरोधी और मुस्लिम-विरोधी दोनों तरह के संदेशों का प्रसार किया गया, प्रत्येक पक्ष हिंसा के लिए दूसरे पक्ष को दोषी ठहरा रहा था.

एनसीआरआई द्वारा चिह्नित एक एकाउंट से लिखा गया, ‘यह हिंदू बनाम मुस्लिम नहीं है, यह लेस्टर बनाम चरमपंथी हिंदू है, जो जाली पुर्तगाली पासपोर्ट के जरिये यहां आए थे, उन्होंने 5 साल पहले यहां आना शुरू किया, उससे पहले हिंदू और मुस्लिम शांति से रहते थे.’

एक और एकाउंट, जो प्रतिबंधित कर दिया गया है, से लिखा गया कि हिंदू वैश्विक नरसंहार को संगठित करने की कोशिश कर रहे थे.

फिंकेल्स्टीन ने कहा कि शोधकर्ताओं ने पाया कि ब्रिटेन के हमलावरों ने हमलों के लिए और ब्रिटिश हिंदुओं के खिलाफ साजिश को बढ़ावा देने के लिए सोशल मीडिया मंचों का एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया, जिसके चलते दोनों पक्षों के बीच ‘जैसे को तैसा’ वाली भावना विकसित हुई.

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ट्विटर पर फर्जी वीडियो फैलने की शुरुआती घटनाओं के बाद भारत से लेस्टर में घटनाओं के लिए पूरी तरह से मुसलमानों को दोषी ठहराते हुए ट्वीट किए गए, जिसके चलते लेस्टर में हिंदुओं के खिलाफ और भी अधिक हिंसा भड़की.

शोधकर्ताओं ने तनाव के लिए बाहरी राष्ट्रवादी समूहों को जिम्मेदार ठहराया. बीबीसी और दुष्प्रचार अनुसंधान कंपनी ने भी ऐसे सबूत पाए, जो बताते हैं कि अशांति के दौरान सोशल मीडिया के बहुत सारे पोस्ट भारत से किए गए थे.