दुनिया

अमेरिकी अधिकारी के नरेंद्र मोदी का संदर्भ देने को भारत ने ‘अप्रासंगिक और अनावश्यक’ बताया

पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या पर सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सुल्तान को छूट दिए जाने के बारे में पूछे जाने पर अमेरिकी विदेश विभाग के प्रमुख उप-प्रवक्ता ने 18 नवंबर को कहा था कि यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका ने ऐसा किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित यह पूर्व में कई राष्ट्राध्यक्षों के लिए लागू किया गया है.

इंडोनेशिया में हुए जी-20 सम्मलेन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के साथ भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या के आरोपों का सामना कर रहे सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सुल्तान को मिली छूट का बचाव करते हुए अमेरिकी विदेश विभाग के एक अधिकारी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र किए जाने को भारत ने नाखुशी जाहिर करते हुए गैर-जरूरी बताया है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने मामले में अमेरिकी अधिकारी द्वारा मोदी का जिक्र किए जाने के बारे में पूछे गए सवालों के जवाब में कहा, ‘सच कहूं, तो मैं यह समझने में विफल हूं कि प्रधानमंत्री मोदी पर टिप्पणी (अमेरिकी अधिकारी को) कैसे प्रासंगिक या आवश्यक लगी.’

बागची ने भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों का जिक्र करते हुए कहा, ‘हमारे दोनों देशों के बीच बहुत ही विशेष संबंध हैं जो और मजबूत हो रहे हैं तथा हम इसे और गहरा करने के लिए अमेरिका के साथ काम करने की आशा करते हैं.’

बीते दिनों पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या पर सऊदी युवराज को छूट दिए जाने के बारे में पूछे जाने पर अमेरिकी विदेश विभाग के प्रमुख उप-प्रवक्ता वेदांत पटेल ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका ने ऐसा किया है और प्रधानमंत्री मोदी सहित यह पूर्व में कई राष्ट्राध्यक्षों के लिए लागू किया गया है.

पटेल उन घटनाक्रमों को याद कर रहे थे जो 2005 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में मोदी को अमेरिकी वीजा देने के इनकार से शुरू हुआ था, जिसमें 2002 के गुजरात दंगों के समय ‘राज्य संस्थाओं की निष्क्रियता‘ के लिए मोदी को जिम्मेदार माना था.

बागची ने यह भी कहा कि दिसंबर में प्रधानमंत्री के अमेरिका जाने संबंधी खबरें भी गलत हैं. उन्होंने कहा, ‘हमारी तरफ से दिसंबर में प्रधानमंत्री की अमेरिका यात्रा का कोई प्रस्ताव नहीं है. इस संबंध में मीडिया में आईं खबरें गलत हैं.’

बागची ने हाल ही में बाली में जी-20 शिखर सम्मेलन से इतर मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो. बाइडन के बीच संक्षिप्त द्विपक्षीय बैठक के संबंध में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ह्वाइट हाउस के प्रवक्ता के हवाले से ‘झूठी टिप्पणियों’ के बारे में सोशल मीडिया पोस्ट को भी खारिज किया.

उन्होंने कहा, ‘हमने कुछ गलत सोशल मीडिया पोस्ट देखे हैं जिनमें झूठे बयानों को विदेश मंत्री से जोड़ा गया है, जिन्होंने प्रेस या सोशल मीडिया पर ऐसी कोई टिप्पणी नहीं की है. इसमें ह्वाइट हाउस के प्रेस सचिव का हवाला देते हुए भी गलत बयान दिए गए हैं. इसलिए, मैं आप सभी से अनुरोध करता हूं कि इस तरह की गलत सूचना पर विश्वास न करें.’

बागची ने कहा कि प्रधानमंत्री ने बाली शिखर सम्मेलन के दौरान कई मौकों पर बाइडन से मुलाकात की, जिसमें एक संक्षिप्त द्विपक्षीय बैठक और एक त्रिपक्षीय बैठक शामिल थी जिसमें इंडोनेशियाई राष्ट्रपति जोको विडोडो शामिल थे.

उन्होंने कहा, ‘इन बातचीत के दौरान, उन्होंने कई मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया. हमारी प्रेस विज्ञप्ति और ट्वीट के साथ-साथ बाली में विदेश सचिव की प्रेस वार्ता में इन सभी चर्चा के बारे में बताया गया.’

बागची ने कहा, ‘अमेरिकी पक्ष ने त्रिपक्षीय बैठक का अपना मूलपाठ (रीडआउट) भी जारी किया है और अलग से यह भी कहा है कि दोनों नेताओं के बीच एक संक्षिप्त द्विपक्षीय बैठक हुई.’

बता दें कि 2018 में वॉशिंगटन पोस्ट के स्तंभकार और निर्वासन में रह रहे सऊदी अरब के जमाल खशोगी इस्तांबुल में सऊदी वाणिज्य दूतावास के अंदर से गायब हो गए थे. सऊदी एजेंटों ने उन्हें एक ऑपरेशन में मार डाला और उनके शरीर के टुकड़े कर दिए थे, जिसको लेकर अमेरिकी खुफिया विभाग का मानना था कि इसका आदेश क्राउन प्रिंस ने दिया था.

क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने हत्या का आदेश देने से इनकार किया था, लेकिन बाद में उन्होंने स्वीकार किया कि यह ‘उनकी निगरानी‘ में हुआ था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)