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समान नागरिक संहिता लागू करने पर गंभीरता से विचार कर रही है कर्नाटक सरकार: मुख्यमंत्री

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा कि हम दीनदयाल उपाध्याय के समय से समान नागरिक संहिता के बारे में बात कर रहे हैं. देश में राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर इस पर गंभीर विचार चल रहा है. सही समय आने पर इसे लागू करने का भी इरादा है. यह राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के मुख्य घोषणा-पत्र का हिस्सा था.

बसवराज बोम्मई. (फोटो साभार: फेसबुक)

बेंगलुरु/शिवमोगा: कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा है कि उनकी सरकार समानता सुनिश्चित करने के लिए राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने पर ‘गंभीरता’ से विचार कर रही है.

बोम्मई ने भारतीय संविधान दिवस के अवसर पर राज्य की राजधानी बेंगलुरु में संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि उनकी सरकार समान नागरिक संहिता लागू करने पर बहुत गंभीरता से विचार कर रही है, क्योंकि यह राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के मुख्य घोषणा-पत्र का हिस्सा था.

बोम्मई के अनुसार, राज्य सरकार इसे लागू करने के लिए विभिन्न राज्यों में गठित विभिन्न समितियों पर विचार कर रही है, ताकि इस पर कोई निर्णय लेने से पहले सभी पहलुओं का अध्ययन किया जा सके.

मुख्यमंत्री ने शुक्रवार (25 नवंबर) को शिवमोगा में भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा था कि संविधान की प्रस्तावना समानता और बंधुत्व की बात करती है.

इसके प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताते हुए उन्होंने कहा, ‘हम दीनदयाल उपाध्याय के समय से समान नागरिक संहिता के बारे में बात कर रहे हैं. देश में राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर इस पर गंभीर विचार चल रहा है. सही समय आने पर इसे लागू करने का भी इरादा है.’

उन्होंने कहा, ‘हम यह भी चर्चा कर रहे हैं कि इसे अपने राज्य में कैसे (लागू) किया जाए.’ बोम्मई ने कहा कि राज्य सरकार इसे लागू करने के लिए सभी आवश्यक उपाय करेगी.

बोम्मई ने धर्मांतरण विरोधी कानून पर कहा कि कई लोगों ने इसे गैर-संवैधानिक करार दिया, लेकिन अब सर्वोच्च न्यायालय ने एक आदेश पारित किया है, जिसमें कहा गया है कि जबरन धर्म-परिवर्तन एक अपराध है.

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी का दृढ़ विश्वास है कि श्रद्धालुओं को मंदिरों का प्रबंधन करना चाहिए तथा आने वाले दिनों में इस दिशा में प्रावधान किए जाएंगे.

बता दें कि समान नागरिक संहिता भारतीय जनता पार्टी के चुनावी वादों में प्रमुख रहा है. समान नागरिक संहिता 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान सत्तारूढ़ भाजपा के चुनावी वादों में से एक रहा है.

अगले महीने होने वाले गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने घोषणा-पत्र  में राज्य में समान नागरिक संहिता को लागू करने का वादा किया है.

इससे पहले गुजरात सरकार ने 29 अक्टूबर को घोषणा की थी कि वह समान नागरिक संहिता के कार्यान्वयन के लिए एक समिति बनाएगी.

हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए भी भाजपा ने सरकार बनने पर समान नागरिक संहिता लागू करने, सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थाओं में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने और विभिन्न क्षेत्रों में रियायतें देने का वादा किया गया है.

बीते मई महीने में भाजपा शासित उत्तराखंड ने समान नागरिक संहिता के कार्यान्वयन की जांच के लिए एक समिति का गठन किया था.

इससे पहले मार्च में नवगठित सरकार की पहली कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में समान नागरिक संहिता के कार्यान्वयन के लिए विशेषज्ञों की एक समिति बनाने की घोषणा की थी.

समान नागरिक संहिता को सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, गोद लेने और उत्तराधिकार जैसे व्यक्तिगत मामलों को नियंत्रित करने वाले कानूनों के एक समान समूह के रूप में संदर्भित किया जाता है, चाहे वह किसी भी धर्म का हो.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)