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लगातार तीसरी बार ईडी निदेशक का कार्यकाल बढ़ाए जाने के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट पहुंची कांग्रेस

बीते दिनों केंद्र सरकार ने ईडी निदेशक संजय कुमार मिश्रा का कार्यकाल तीसरी बार बढ़ाया था, जबकि सुप्रीम कोर्ट पहले ही कह चुका था कि उन्हें और सेवा विस्तार नहीं दिया जाएगा. इसके ख़िलाफ़ कांग्रेस नेता जया ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करते हुए कहा है कि इससे देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया नष्ट हो रही है.

संजय कुमार मिश्रा. (फोटो साभार: ट्विटर/IRS Association)

नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के निदेशक संजय कुमार मिश्रा का कार्यकाल तीसरी बार बढ़ाए जाने को चुनौती देते हुए कांग्रेस नेता जया ठाकुर ने गुरुवार को उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया.

उन्होंने दलील दी कि बार-बार कार्यकाल बढ़ाने से देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया नष्ट हो रही है. याचिका में यह आरोप भी लगाया गया है कि केंद्र सरकार अपने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ प्रवर्तन एजेंसियों का दुरुपयोग कर लोकतंत्र के बुनियादी ढांचे को नष्ट कर रही है.

अधिवक्ताओं वरुण ठाकुर और शशांक रत्नू के जरिये दायर की गई याचिका में कहा गया है कि प्रतिवादी संख्या 2 (मिश्रा) के कार्यकाल का विवादित विस्तार देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नष्ट कर रहा है, इसलिए यह रिट याचिका दायर की गई है, जिसे न्याय के हित में स्वीकार किया जा सकता है.

कांग्रेस नेता ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने एक स्पष्ट आदेश पारित किया था कि मिश्रा के कार्यकाल को और विस्तार नहीं दिया जाएगा, लेकिन केंद्र ने उन्हें 17 नवंबर 2021 से 17 नवंबर 2022 तक दूसरा विस्तार दिया. इसके बाद उन्होंने याचिका दायर की जिस पर एक नोटिस जारी किया गया.

याचिका में कहा गया है कि इस रिट याचिका के लंबित रहने के दौरान, प्रतिवादी संख्या 1 ने प्रतिवादी संख्या 2 को 18 नवंबर 2022 से 18 नवंबर 2023 तक के लिए तीसरा विस्तार दिया जो दर्शाता है कि प्रतिवादी संख्या 1 का कानून के शासन के प्रति कोई सम्मान नहीं है.

इससे पहले, 18 नवंबर को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस एसके कौल ने ईडी के निदेशक का कार्यकाल बढ़ा कर पांच साल तक करने के संशोधित कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था.

उल्लेखनीय है कि उसके एक दिन पहले ही ईडी प्रमुख के रूप में संजय कुमार मिश्रा को फिर से एक साल का कार्यकाल विस्तार दिया गया था.

कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला और जया ठाकुर, तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा और साकेत गोखले द्वारा दायर याचिकाओं सहित याचिकाओं का एक समूह सुनवाई के लिए पीठ के समक्ष आया था.

कार्मिक मंत्रालय द्वारा जारी एक आधिकारिक आदेश के अनुसार, 1984 बैच के भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) अधिकारी मिश्रा को 18 नवंबर, 2023 तक एक साल का सेवा विस्तार दिया गया है.

61 वर्षीय मिश्रा 1984 बैच के आयकर कैडर में भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी हैं और उन्हें पहली बार 19 नवंबर 2018 को एक आदेश द्वारा दो साल की अवधि के लिए ईडी निदेशक नियुक्त किया गया था.

बाद में 13 नवंबर 2020 के एक आदेश द्वारा नियुक्ति पत्र को केंद्र सरकार द्वारा पूर्व प्रभाव से संशोधित किया गया और दो साल के उनके कार्यकाल को तीन साल के कार्यकाल में बदल दिया गया.

केंद्र के 2020 के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चुनौती दी गई थी, जिसने विस्तार आदेश को बरकरार रखा था, लेकिन साथ ही यह कहा था कि मिश्रा को आगे कोई विस्तार नहीं दिया जा सकता है.

जस्टिस एल. नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया था कि सेवानिवृत्ति की आयु प्राप्त कर चुके अधिकारियों के कार्यकाल का विस्तार दुर्लभ और असाधारण मामलों में किया जाना चाहिए. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि मिश्रा को आगे कोई सेवा विस्तार नहीं दिया जा सकता है.

हालांकि, सरकार ने नवंबर 2021 में दो अध्यादेश जारी किए जिसमें कहा गया था कि ईडी और सीबीआई के निदेशकों का कार्यकाल अब दो साल के अनिवार्य कार्यकाल के बाद तीन साल तक बढ़ाया जा सकता है.

अध्यादेशों में कहा गया है कि दोनों मामलों में, निदेशकों को उनकी नियुक्तियों के लिए गठित समितियों की मंजूरी के बाद तीन साल के लिए एक साल का विस्तार दिया जा सकता है, जिसके बाद मिश्रा को एक साल का सेवा विस्तार दिया गया था.

प्रवर्तन निदेशालय केंद्रीय वित्त मंत्रालय के तहत कार्य करता है.

उल्लेखनीय है कि संजय कुमार मिश्रा विपक्ष के नेताओं के खिलाफ कई मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों को भी देख रहे हैं. 2020 में उनके सेवा विस्तार के समय द वायर  ने एक रिपोर्ट में बताया था कि कम से कम ऐसे सोलह मामले, जो विपक्ष के विभिन्न दलों के नेताओं से जुड़े हुए थे, मिश्रा की अगुवाई में ईडी उनकी जांच कर रही है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)