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इंदौर के लॉ कॉलेज में कथित विवादित किताब पढ़ाए जाने पर एफ़आईआर, प्रिंसिपल का इस्तीफ़ा

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का आरोप है कि क़ानून के विद्यार्थियों को पढ़ाई जा रही इस किताब में हिंदू समुदाय और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ख़िलाफ़ बेहद आपत्तिजनक बातें लिखी गई हैं, जिनसे धार्मिक कट्टरता को बल मिलता है. एफ़आईआर किताब की लेखक डॉ. फ़रहत ख़ान, प्रकाशक अमर लॉ पब्लिकेशन, प्रिंसिपल डॉ. इनामुर्रहमान और संस्थान के प्रोफेसर मिर्ज़ा मोजिज बेग के ख़िलाफ़ दर्ज की गई है.

(फोटो साभार: फेसबुक)

इंदौर: मध्य प्रदेश के इंदौर शहर स्थित शासकीय नवीन विधि महाविद्यालय (Government New Law College) में एक विवादित किताब पढ़ाए जाने को लेकर पुलिस ने इसकी लेखक और प्रकाशक के साथ ही संस्थान के प्रिंसिपल और एक प्रोफेसर के खिलाफ शनिवार को एफआईआर दर्ज की है.

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) का आरोप है कि कानून के विद्यार्थियों को पढ़ाई जा रही इस किताब में हिंदू समुदाय और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक बातें लिखी गई हैं, जिनसे धार्मिक कट्टरता को बल मिलता है.

भंवरकुआं पुलिस थाने के प्रभारी शशिकांत चौरसिया ने बताया कि ‘सामूहिक हिंसा एवं दांडिक न्याय पद्धति’ के शीर्षक वाली पुस्तक की लेखक डॉ. फरहत खान, प्रकाशक अमर लॉ पब्लिकेशन, संस्थान के प्रिंसिपल डॉ. इनामुर्रहमान और संस्थान के प्रोफेसर मिर्जा मोजिज बेग के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है.

उन्होंने बताया कि यह एफआईआर शासकीय नवीन विधि महाविद्यालय के एक विद्यार्थी की शिकायत पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153ए (धर्म के आधार पर दो समूहों के बीच वैमनस्य फैलाना), 295ए (किसी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के इरादे से जान-बूझकर किए गए विद्वेषपूर्ण कार्य) और अन्य संबद्ध प्रावधानों के तहत दर्ज की गई है.

अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इंदौर के पुलिस आयुक्त को शनिवार सुबह ही निर्देश दिया था कि हिंदी में लिखी गई विवादित किताब के मामले की जांच के बाद एफआईआर दर्ज की जाए.

एफआईआर दर्ज किए जाने से पहले एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने शासकीय नवीन विधि महाविद्यालय में विवादित किताब के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी की थी. इस दौरान परिसर में पुलिस बल भी तैनात था.

महाविद्यालय में एबीवीपी की इकाई के अध्यक्ष दीपेंद्र सिंह ठाकुर ने बताया कि डॉ. फरहत खान की किताब ‘सामूहिक हिंसा एवं दांडिक न्याय पद्धति’ में हिंदू समुदाय, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, दुर्गा वाहिनी जैसे संगठनों के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक बातें लिखी गई हैं.

उन्होंने दावा किया कि ‘धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा देने वाली’ यह किताब महाविद्यालय के पुस्तकालय में पिछले पांच वर्षों से विद्यार्थियों को पढ़ाई जा रही है और पुस्तक को लेकर विवाद खड़ा होने के बाद महाविद्यालय प्रबंधन ने इसे पुस्तकालय से आनन-फानन में हटवा दिया.

उधर, किताब के इंदौर स्थित प्रकाशक अमर लॉ पब्लिकेशन के हितेश खेत्रपाल ने कहा, ‘इस किताब का पहला संस्करण वर्ष 2015 में छापा गया था. 2021 में इसके विवादित अंशों के बारे में पता चलने पर हमने इसकी लेखक डॉ. फरहत खान से चर्चा कर किताब के संबंधित पेज बदलवा दिए थे.’

खेत्रपाल के मुताबिक विवादित अंशों को लेकर किताब की लेखक पहले ही ‘माफीनामा’ दे चुकी हैं.

इस बीच विवाद बढ़ने पर महाविद्यालय के प्रिंसिपल डॉ. इनामुर्रहमान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया.

उच्च शिक्षा निदेशालय को अपना इस्तीफा भेजने के बाद टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में रहमान ने कहा, ‘कॉलेज के छात्रों और अज्ञात बाहरी लोगों के विरोध से मुझे गहरा दुख हुआ है. मैंने कॉलेज के विकास के लिए जो कुछ भी किया है, उसके बाद भी यह हुआ. सभी आरोप निराधार और असत्य हैं और इससे मुझे बहुत दुख पहुंचा है.’

रहमान ने कहा, ‘एलएलएम का एक विषय है, जिसका नाम है ‘सामूहिक हिंसा एवं दांडिक न्याय पद्धति’. यह देखते हुए कि इके लिए कोई पाठ्यक्रम निर्धारित नहीं है छात्र उन विषयों पर कोई भी पुस्तक चुन सकते हैं. मुझे 2019 में प्रिंसिपल नियुक्त किया गया था और यह पुस्तक 2014 से लाइब्रेरी में है.’

उच्च शिक्षा विभाग की अतिरिक्त निदेशक किरण सलूजा ने बताया कि प्रिंसिपल ने महकमे के आयुक्त को भेजे इस्तीफे में कहा है कि वह महाविद्यालय के विद्यार्थियों और बाहर के अज्ञात लोगों के आंदोलन से ‘आहत’ हैं और इस घटनाक्रम के बाद ‘विवश होकर’ पद छोड़ रहे हैं.

महाविद्यालय में धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा दिए जाने को लेकर एबीवीपी के आरोपों पर सलूजा ने कहा, ‘महाविद्यालय में लगातार नारेबाजी और हंगामे के कारण हमारी विद्यार्थियों से बात नहीं हो सकी है. संभवत: सोमवार से इन आरोपों की जांच शुरू होगी.’

गौरतलब है कि महाविद्यालय में विवाद की शुरुआत बृहस्पतिवार (01 दिसंबर) को हुई, जब एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने ये गंभीर आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया कि संस्थान के कुछ शिक्षक नए विद्यार्थियों के बीच धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा दे रहे हैं और उनके मन में देश की सरकार तथा सेना को लेकर नकारात्मक बातें भर रहे हैं.

एबीवीपी ने अपनी शिकायत में यह आरोप भी लगाया था कि हर शुक्रवार को महाविद्यालय के प्रिंसिपल, मुस्लिम शिक्षक और इस समुदाय के छात्र-छात्रा मस्जिद में नमाज पढ़ने जाते हैं और इस वक्त कक्षाएं नहीं लगती हैं. महाविद्यालय परिसर में लव जिहाद को बढ़ावा दिए जाने और मांस खाए जाने का भी आरोप है.

हंगामे के बाद महाविद्यालय के तत्कालीन प्रिंसिपल डॉ. इनामुर्रहमान ने बृहस्पतिवार को कहा था कि उन्होंने छह प्रोफेसरों को शैक्षणिक कार्य से पांच दिन के लिए हटा दिया है और जिला न्यायालय के किसी अवकाशप्राप्त न्यायाधीश से इन आरोपों की जांच का निर्णय किया है.

दैनिक भास्कर के मुताबिक, धार्मिक कट्टरता फैलाने और अनुशासनहीनता संबंधी आरोपों का सामना कर रहे शिक्षकों के नाम प्रोफेसर अमीक खोखर, डॉ. मिर्जा मोजिज बेग, डॉ. फिरोज अहमद मीर, प्रोफेसर सुहैल अहमद वाणी, प्रोफेसर मिलिंद कुमार गौतम और डॉ. पूर्णिमा बीसे हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)