उत्तराखंड: काली नदी के किनारे सुरक्षा दीवार बना रहे भारतीय श्रमिकों पर नेपाल से पत्थर फेंके गए

घटना 19 दिसंबर को पिथौरागढ़ ज़िले के धारचूला में हुई. सीमा पार से काली नदी के किनारे एक सुरक्षा दीवार का निर्माण कर रहे भारतीय कामगारों पर पथराव की यह दूसरी घटना थी. इससे पहले ऐसी एक कथित घटना चार दिसंबर को हुई थी. 

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The Mahakali is a transboundary river that forms the border between India (Uttarakhand) and Nepal. Credit: Sumit Mahar

घटना 19 दिसंबर को पिथौरागढ़ ज़िले के धारचूला में हुई. सीमा पार से काली नदी के किनारे एक सुरक्षा दीवार का निर्माण कर रहे भारतीय कामगारों पर पथराव की यह दूसरी घटना थी. इससे पहले ऐसी एक कथित घटना चार दिसंबर को हुई थी.

नेपाल और भारत के बीच बहने वाली काली नदी. (फोटो साभार: सुमित मेहार)

पिथौरागढ़: उत्तराखंड में भारत और नेपाल के बीच काली नदी के किनारे एक सुरक्षा दीवार का निर्माण कर रहे भारतीय श्रमिकों पर सीमा पार से पथराव किया गया, जिसके बाद पिथौरागढ़ जिला प्रशासन ने इस मुद्दे को नेपाली प्राधिकारियों के समक्ष उठाया. एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी.

जिला मजिस्ट्रेट रीना जोशी ने बताया कि यह घटना सोमवार (19 दिसंबर) को पिथौरागढ़ जिले के धारचूला में हुई. उन्होंने बताया कि पथराव करने वालों ने नारेबाजी भी की.

जोशी ने बताया कि उन्होंने इस घटना के बारे में नेपाली प्राधिकारियों से बात की है और उन्होंने इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है.

सीमा पार से भारतीय कामगारों पर पथराव की यह दूसरी घटना थी. इससे पहले ऐसी एक कथित घटना चार दिसंबर को हुई थी.

घटखोला इलाके में दीवार निर्माण का काम कर रहे भारतीयों पर नेपाल के कुछ ‘बदमाशों’ ने चार दिसंबर को पत्थर फेंके थे. इससे दोनों देशों के लोगों के बीच तनाव पैदा हो गया था और भारतीय व्यापारियों ने लगभग दो घंटे तक नेपाल के साथ लगती सीमा पर पुल को अवरुद्ध कर दिया था.

घटखोला में 2013 में आई भीषण बाढ़ के बाद काली नदी के तट पर सुरक्षा दीवार बनाने की आवश्यकता पड़ी.

स्थानीय निवासियों ने बताया कि वे (हमलावर) चार दिसंबर को भारतीय कामगारों पर पथराव करने वाले नेपाली ‘बदमाशों’ के खिलाफ भारत में दर्ज मामले को वापस लेने की मांग कर रहे हैं.

उन्होंने आरोप लगाया कि पथराव करने वाले लोग कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट) के विप्लव गुट से जुड़े हुए हैं और उनकी मंशा नदी किनारे निर्माण कार्य को बाधित करना है.

अधिकारियों ने पहले बताया था कि नेपाली प्राधिकारी शुरू में इस आशंका के कारण सुरक्षा दीवार के निर्माण का विरोध कर रहे थे कि यह नदी के प्रवाह को नेपाल की ओर मोड़ देगा, जिससे वहां बाढ़ का खतरा बढ़ जाएगा.

भारतीय प्राधिकारियों ने यह सुनिश्चित करने के लिए सावधानी बरतने का नेपाल को आश्वासन दिया कि उसके हितों को नुकसान न पहुंचे, जिसके बाद नेपाली प्राधिकारी निर्माण की अनुमति देने पर अंतत: राजी हो गए.

सिंचाई विभाग के एक इंजीनियर ने कहा, ‘हमने 985 मीटर की सुरक्षा दीवार में से 332 मीटर की दीवार का निर्माण पहले ही पूरा कर लिया है. यदि निर्माण शांतिपूर्वक जारी रहता है, तो हम अगले मानसून की शुरुआत से पहले शेष दीवार का निर्माण कर लेंगे.’

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, बीते 4 दिसंबर नेपाली नागरिकों के समूह द्वारा किए गए पथराव की घटना में एक श्रमिक घायल हो गया था.

सीमा पर एक एसएसबी (सशस्त्र सीमा बल) अधिकारी ने बताया, ‘सोमवार की घटना बिप्लव के समर्थकों द्वारा निकाले गए एक जुलूस के दौरान हुई, जिसमें उन्होंने ‘लिंपियाधुरा, कालापानी, लिपुलेख हमारे हैं’ जैसे भारत विरोधी नारे लगाए.’

उन्होंने कहा, ‘दोनों पक्ष इस मुद्दे को सौहार्दपूर्ण ढंग से हल करने के लिए बातचीत कर रहे हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि राजनीतिक नेताओं का एक समूह है, जो अपने निहित स्वार्थों के लिए भारत के खिलाफ जनता को भड़का रहे हैं.’

अधिकारी ने यह भी दावा किया कि इन नेताओं को नेपाल पुलिस से किसी प्रकार का समर्थन प्राप्त है, जो जुलूस के दौरान मौजूद थे.

एसएसबी कमांडेंट (धारचुला) महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा, ‘नेपाल में हमारे समकक्ष, सशस्त्र पुलिस बल से एक औपचारिक विरोध दर्ज कराया गया है. इस बार भारतीय पक्ष में काम करने वाला कोई भी मजदूर घायल नहीं हुआ.’

मालूम हो कि मई 2020 में भारत के साथ सीमा विवाद के बीच नेपाल के कैबिनेट ने एक नया राजनीतिक मानत्रिच स्वीकार किया था, जिसमें लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को नेपाली क्षेत्र में दर्शाया गया था.

लिपुलेख दर्रा, नेपाल और भारत के बीच विवादित सीमा, कालापानी के पास एक दूरस्थ पश्चिमी स्थान है. भारत और नेपाल दोनों कालापानी को अपनी सीमा का अभिन्न हिस्सा बताते हैं. भारत उसे उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले का हिस्सा बताता है और नेपाल इसे धारचुला जिले का हिस्सा बताता है.

इन हिस्सों को भारत का मानचित्र लंबे समय से अपने हिस्से में दिखाता रहा है. हालांकि, नेपाल इसे 1816 की सुगौली संधि का उल्लंघन बताता रहा है.

इससे कुछ दिन पहले भारत द्वारा आठ मई 2020 को उत्तराखंड में लिपुलख दर्रे को धारचूला से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण 80 किलोमीटर लंबी सड़क को खोलने के बाद दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण हो गए थे.

रणनीतिक और सामरिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण तथा चीन की सीमा से सटे 17,000 फुट की ऊंचाई पर स्थित लिपुलेख दर्रा इस सड़क के माध्यम से अब उत्तराखंड के धारचूला से जुड़ जाएगा.

इस पर आपत्ति जताते हुए नेपाल ने कहा था कि यह ‘एकतरफा कदम’ दोनों देशों के बीच सीमा मुद्दों को सुलझाने के लिए बनी सहमति के खिलाफ है.

नेपाल ने यह कहते हुए विरोध किया था कि यह सड़क उसके क्षेत्र से होकर गुजरती है. इसके कुछ दिनों बाद नेपाल ने एक नया राजनीतिक नक्शा पेश किया था, जिस पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी. हालांकि, जून 2020 में नेपाल की संसद ने देश के नए राजनीतिक नक्शे को मंजूरी दे दी थी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)