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उत्तर प्रदेश: गोहत्या को लेकर किसान की हत्या के आरोप में 12 पुलिसकर्मियों पर मामला दर्ज

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर ज़िले का मामला. पुलिस का दावा था कि पांच सितंबर 2021 को पुलिस और कथित गो-तस्करों के बीच एक मुठभेड़ हुई थी. जवाबी फायरिंग में गो-तस्कर जीशान हैदर नक़वी के पैर में गोली लगी, जिससे उनकी मौत हो गई. वहीं परिजनों ने आरोप लगाया था कि मृतक को पुलिस घर से उठाकर ले गई और उनकी हत्या कर दी थी.

(प्रतीकात्मक फोटो साभार: फेसबुक)

सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के देवबंद थाना क्षेत्र के एक गांव में हुए कथित मुठभेड़ में एक किसान की मौत के संबंध में हाईकोर्ट के निर्देश पर स्थानीय अदालत के आदेशानुसार पुलिस के तीन सब इंस्पेक्टरों समेत 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है.

पुलिस अधीक्षक (सहारनपुर देहात) सूरज राय ने बताया कि अदालत के आदेश पर 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है और पूरे मामले की जांच कराकर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी.

पुलिस के अनुसार, पांच सितंबर 2021 को देवबंद थाना क्षेत्र के थीथकी गांव में पुलिस और कथित गो-तस्करों के बीच एक मुठभेड़ हुई थी, जिसमें रात के समय में गो-तस्करों द्वारा पुलिस पर गोली चलाई गई थी.

एक अधिकारी ने बताया कि जवाबी फायरिंग में गो-तस्कर जीशान हैदर नकवी (42 वर्ष) के पैर में गोली लगी थी. उन्होंने बताया कि पुलिस ने उन्हें इलाज के लिए जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया, जहां उनकी मौत हो गई थी.

अधिकारी के मुताबिक, पेशे से किसान जीशान की मौत को लेकर उनके परिजनों और गांव वालों में भारी नाराजगी थी, क्योंकि उनका कहना था कि वह (जीशान) एक संपन्न परिवार से ताल्लुक रखते थे और उन्हें गोकशी के फर्जी मामले में फंसाया गया था.

मृतक की पत्नी अफरोज नकवी ने अदालत में पुलिस पर जीशान की हत्या का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की थी और मुख्‍यमंत्री से भी ऑनलाइन शिकायत की थी.

अफरोज ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) की अदालत में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया था कि पांच सितंबर को वह अपने पति के साथ घर पर ही थीं, तभी पुलिस ने फोन करके जीशान को पूछताछ के नाम पर बुलाया था.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, पुलिसकर्मियों के खिलाफ केस दर्ज होने के बाद अफरोज ने कहा, ‘हमने लड़ाई जीत ली है, लेकिन लड़ाई अभी भी जारी है. मेरे पति के लिए न्याय पाने से पहले एक लंबा रास्ता तय करना है. इन पुलिसकर्मियों ने मेरे तीन बेटों को अनाथ कर दिया है, उन्हें सलाखों के पीछे होना चाहिए. जब तक उन सभी को गिरफ्तार नहीं कर लिया जाता, मैं तब तक चुप नहीं बैठूंगी.’

सहारनपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) अनिल कुमार ने बीते 20 जनवरी को पुलिस को 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था.

पुलिस ने कहा कि आरोपियों पर हत्या और आपराधिक साजिश से संबंधित आईपीसी की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है.

सहारनपुर जिले के थीथकी गांव में लगभग 40 बीघा जमीन के मालिक और समाजवादी पार्टी के नेता पूर्व राज्य मंत्री सैयद ईसा रजा के चचेरे भाई जीशान नकवी की 5 सितंबर, 2021 की रात को हत्या कर दी गई थी, जब एक पुलिस छापे के दौरान उनके दाहिने पैर में गोली मार दी गई थी.

जहां परिवार ने दावा किया था कि जीशान को उनके घर से बाहर ले जाकर गोली मार दी गई थी. वहीं पुलिस का कहना था कि उन्होंने थीथकी गांव के पास एक जंगल में गायों के वध किए जाने और जीशान के बारे में खुफिया जानकारी मिलने पर कार्रवाई की थी, जो कथित तौर पर मौके पर मौजूद थे और उनके पास एक देसी पिस्तौल थी. उन्होंने भागते समय गलती से अपने पैर में गोली मार ली थी.

पुलिस ने दावा किया था कि घटनास्थल से लगभग 250 किलोग्राम गाय का मांस बरामद किया. साथ ही जानवरों को मारने के लिए कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए उपकरण भी बरामद किए थे.

बाद में जीशान को अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई, जबकि बाकी पांच आरोपियों को जेल भेज दिया गया और गोहत्या से संबंधित आईपीसी की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया.

हालांकि, 7 सितंबर, 2021 को एसएसपी कार्यालय में दर्ज एक लिखित शिकायत में जीशान की पत्नी अफरोज ने कहा था, ‘मेरे पति घर पर थे, जब पुलिस उन्हें पास के एक खेत में ले गई और उन्हें मार डाला. मैं अपने पति के हत्यारों के लिए न्याय चाहती हूं.’

उसकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं होने पर अफरोज ने केंद्रीय और राज्य के मंत्रियों और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग सहित कई लोगों को पत्र लिखे थे. 22 फरवरी 2022 को अफरोज ने आखिरकार इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद लखनऊ खंडपीठ ने सहारनपुर अदालत को मामले को शीघ्रता से निपटाने का निर्देश दिया.

रिपोर्ट के अनुसार, बीते 20 जनवरी को पुलिस को 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने का निर्देश देते हुए सीजेएम कुमार ने कहा, ‘यह आश्चर्यजनक है कि क्षेत्र की पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि मृतक (जीशान) के खिलाफ चार मामले दर्ज किए गए थे. हैरानी की बात यह है कि चारों मामले उनकी मौत वाले दिन (5 सितंबर, 2021) दर्ज किए गए थे. पुलिस का यह कृत्य एक अवैध कार्य को कानूनी रूप में बदलने के लिए एक कवर-अप अभ्यास प्रतीत होता है.’

अदालत ने आगे कहा कि पुलिस को ‘भागते हुए अपराधियों के निचले पैर पर गोली चलानी चाहिए’, उन्हें (जीशान) पीछे से गोली मारी गई थी. गोली उनकी जांघ पर लगी थी. गोली के घाव के कारण काफी खून बहने और कोई इलाज उपलब्ध नहीं कराने की वजह से उनकी मौत हो गई थी.

सहारनपुर के एसएसपी विपिन टाडा ने कहा, ‘अदालत के निर्देश के बाद तीन सब इंस्पेक्टर और नौ कांस्टेबल समेत 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. हम सभी आरोपी पुलिसकर्मियों की वर्तमान पोस्टिंग सहित उनका विवरण एकत्र कर रहे हैं. हमने एक नई जांच भी शुरू की है.’

बीते 22 जनवरी को दर्ज एफआईआर में सब इंस्पेक्टर – यशपाल सिंह, असगर अली व ओमवीर सिंह – हेड कॉन्स्टेबल सुखपाल सिंह, कॉन्स्टेबल भरत सिंह, विपिन कुमार, प्रमोद कुमार, राजवीर सिंह (सेवानिवृत्त), नीतू यादव, देवेंद्र कुमार (सेवानिवृत्त), बृजेश (सेवानिवृत्त) व अंकित कुमार को नामजद किया गया है.

रिपोर्ट के अनुसार, गोपाली पुलिस चौकी में तैनात 53 वर्षीय हेड कांस्टेबल सुखपाल सिंह को अदालत के आदेश के कुछ घंटे बाद ही ब्रेन हैमरेज हो गया और उन्हें एक निजी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया है.

अखिलेश यादव सरकार में राज्यमंत्री रहे सपा नेता रजा ने कहा, ‘मेरे चचेरे भाई के नाम पर दो लाइसेंसी हथियार थे. ये हथियार जिले के पुलिस अधिकारियों ने विस्तृत छानबीन के बाद जारी किए थे, तो वह बिना लाइसेंस वाली पिस्तौल क्यों ले जाएगा, जैसा कि तब पुलिस दावा कर रही थी? उनकी मृत्यु के समय तक उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया गया था. हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है. हमारा परिवार काफी दबाव में था, लेकिन हमने लड़ाई जारी रखी.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)