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देश के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 80% विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी: सरकार

सरकार द्वारा जारी ग्रामीण स्वास्थ्य सांख्यिकी 2021-22 रिपोर्ट बताती है कि देश में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं देने वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में आवश्यकता की तुलना में लगभग 80% विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है, जिनमें सर्जन, प्रसूति और स्त्री रोग विशेषज्ञ,  फिजिशियन और बाल रोग विशेषज्ञ शामिल हैं.

(प्रतीकात्मक फोटो साभार: आयुष्मान भारत वेबसाइट)

 

नई दिल्ली: भारत में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में चिकित्सा विशेषज्ञों की 80% कमी है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट बताती है कि इसमें सर्जन, प्रसूति विशेषज्ञ और स्त्री रोग विशेषज्ञ,  फिजिशियन और बाल रोग विशेषज्ञ शामिल हैं.

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे का एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं जो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) के लिए रेफरल केंद्रों के रूप में काम करते हैं. इसमें एक ऑपरेशन थिएटर, एक्स-रे, लेबर रूम और प्रयोगशाला सुविधाओं के साथ 30 बेड की सुविधा दी जाती है.

न्यूनतम मानदंडों के अनुसार, एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चार विशेषज्ञ अर्थात सर्जन, जनरल फिजिशियन, प्रसूति रोग विशेषज्ञ/स्त्री रोग विशेषज्ञ और बाल रोग विशेषज्ञ होने चाहिए.

सरकार द्वारा जारी ग्रामीण स्वास्थ्य सांख्यिकी- 2021-22 से पता चलता है कि 31 मार्च, 2022 तक देश में 6,064 सीएचसी- ग्रामीण क्षेत्रों में 5,480 और शहरी क्षेत्रों में 584- काम कर रहे हैं. हालांकि सीएचसी में विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या 2005 के 3,550 से बढ़कर 2022 में 4,485 हो गई है, लेकिन दस्तावेज़ बताते हैं कि 83% सर्जन, 74% प्रसूति और स्त्री रोग विशेषज्ञ, 79% जनरल फिजिशियन और 82% बाल रोग विशेषज्ञों की कमी है.

इसमें कहा गया है, ‘कुल मिलाकर, मौजूदा सीएचसी की जरूरतों की तुलना में वहां 79.5% विशेषज्ञों की कमी है.’

पीएचसी ग्रामीण समुदाय और चिकित्सा अधिकारी के बीच पहला संपर्क बिंदु है. ग्रामीण स्वास्थ्य सांख्यिकी 2021-22 की रिपोर्ट के अनुसार, पीएचसी में पैरामेडिकल और अन्य कर्मचारियों के साथ एक चिकित्सा अधिकारी भी होता है. रिपोर्ट के अनुसार, पीएचसी के मामले में स्वास्थ्य सहायकों (पुरुष + महिला) की 74.2% कमी है.

इसमें यह भी बताया गया है, ‘पीएचसी में एलोपैथिक डॉक्टरों के लिए अखिल भारतीय स्तर पर कुल आवश्यकता की तुलना में 3.1% की कमी है. ऐसा मुख्य रूप से ओडिशा (298), छत्तीसगढ़ (279) और कर्नाटक (60) जैसे राज्यों में पीएचसी में डॉक्टरों की कमी चलते है. एलोपैथिक डॉक्टरों के अलावा पीएचसी में 8,473 आयुष डॉक्टर उपलब्ध हैं.’