कर्नाटक में भाजपा सरकार ने विदेशी कंपनियों की लॉबिंग के बाद श्रम क़ानूनों को बदला: रिपोर्ट

एक रिपोर्ट के मुताबिक, फॉक्सकॉन और ऐप्पल सहित भारतीय उद्योग लॉबी समूहों और विदेशी कंपनियों के ‘बहुत सारे इनपुट’ के बाद कर्नाटक सरकार ने अपने श्रम क़ानून में संशोधन किया है. संशोधन करने से पहले किसी भी श्रमिक समूह या ट्रेड यूनियन से परामर्श किया गया था या नहीं, इसका कोई उल्लेख नहीं है.

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बसवराज बोम्मई. (फोटो: पीटीआई)

एक रिपोर्ट के मुताबिक, फॉक्सकॉन और ऐप्पल सहित भारतीय उद्योग लॉबी समूहों और विदेशी कंपनियों के ‘बहुत सारे इनपुट’ के बाद कर्नाटक सरकार ने अपने श्रम क़ानून में संशोधन किया है. संशोधन करने से पहले किसी भी श्रमिक समूह या ट्रेड यूनियन से परामर्श किया गया था या नहीं, इसका कोई उल्लेख नहीं है.

बसवराज बोम्मई. (फाइल फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: एप्पल फोन बनाने वाली ताइवानी कंपनी फॉक्सकॉन द्वारा की गई लॉबिंग से कर्नाटक में भाजपा की राज्य सरकार द्वारा श्रम कानूनों में बड़े बदलाव किए गए हैं. इस संबंध में द फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट में जानकारी दी गई है.

विदेशी कंपनी द्वारा की गई सफल लॉबिंग का मतलब है कि राज्य में दो शिफ्ट में उत्पादन हो सकता है, जैसा कि कंपनी चीन में अपनी मुख्य विनिर्माण में इकाई में करती है.

कर्नाटक राज्य विधानसभा ने बीते 1 मार्च को एक श्रम कानून पारित किया, जो 12 घंटे की शिफ्ट में उत्पादन की अनुमति देता है और महिलाओं को भी रात में काम करने की अनुमति देता है.

अन्य परिवर्तनों के बीच इसने तीन दिन की छुट्टी लेने से पहले लगातार चार दिनों तक एक कर्मचारी के वैध काम के घंटों को नौ से बढ़ाकर 12 कर दिया है. स्वीकार्य ओवरटाइम घंटे तीन महीने की अवधि में 75 से बढ़ाकर 145 कर दिए गए हैं, लेकिन अधिकतम काम के घंटों की सीमा 48 घंटे प्रति सप्ताह तय की गई है.

इसके अलावा कानून महिलाओं को शाम 7 बजे से सुबह 6 बजे के बीच काम करने की अनुमति देता है, बशर्ते नियोक्ताओं को कुछ सुरक्षा उपायों को लागू करना होगा, जैसे कि सीसीटीवी और जीपीएस से लैस परिवहन सुविधाएं.

जहां नए कानूनों से अधिक अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के कर्नाटक में विनिर्माण इकाई स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित होने की उम्मीद है, वहीं कोलार के विस्ट्रॉन इकाई में पिछले श्रमिक उपद्रव से पता चलता है कि श्रम कानूनों के नियमों का उल्लंघन कर्मचारियों को रोजगार हड़ताल करने के लिए प्रेरित करता है.

एक सरकारी जांच रिपोर्ट के अनुसार, कर्मचारियों को उनके काम के घंटों के अनुसार भुगतान नहीं किया गया था.

अखबार के मुताबिक, फॉक्सकॉन और ऐप्पल सहित भारतीय उद्योग लॉबी समूहों और विदेशी कंपनियों के ‘बहुत सारे इनपुट’ के बाद कर्नाटक ने अपने श्रम कानून में संशोधन किया था. इन परिवर्तनों को करने से पहले किसी भी श्रमिक समूह या ट्रेड यूनियन से परामर्श किया गया था या नहीं, इसका कोई उल्लेख नहीं है.

फॉक्सकॉन, जो वर्तमान में तमिलनाडु में एक संयंत्र में आईफोन बनाती है, कर्नाटक और तेलंगाना में नई इकाइयों के लिए दोनों राज्य सरकारों से जुड़ी है.

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने घोषणा की कि एप्पल फोन कर्नाटक में 300 एकड़ के एक नए कारखाने में निर्मित किए जाएंगे. हालांकि, कंपनी ने इस बात से इनकार किया कि उसने इन राज्यों में ऐप्पल उपकरणों के निर्माण के लिए कोई दृढ़ प्रतिबद्धता या अंतिम योजना बनाई है.

ऐप्पल का भारत में अपने परिचालन का विस्तार करने का प्रस्ताव चीन के झेंगझोऊ में फॉक्सकॉन के सबसे बड़े कारखाने में बड़ा श्रमिक विरोध पनपने के कारण आपूर्ति में व्यवधान की पृष्ठभूमि के बीच आया है. देरी से बोनस भुगतान, काम करने की खराब स्थिति और खाद्य आपूर्ति की कमी जैसे मुद्दों से के चलते विरोध भड़क गया था.

ऐप्पल के आईफोन भारत में दो प्रतिद्वंद्वी ताइवानी अनुंबध निर्माताओं पेगाट्रॉन और विस्ट्रॉन द्वारा संचालित संयंत्रों में असेंबल किए जाते हैं.

इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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