असम: हिमंता बिस्वा शर्मा के मुख्यमंत्री बनने के बाद पुलिस हिरासत में 66 की मौत, 158 घायल

असम विधानसभा में पूछे गए एआईयूडीएफ विधायक अशरफुल हुसैन के एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री शर्मा ने यह जानकारी दी है. बीते 24 फरवरी को राज्य के उदलगुरी ज़िले में एक पुलिस एनकाउंटर में डकैत होने के संदेह में एक व्यक्ति की मौत की सीआईडी जांच ने पुष्टि की कि यह ‘ग़लत पहचान’ का मामला था. मृतक एक किसान थे.

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असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा. (फोटो: पीटीआई)

असम विधानसभा में पूछे गए एआईयूडीएफ विधायक अशरफुल हुसैन के एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री शर्मा ने यह जानकारी दी है. बीते 24 फरवरी को राज्य के उदलगुरी ज़िले में एक पुलिस एनकाउंटर में डकैत होने के संदेह में एक व्यक्ति की मौत की सीआईडी जांच ने पुष्टि की कि यह ‘ग़लत पहचान’ का मामला था. मृतक एक किसान थे.

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: हिमंता बिस्वा शर्मा के मई 2021 में असम का मुख्यमंत्री बनने के बाद पुलिस हिरासत में 66 लोगों की मौत हुई और 158 अन्य के घायल होने की सूचना है.

एआईयूडीएफ विधायक अशरफुल हुसैन के एक सवाल के लिखित जवाब में मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि 10 मई, 2021 और 28 फरवरी, 2023 के बीच पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में 35 आरोपी मारे गए और 12 अन्य घायल हुए हैं.

उन्होंने आगे कहा कि इसके अलावा पुलिस फायरिंग में 26 लोग मारे गए और 146 अन्य घायल हो गए.

द वीक में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के गृह विभाग का प्रभार भी संभाल रहे मुख्यमंत्री ने कहा, ‘इनके अलावा पांच आरोपी एक दुर्घटना में मारे गए, जब उन्होंने पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश की.’

राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस के दौरान एआईयूडीएफ विधायक अमीनुल इस्लाम ने पूछा कि पुलिस बल ‘इतना अक्षम’ क्यों हो गया है कि हर बार जब कोई आरोपी भाग जाता है, तो उसे गोली मार दी जाती है.

उन्होंने कहा, ‘सरकार फर्जी एनकाउंटर कर रही है. केनाराम बासुमतारी और कीर्ति कमल बोरा के मामले साबित करते हैं कि असम में फर्जी एनकाउंटर हो रहा है. राज्यपाल को यह पता होना चाहिए.’

मालूम हो कि असम के उदलगुरी जिले में बीते 24 फरवरी को एक पुलिस मुठभेड़ में डकैत होने के संदेह में एक व्यक्ति की मौत की सीआईडी जांच ने पुष्टि की कि यह ‘गलत पहचान’ का मामला था.

जांच के बाद पता चला कि मृतक डकैत केनाराम बोरो उर्फ केनाराम बासुमतारी नहीं था, बल्कि डिंबेश्वर मुचाहारी के रूप में पहचाने जाने वाले व्यक्ति थे, जिनके परिवार ने दावा किया था कि वह ‘किसान’ थे, लेकिन पुलिस ने दावा किया कि वह ‘खूंखार अपराधी’ थे.

इसके अलावा छात्र नेता कीर्ति कमल बोरा, जिन पर कथित रूप से ड्रग तस्करी में शामिल होने का आरोप था, पिछले साल 22 जनवरी को पुलिस की गोलीबारी में घायल हो गए थे, इस घटना को विपक्षी दलों और सामाजिक समूहों ने राज्य में प्रचलित ‘पुलिस राज’ का प्रभाव बताया था.

तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव पबन कुमार बोरठाकुर के नेतृत्व वाले एक सदस्यीय आयोग ने पाया था कि इसमें गोलीबारी में शामिल पुलिस अधिकारियों की गलती थी, बोरा ने घटना के समय किसी तरह का ड्रग्स अपने पास नहीं रखा था.

जून 2022 में असम सरकार ने गुवाहाटी हाईकोर्ट को बताया था कि मई 2021 में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा के कार्यभार संभालने के बाद 13 महीनों में पूरे राज्य में पुलिस कार्रवाई या मुठभेड़ की कुल 161 घटनाएं हुईं, जिनमें 51 आरोपियों की मौत हो गई और 139 अन्य घायल हो गए.

हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका पर सुनवाई भी चल ​रही है, जिसमें अदालत की निगरानी में किसी स्वतंत्र एजेंसी से मुठभेड़ों की जांच कराने का अनुरोध किया गया है.

गौरतलब है कि वकील आरिफ मोहम्मद यासीन जवादर ने पिछले साल हिमंता बिस्वा शर्मा के नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता में आने के बाद से हुई कई मुठभेड़ों को लेकर असम पुलिस के खिलाफ राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) में शिकायत दर्ज कराई थी.

बता दें कि हिमंता बिस्वा शर्मा के मुख्यमंत्री बनने के बाद असम पुलिस ने ड्रग तस्करों और मवेशी चोरों/तस्करों और अपराधियों के खिलाफ अपना अभियान तेज कर दिया था. उन्होंने विशेष रूप से ड्रग्स के खिलाफ एक ऑपरेशन शुरू किया था.

राज्य में मई 2021 के बाद कई संदिग्ध उग्रवादी और अपराधी मुठभेड़ में मारे गए थे, क्योंकि कथित तौर पर उन्होंने हिरासत से भागने का प्रयास किया, वहीं बलात्कार के आरोपियों और पशु तस्करों सहित कई अन्य मुठभेड़ में जख्मी हुए थे.