डीयू ने बीबीसी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग करने वाले दो छात्रों पर एक साल का प्रतिबंध लगाया

गुजरात दंगों में नरेंद्र मोदी की संलिप्तता का दावा करने वाली बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री पर भारत सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन बीते 27 जनवरी को सरकार के इस क़दम के ख़िलाफ़ दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों ने परिसर में डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग की थी.

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दिल्ली यूनिवर्सिटी. (फोटो: विकीमीडिया)

गुजरात दंगों में नरेंद्र मोदी की संलिप्तता का दावा करने वाली बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री पर भारत सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन बीते 27 जनवरी को सरकार के इस क़दम के ख़िलाफ़ दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों ने परिसर में डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग की थी.

दिल्ली यूनिवर्सिटी. (फोटो: विकीमीडिया)

नई दिल्ली: गुजरात दंगों पर आधारित बीबीसी की प्रतिबंधित डॉक्यूमेट्री की स्क्रीनिंग का प्रयास करने वाले दो छात्रों पर दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) ने एक साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है, इनमें एक कांग्रेस की युवा इकाई के नेता भी हैं.

इंडिया डॉट कॉम के मुताबिक, प्रतिबंध झेलने वाले छात्रों की पहचान मानव शास्त्र विभाग के पीएचडी स्कॉलर लोकेश चुघ और कानून संकाय के रविंदर के रूप में हुई है.

10 मार्च की विज्ञप्ति के अनुसार, इस अवधि के दौरान छात्रों को किसी भी परीक्षा में भाग लेने की अनुमति नहीं होगी.

समाचार एजेंसी पीटीआई ने एक अधिकारी के हवाले से बताया है कि छह और छात्रों को भी 27 जनवरी के कार्यक्रम में उनकी कथित संलिप्तता के लिए ‘कम सख्त’ सजा दी गई है. हालांकि, अधिकारियों ने यह नहीं बताया कि इन छह छात्रों को क्या सजा दी गई है.

अधिकारी ने बताया, ‘हमने दो छात्रों पर रोक लगा दी है और छह छात्रों को कम कठोर सजा दी गई है. हमने कई छात्रों के अभिभावकों के भी बुलाया है. आने वाले दिनों मे अधिक कार्रवाई की जा सकती है.’

विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘प्रतिबंधित बीबीसी डॉक्यूमेंट्री के प्रदर्शन में भागीदारी करना लोकेश चुघ की ओर से की गई अनुशासनहीनता है.’

विज्ञप्ति में लिखा है, ‘समिति की सिफारिशों के आधार पर लोकेश द्वारा दिखाई गई उपरोक्त अनुशासनहीनता का संज्ञान लेते हुए अनुशासनात्मक अधिकारी ने उन्हें किसी भी विश्वविद्यालय या कॉलेज या विभागीय परीक्षा या परीक्षाओं में एक साल के लिए प्रतिबंधित करने की सजा देने का फैसला लिया है.’

मालूम हो कि बीबीसी की ‘इंडिया: द मोदी क्वेश्चन’ डॉक्यूमेंट्री में बताया गया था कि ब्रिटेन सरकार द्वारा करवाई गई गुजरात दंगों की जांच (जो अब तक अप्रकाशित रही है) में नरेंद्र मोदी को सीधे तौर पर हिंसा के लिए जिम्मेदार पाया गया था.

साथ ही, इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देश के मुसलमानों के बीच तनाव की भी बात कही गई थी. यह 2002 के फरवरी और मार्च महीनों में गुजरात में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक हिंसा में उनकी भूमिका के संबंध में दावों की पड़ताल भी करती है, जिसमें एक हजार से अधिक लोगों की जान चली गई थी.

दो भागों की डॉक्यूमेंट्री का दूसरा एपिसोड, केंद्र में मोदी के सत्ता में आने के बाद – विशेष तौर पर 2019 में उनके दोबारा सत्ता में आने के बाद – मुसलमानों के खिलाफ हिंसा और उनकी सरकार द्वारा लाए गए भेदभावपूर्ण कानूनों की बात करता है. इसमें मोदी को ‘बेहद विभाजनकारी’ बताया गया है.

केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने बीते 21 जनवरी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर और यूट्यूब को ‘इंडिया: द मोदी क्वेश्चन’ नामक डॉक्यूमेंट्री के लिंक ब्लॉक करने का निर्देश दिया था. इस बीच, देश के विभिन्न राज्यों के कैंपसों में डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर विवाद हुआ था.

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