झारखंड: एक शिक्षक वाले स्कूलों के ख़िलाफ़ अभिभावकों और छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया

झारखंड के लातेहार ज़िले में अभिभावकों और छात्रों ने एक शिक्षक स्कूलों वाले के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर शिक्षा के अधिकार अधिनियम के अनुसार शिक्षकों की पोस्टिंग की मांग की. इस अधिनियम के तहत प्रत्येक स्कूल में कम से कम दो शिक्षक और प्रत्येक 30 बच्चों के लिए कम से कम एक शिक्षक होना चाहिए.

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लातेहार जिले में गारू प्रखंड के 16 गांवों के माता-पिता और बच्चों ने एकल-शिक्षक स्कूलों के खिलाफ प्रदर्शन किया. (फोटो साभार: ट्विटर/@roadscholarz)

झारखंड के लातेहार ज़िले में अभिभावकों और छात्रों ने एक शिक्षक स्कूलों वाले के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर शिक्षा के अधिकार अधिनियम के अनुसार शिक्षकों की पोस्टिंग की मांग की. इस अधिनियम के तहत प्रत्येक स्कूल में कम से कम दो शिक्षक और प्रत्येक 30 बच्चों के लिए कम से कम एक शिक्षक होना चाहिए.

लातेहार जिले में गारू प्रखंड के 16 गांवों के अभिभावक और बच्चों ने एकल-शिक्षक स्कूलों के खिलाफ प्रदर्शन किया. (फोटो साभार: ट्विटर/@roadscholarz)

नई दिल्ली: झारखंड के लातेहार जिले में बीते 13 अप्रैल को लगभग 100 अभिभावकों और छात्रों ने एकल-शिक्षक स्कूलों के खिलाफ प्रदर्शन किया और शिक्षा के अधिकार (आरटीई) अधिनियम के अनुसार शिक्षकों की पोस्टिंग की मांग की.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जिले के गारू प्रखंड के 16 गांवों के माता-पिता और बच्चे प्रखंड मुख्यालय में एकत्र हुए और ‘क्या चाहता है लातेहार? शिक्षा का अधिकार! बच्चों की पुकार, टीचर दे सरकार!’ नारों के साथ एक रैली निकाली.

संयुक्त ग्राम सभा मंच गारू के बैनर तले विभिन्न गांवों के ग्राम प्रधानों, स्कूल समिति सदस्यों और बच्चों के अभिभावकों ने शिक्षा की परिदृश्य को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक पत्र भेजा. प्रसिद्ध अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज भी विरोध मार्च का हिस्सा थे.

पत्र में कहा गया है, ‘इस ब्लॉक में सभी प्राथमिक विद्यालयों में से लगभग आधे में एक ही शिक्षक है. क्या आप (मुख्यमंत्री) जानते हैं कि यह शिक्षा के अधिकार अधिनियम का घोर उल्लंघन है? इस अधिनियम के तहत प्रत्येक स्कूल में कम से कम दो शिक्षक और प्रत्येक 30 बच्चों के लिए कम से कम एक शिक्षक होना चाहिए.’

पत्र में कहा गया है, ‘एकल-शिक्षक स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना असंभव है. शिक्षक के अनुपस्थित रहने या रिकॉर्ड रखने में व्यस्त होने पर बच्चों को उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है. यहां तक कि जब शिक्षक उपलब्ध होता है, तब भी वह अपने दम पर पांच अलग-अलग ग्रेड के बच्चों को कैसे पढ़ा सकता है? गारू में एकल-शिक्षक स्कूलों में औसतन 48 छात्र हैं. उनमें से एक में 145 छात्र हैं.’

गारू के 40 सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में से 17 में एक ही शिक्षक है. दो माध्यमिक विद्यालयों में भी एक शिक्षक है. आरटीई अधिनियम के तहत प्रत्येक प्राथमिक विद्यालय में कम से कम दो शिक्षक और प्रत्येक 30 बच्चों के लिए कम से कम एक शिक्षक होना चाहिए. एकल शिक्षक स्कूल अवैध हैं.

यह समस्या केवल गारू प्रखंड तक ही सीमित नहीं है. शिक्षा के लिए एकीकृत जिला सूचना प्रणाली (यूडीआईएसई) के आंकड़ों के अनुसार, पूरे झारखंड में लगभग 30 प्रतिशत सरकारी प्राथमिक विद्यालय एकल-शिक्षक स्कूल हैं. इन स्कूलों में अधिकांश छात्र निम्न-आय वाले परिवारों और हाशिये के समुदायों से हैं.

रुद गांव की एक मिडिल स्कूल की छात्रा पूनम कुमारी ने कहा कि उनके स्कूल में 145 छात्रों के लिए केवल एक शिक्षक है, कई विषयों को पढ़ाने के लिए कम से कम छह और शिक्षकों की आवश्यकता है.

गोटग गांव के अभिभावक संदीप उरांव ने पत्रकारों को बताया कि उनके बच्चों के स्कूल में एक ही शिक्षक है, जो अक्सर प्रशासन से जुड़े कार्यों में व्यस्त रहते हैं. उन्होंने कहा, ‘इस वह से स्कूल में कई दिनों तक पढ़ाई ही नहीं हो पाती है.’

लाटू, डेरगांव और जयगीर के अभिभावकों ने भी अपने बच्चों के स्कूलों की स्थिति पर चर्चा की और आरटीई के तहत तत्काल जांच और स्कूली शिक्षकों की संख्या बढ़ाने की मांग की.