विवादित ‘फैक्ट-चेक इकाई’ का नेतृत्व इलेक्ट्रॉनिक्स-आईटी मंत्रालय के अधिकारी करेंगे: रिपोर्ट

नए सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) संशोधन नियम-2023 में मोदी सरकार ने स्वयं को एक ‘फैक्ट-चेकिंग इकाई’ गठित करने की शक्ति दी है, जिसके पास यह निर्धारित करने के लिए व्यापक शक्तियां होंगी कि केंद्र से जुड़े किसी भी मामले के संबंध में क्या ‘फ़र्ज़ी या ग़लत या भ्रामक’ जानकारी है.

/
(इलस्ट्रेशन: परिप्लब चक्रबर्ती/द वायर)

नए सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) संशोधन नियम-2023 में मोदी सरकार ने स्वयं को एक ‘फैक्ट-चेकिंग इकाई’ गठित करने की शक्ति दी है, जिसके पास यह निर्धारित करने के लिए व्यापक शक्तियां होंगी कि केंद्र से जुड़े किसी भी मामले के संबंध में क्या ‘फ़र्ज़ी या ग़लत या भ्रामक’ जानकारी है.

(इलस्ट्रेशन: परिप्लब चक्रबर्ती)

नई दिल्ली: संशोधित सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियमों के साथ पेश की गई विवादास्पद ‘फैक्ट-चेकिंग’ इकाई में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के दो अधिकारी और तीसरा सदस्य एक स्वतंत्र विशेषज्ञ होने की संभावना है. इकोनॉमिक टाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में इस संबंध में जानकारी दी है.

अप्रैल माह के शुरू में पेश किए गए गए नए सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) संशोधन नियम-2023 में नरेंद्र मोदी सरकार ने स्वयं को एक फैक्ट-चेकिंग इकाई गठित करने की शक्ति दी है, जिसके पास यह निर्धारित करने के लिए व्यापक शक्तियां होंगी कि केंद्र से जुड़े किसी भी मामले के संबंध में क्या ‘फर्जी या गलत या भ्रामक’ जानकारी है.

यह इकाई ‘मध्यस्थों’ (सोशल मीडिया साइटों समेत) को निर्देश भी जारी कर सकती है कि वह ऐसी सामग्री प्रकाशित न करें.

पत्रकार संगठनों, अधिकार कार्यकर्ताओं और इंटरनेट स्वतंत्रता पर नजर रखने वालों ने इसे सेंसरशिप की तरफ बढ़ता एक कदम बताया है.

इस नियम के एक पुराने संस्करण में प्रेस इनफॉरमेशन ब्यूरो (पीआईबी) को फैक्ट-चेकर के रूप में अधिकृत किया गया था. इसकी भी आलोचना हुई थी, शायद जिसके चलते सरकार नियमों में थोड़ा बदलाव करने के लिए प्रेरित हुई.

अप्रैल के मध्य में इंडियन एक्सप्रेस ने बताया था कि ‘फैक्ट-चेकिंग इकाई’ में सरकार के दो प्रतिनिधि और सरकार द्वारा नियुक्त दो विशेषज्ञ होंगे.

इकोनॉमिक टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में शीर्ष अधिकारियों के हवाले से कहा है कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की अगुवाई वाली इकाई ‘केवल समाचार और तथ्य-आधारित जानकारी का सत्यापन करेगी और प्रकाशनों द्वारा प्रस्तुत राय की जांच या आकलन करने का अधिकार नहीं होगा.’

यह दावा अप्रैल में केंद्र सरकार द्वारा भी किया गया था, जब उसने बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया था कि इसकी फैक्ट-चेक इकाई का उद्देश्य केवल सरकारी नीतियों और कार्यक्रमों से संबंधित झूठी और भ्रामक जानकारी को हटाना है और इंटरनेट से किसी भी राय, व्यंग्य या कलाकार के कार्य को नहीं हटाया जाएगा.

बता दें कि बॉम्बे हाईकोर्ट स्टैंडअप कॉमेडियन कुणाल कामरा की संशोधित नियमों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा है.

टीम को कथित तौर पर सामग्री हटाए जाने के आदेश के पीछे के कारणों को सार्वजनिक तौर पर बताने की भी जरूरत होगी.

वहीं, केंद्र सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट को दिए हलफनामे में वादा किया है कि वह 5 जुलाई तक ‘फैक्ट-चेक इकाई (एफसीयू)’ का गठन नहीं करेगी.

ज्ञात हो कि रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स द्वारा जारी प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में भारत 180 देशों में 161वें स्थान पर फिसल गया है. 2022 में वह 150वें पायदान पर था.

इस रिपोर्ट को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.