प्रो. तेजस्विनी की जबरन छुट्टी रद्द कर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करें: इंडियन एकेडमिक नेटवर्क

महाराष्ट्र के कोल्हापुर इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग की प्रोफेसर तेजस्विनी देसाई को कक्षा में चर्चा के दौरान ‘बलात्कार के आरोपी किसी भी धर्म या समुदाय के हो सकते हैं’ कहने पर संस्थान द्वारा अनुशासनात्मक कार्रवाई के रूप में 14 दिनों की जबरन छुट्टी पर भेज दिया गया है.

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(इलस्ट्रेशन: परिप्लब चक्रवर्ती/द वायर)

महाराष्ट्र के कोल्हापुर इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग की प्रोफेसर तेजस्विनी देसाई को कक्षा में चर्चा के दौरान ‘बलात्कार के आरोपी किसी भी धर्म या समुदाय के हो सकते हैं’ कहने पर संस्थान द्वारा अनुशासनात्मक कार्रवाई के रूप में 14 दिनों की जबरन छुट्टी पर भेज दिया गया है.

(इलस्ट्रेशन: परिप्लब चक्रबर्ती/द वायर)

नई दिल्ली: भारत के 88 शीर्ष शिक्षाविदों ने कोल्हापुर इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग की प्रोफेसर तेजस्विनी देसाई के समर्थन में एक बयान जारी किया है, जिन्हें अपनी कक्षा में सांप्रदायिक बयानों का विरोध करने के लिए उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है.

भौतिक विज्ञान की प्रोफेसर 52 वर्षीय तेजस्विनी देसाई को अपनी कक्षा में धार्मिक भेदभाव पर चर्चा के दौरान यह कहने पर कि ‘बलात्कार के आरोपी किसी भी धर्म या समुदाय के हो सकते हैं’ को लेकर उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है. इतना ही नहीं उन्हें छुट्टी पर भेज दिया गया.

उन्होंने समाचार वेबसाइट न्यूजलॉन्ड्री को बताया था कि ‘चर्चा 7 जून को हुई कोल्हापुर हिंसा पर थी. कुछ छात्रों ने कथित तौर पर छत्रपति शिवाजी की राज्याभिषेक वर्षगांठ पर उनके पहचान वाले मुस्लिम लोग औरंगजेब को लेकर वॉट्सऐप पर स्टेटस पोस्ट कर रहे थे. इसी बात से चर्चा यहां पहुंच गई, जहां कुछ विद्यार्थियों ने मुस्लिमों पर ‘बलात्कारी होने और अपने गुनाहों की सजा न पाने’ के आरोप लगाने शुरू कर दिए.’

देसाई ने कहा कि उनका मानना है कि ‘चीजें बदसूरत नहीं होनी चाहिए’ और उन्होंने अपने छात्रों से कहा कि बलात्कार किसी विशेष धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं है और बलात्कारियों का कोई धर्म या जाति नहीं होती है. उन्होंने कहा था, ‘यह जघन्य अपराध की श्रेणी में आता है.’

इसके बाद सोशल मीडिया पर उनका उत्पीड़न शुरू हुआ और पुलिस घटना की जांच करने पहुंची. उनकी टिप्पणी से संबंधित वीडियो संदर्भ से परे एडिटेड और भ्रामक क्लिप के साथ वायरल हो गए थे. फिर देसाई को उनके संस्थान द्वारा 14 दिनों के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई के रूप में जबरन छुट्टी पर भेज दिया गया है.

अपने बयान में विश्वविद्यालय के शिक्षकों और छात्रों के एक संगठन ‘इंडिया एकेडमिक फ्रीडम नेटवर्क’ ने कहा कि प्रोफेसर तेजस्विनी देसाई को परेशान और प्रताड़ित किया जा रहा है.

बयान में कहा, ‘उन्होंने जो कहा, उसे रिकॉर्ड किया गया, फिर उसके साथ छेड़छाड़ (Doctored) की गई और सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया, जिसके कारण उन्हें कॉलेज अधिकारियों द्वारा छुट्टी पर जाने के लिए मजबूर किया गया और उनके खिलाफ पुलिस जांच भी हुई.’

शिक्षाविदों ने कॉलेज अधिकारियों से प्रो. देसाई की जबरन छुट्टी रद्द करने, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और उन्हें सम्मानपूर्वक अपने कर्तव्यों पर लौटने में सक्षम बनाने का आह्वान किया है.

बयान के अनुसार, ‘पूरे देश में शिक्षकों पर राज्य संस्थानों और दक्षिणपंथी संगठनों के छात्र कार्यकर्ताओं द्वारा दिन-ब-दिन हमले बढ़ रहे हैं, हम मांग करते हैं कि राज्य और सभी विश्वविद्यालय/कॉलेज प्राधिकरण इस तरह की धमकियों को नियंत्रित करने और कक्षा के भीतर स्वतंत्र चर्चा के अधिकार सहित शैक्षणिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाएं.’

बयान पर हस्ताक्षर करने वाले शिक्षाविदों में यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स एमहर्स्ट की जयति घोष, दिल्ली विश्वविद्यालय की इरा राजा और नंदिता सुंदर, यॉर्क यूनिवर्सिटी कनाडा की सनोबर उमर, सीएसडीएस की अनन्या वाजपेयी, जेएनयू की निवेदिता मेनन और आयशा किदवई आदि शामिल हैं.

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