यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- अतीक़ अहमद और उनके भाई की हत्या में पुलिस की ग़लती नहीं

उत्तर प्रदेश सरकार ने विकास दुबे समेत पुलिस एनकाउंटर में हुईं मौतों और गैंगस्टर से राजनेता बने अतीक़ अहमद और उनके भाई अशरफ़ की हत्या की जांच से संबंधित याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में हलफ़नामा दाख़िल कर कहा है कि वह इन घटनाओं की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है. याचिका में सरकार के ख़िलाफ़ लगाए गए आरोप पूरी तरह से झूठे और अनुचित हैं.

अतीक अहमद और उसका भाई अशरफ. (फोटो साभार: वीडियोग्रैब)

उत्तर प्रदेश सरकार ने विकास दुबे समेत पुलिस एनकाउंटर में हुईं मौतों और गैंगस्टर से राजनेता बने अतीक़ अहमद और उनके भाई अशरफ़ की हत्या की जांच से संबंधित याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में हलफ़नामा दाख़िल कर कहा है कि वह इन घटनाओं की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है. याचिका में सरकार के ख़िलाफ़ लगाए गए आरोप पूरी तरह से झूठे और अनुचित हैं.

अतीक अहमद और उसका भाई अशरफ. (फोटो साभार: वीडियोग्रैब)

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि राज्य में हुए पुलिस एनकाउंटर की जांच में पाया गया है कि ‘पुलिस की ओर से इनमें कोई गलती नहीं’ की गई.

सरकार यह भी ने कहा है कि वह अप्रैल 2023 में गैंगस्टर से राजनेता बने अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ की हत्या की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के 11 अगस्त के निर्देश के जवाब में दायर एक स्टेटस रिपोर्ट में ये बातें कही हैं. तब शीर्ष अदालत ने सरकार से उत्तर प्रदेश में पुलिस द्वारा एनकाउंटर में की गईं हत्याओं के मुद्दे को उठाने वाली याचिकाओं में जिक्र किए गए सात मामलों में ‘जांच या मुकदमे की स्थिति’ के बारे में हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा था.

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी बताने को कहा था कि सरकार ने अदालत और विभिन्न आयोगों द्वारा जारी पिछली सिफारिशों और निर्देशों का किस हद तक अनुपालन किया है.

अदालत में दो याचिकाएं लगाई गई थीं- पहली याचिका एक वकील विशाल तिवारी ने लगाई थी, जिसमें गैंगस्टर विकास दुबे और उसके गिरोह के सदस्यों की मौत के साथ-साथ अतीक, अशरफ, अतीक के बेटे असद और गिरोह के सदस्य मोहम्मद गुलाम की हत्याओं पर सवाल उठाए गए थे और दूसरी याचिका अतीक की बहन आयशा नूरी ने लगाकर अपने भाइयों की हत्या की अदालत की निगरानी में जांच की मांग की थी.

राज्य पुलिस के खिलाफ लगे आरोपों को खारिज करते हुए यूपी सरकार के हलफनामे में कहा गया है, ‘यह प्रस्तुत किया जाता है कि याचिकाकर्ता द्वारा अपनी दलीलों में उठाई गईं सातों घटनाओं में से प्रत्येक घटना की सरकार द्वारा इस माननीय अदालत द्वारा विभिन्न फैसलों में जारी निर्देशों/दिशानिर्देशों के अनुसार पूरी तरह से जांच की गई है और जिन मामलों में जांच पूरी हो गई है, उनमें पुलिस की ओर से कोई गलती नहीं पाई गई है.’

तिवारी की याचिका में ‘विशेष रूप से’ जस्टिस (सेवानिवृत्त) बीएस चौहान आयोग की रिपोर्ट के खिलाफ शिकायतें उठाई गई थीं, जिसमें सरकार ने कहा था, ‘विकास दुबे के गिरोह के सदस्यों की मौत के मामलों में पुलिस की कार्रवाई में स्पष्ट रूप से कोई दोष नहीं पाया गया.’

यूपी सरकार ने बताया कि याचिकाकर्ता ने जस्टिस चौहान आयोग के गठन पर भी आपत्ति जताई थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था. सरकार ने कहा कि आयोग की अंतिम रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखी गई थी, जिसने उसे ‘आयोग द्वारा प्रस्तुत सिफारिशों पर उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया था.’

विकास दुबे और उसके गिरोह के सदस्यों की एनकाउंटर में हुईं मौतों के मामले में की गई कार्रवाई को रेखांकित करते हुए, मजिस्ट्रेट जांच के विवरण सहित, स्टेटस रिपोर्ट में कहा गया है, ‘इस प्रकार, जस्टिस बीएस चौहान आयोग की रिपोर्ट, जिसमें सरकार की कार्रवाई में कोई दोष न पाया गया, के अलावा आपराधिक जांच, मजिस्ट्रेट जांच और मानवाधिकार आयोग ने भी सरकार का कोई दोष नहीं पाया है.’

अतीक के बेटे असद और मोहम्मद गुलाम की मौत पर सरकार ने कहा कि आगे की जांच और मजिस्ट्रेट जांच में पुलिस की कोई गलती नहीं पाई गई और ‘इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस राजीव लोचन मेहरोत्रा की अध्यक्षता में’ दो सदस्यीय न्यायिक ‘आयोग’ द्वारा वर्तमान में मामले की जांच चल रही है.

सरकार ने बताया कि अतीक और अशरफ की हत्या की जांच के लिए अतिरिक्त डीसीपी (अपराध) की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया था और इलाहाबाद जोन के एडीजी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय पर्यवेक्षण टीम द्वारा इसकी निगरानी की जा रही है.

सरकार ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश दिलीप बाबासाहेब भोंसले की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय आयोग भी इस मामले को देख रहा है.

स्टेटस रिपोर्ट में कहा गया है, ‘इस प्रकार, सरकार ‘रिट याचिका’ में उल्लिखित घटनाओं की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है और इसमें सरकार के खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह से झूठे और अनुचित हैं.’

स्टेटस रिपोर्ट में कहा गया है, ‘पुलिस द्वारा आत्मरक्षा में की गई उन कार्रवाइयों की नियमित निगरानी होती है, जिनमें आरोपियों की मौत हो जाती है. 2017 के बाद से अब तक हुए सभी पुलिस एनकाउंटर की घटनाओं में मारे गए अपराधियों से संबंधित विवरण और जांच/पूछताछ के परिणामों का विवरण पुलिस मुख्यालय स्तर पर हर महीने एकत्र किया जाता है और जांच की जाती है.’