जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने लगभग 2 साल के बाद कश्मीरी पत्रकार फहद शाह को ज़मानत दी

कश्मीरी पत्रकार और समाचार वेबसाइट ‘द कश्मीर वाला’ के संपादक फहद शाह को पहली बार पिछले साल 4 फरवरी को सोशल मीडिया पर ‘आतंकवादी गतिविधियों का महिमामंडन’ करने और दक्षिण कश्मीर के पुलवामा ज़िले में एक मुठभेड़ की कथित ‘ग़लत रिपोर्टिंग’ करके ‘देश के ख़िलाफ़ असंतोष’ पैदा करने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था.

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फहद शाह. (फोटो साभार: ट्विटर/@pzfahad)

कश्मीरी पत्रकार और समाचार वेबसाइट ‘द कश्मीर वाला’ के संपादक फहद शाह को पहली बार पिछले साल 4 फरवरी को सोशल मीडिया पर ‘आतंकवादी गतिविधियों का महिमामंडन’ करने और दक्षिण कश्मीर के पुलवामा ज़िले में एक मुठभेड़ की कथित ‘ग़लत रिपोर्टिंग’ करके ‘देश के ख़िलाफ़ असंतोष’ पैदा करने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था.

फहद शाह. (फोटो साभार: ट्विटर/@pzfahad)

नई दिल्ली: लगभग दो साल की कैद के बाद जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट ने बीते शुक्रवार (17 नवंबर) को कश्मीरी पत्रकार और समाचार वेबसाइट ‘द कश्मीर वाला’ के संपादक फहद शाह को जमानत दे दी.

फहद पर जन सुरक्षा कानून (पीएसए) के तहत मामला दर्ज किया गया था और वह गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत भी आरोपों का सामना कर रहे थे.

समाचार वेबसाइट द कश्मीरियत की रिपोर्ट के अनुसार, हाईकोर्ट ने यूएपीए के तहत ‘आतंकवाद को बढ़ावा देने’, ‘देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने’ और ‘शत्रुता को बढ़ावा देने’ सहित उनके खिलाफ लगाए गए कई गंभीर आरोपों को खारिज कर दिया.

फहद के वकील ने द कश्मीरियत से बातचीत में कहा कि हालांकि उनको कथित तौर पर कानून के खिलाफ धन प्राप्त करने के लिए यूएपीए की धारा 18 और विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) के उल्लंघन के तहत मुकदमे का सामना करना पड़ेगा.

यूएपीए की धारा 18 में कहा गया है कि ‘जो कोई किसी आतंकवादी कृत्य की साजिश रचता है या करने का प्रयास करता है या उसकी वकालत करता है, उकसाता है, सलाह देता है या (उकसाता है, सीधे या जान-बूझकर सुविधा प्रदान करता है) किसी आतंकवादी कृत्य को अंजाम देने की तैयारी करता है, तो कारावास के तहत दंडनीय होगा, जिसकी अवधि पांच वर्ष से कम नहीं होगी, लेकिन जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है और वह जुर्माने के लिए भी उत्तरदायी होगा.’

फहद शाह को पहली बार पिछले साल 4 फरवरी को सोशल मीडिया पर ‘आतंकवादी गतिविधियों का महिमामंडन’ करने और दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले में एक मुठभेड़ की कथित ‘गलत रिपोर्टिंग’ करके ‘देश के खिलाफ असंतोष’ पैदा करने के लिए गिरफ्तार किया गया था. इस मुठभेड़ में एक शीर्ष कमांडर सहित तीन आतंकवादियों को मार गिराया गया था.

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कहा था कि फहद उन ‘सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं’ में से थे, जिनके पोस्ट ‘आतंकवादी गतिविधियों का महिमामंडन करने के समान’ हैं. पुलिस ने उन पर ‘राष्ट्र-विरोधी सामग्री’ अपलोड करने का आरोप लगाया था.

अनुच्छेद 14 में जून 2023 की एक रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें तीन मामलों में जमानत मिल गई थी, हालांकि फहद नवंबर 2011 में प्रकाशित एक ‘देशद्रोही’ और ‘अत्यधिक भड़काऊ’ लेख (गुलामी की बेड़ियां टूट जाएंगी) को लेकर अप्रैल 2022 में दर्ज की गई एफआईआर के कारण जेल में रहे.

उन पर ‘जम्मू-कश्मीर में अशांति पैदा करने, भोले-भाले युवाओं को हिंसा का रास्ता अपनाने और सांप्रदायिक अशांति पैदा करने के लिए उकसाने’ और पूरे जम्मू कश्मीर में ‘आतंकवाद और गैरकानूनी गतिविधियों को बढ़ाने’ का इरादा रखने का आरोप लगाया गया था.

जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है कि फहद का लेख 2011 में प्रकाशित हुआ था, हालांकि, आर्टिकल 14 की रिपोर्ट में कहा गया है कि एक दशक के बाद दर्ज आरोप-पत्र पर कोई स्पष्ट स्पष्टीकरण नहीं था.

शुक्रवार को उन्हें दी गई जमानत पीएसए के तहत उनकी हिरासत को रद्द करने के हाईकोर्ट के पहले के फैसले का पालन करती है, जिसमें उन्हें सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरे से जोड़ने वाले आरोपों को लेकर पर्याप्त सबूतों की कमी का हवाला दिया गया था.

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