यूजीसी ने विश्वविद्यालयों से अपने यहां पीएम मोदी की तस्वीर संग सेल्फी पॉइंट बनाने को कहा

2024 के आम चुनावों के क़रीब आते ही अपने नवीनतम पत्र में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सुझाव दिया है कि विभिन्न वि​श्वविद्यालयों और कॉलेज के कैंपस अधिकारियों को छात्रों और आगंतुकों को ‘विभिन्न क्षेत्रों में भारत की उपलब्धियों’ पर ‘सामूहिक गौरव’ की भावना पैदा करने के लिए इन पॉइंट्स पर सेल्फी लेने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए.

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(प्रतीकात्मक फोटो साभार: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग)

2024 के आम चुनावों के क़रीब आते ही अपने नवीनतम पत्र में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सुझाव दिया है कि विभिन्न वि​श्वविद्यालयों और कॉलेज के कैंपस अधिकारियों को छात्रों और आगंतुकों को ‘विभिन्न क्षेत्रों में भारत की उपलब्धियों’ पर ‘सामूहिक गौरव’ की भावना पैदा करने के लिए इन पॉइंट्स पर सेल्फी लेने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए.

(फोटो साभार: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग)

नई दिल्ली: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने 2024 के आम चुनावों के करीब आते ही देश भर के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर के साथ एक सेल्फी पॉइंट स्थापित करने के लिए लिखा है.

यूजीसी का पत्र ऐसे ही एक अन्य निर्देश के बाद आया है, जहां इसने महाराष्ट्र में उच्च शिक्षा संस्थानों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के नेता दत्ताजी डिडोलकर का जन्म शताब्दी वर्ष मनाने का आग्रह किया था.

अपने नवीनतम पत्र में यूजीसी ने सुझाव दिया है कि विभिन्न कैंपस के अधिकारियों को छात्रों और आगंतुकों को ‘विभिन्न क्षेत्रों में भारत की उपलब्धियों’ पर ‘सामूहिक गौरव’ की भावना पैदा करने के लिए इन पॉइंट्स पर सेल्फी लेने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए.

द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, कई शिक्षाविदों ने यूजीसी पर अकादमिक संस्थानों को ‘छवि-निर्माण’ (Cult-Building) की प्रक्रिया में शामिल करने का आरोप लगाया, जिसका ‘उनसे कोई लेना-देना नहीं होना चाहिए’.

यूजीसी सचिव मनीष जोशी का एक पत्र शुक्रवार (1 दिसंबर) को सभी भारतीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और सभी कॉलेजों के प्राचार्यों को भेजा गया है. इसमें कहा गया है, ‘विभिन्न क्षेत्रों में भारत की प्रगति से ली गई प्रेरणा के साथ युवाओं के दिमाग को ढालने, उनकी ऊर्जा और उत्साह का उपयोग करने का एक अनूठा अवसर है.’

पत्र में कहा गया है, ‘आइए हम आपके संस्थान के भीतर एक ‘सेल्फी पॉइंट’ स्थापित करके हमारे देश द्वारा की गई अविश्वसनीय प्रगति का जश्न मनाएं और इसका प्रसार करें. ‘सेल्फी पॉइंट’ का उद्देश्य युवाओं में विभिन्न क्षेत्रों में भारत की उपलब्धियों, विशेषकर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत नई पहलों के बारे में जागरूकता पैदा करना है.’

यहां यह ध्यान देने योग्य है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति की विश्वविद्यालयों में व्यापक रूप से आलोचना की गई थी और छात्रों और शिक्षकों ने इसके कार्यान्वयन के खिलाफ कई विरोध प्रदर्शन किए थे.

यूजीसी के निर्देश के अनुसार, कैंपस में सेल्फी पॉइंट एक रणनीतिक स्थान पर स्थापित किया जाना चाहिए और इसका 3डी लेआउट होना चाहिए. इसने शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण, विविधता में एकता, स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन, भारतीय ज्ञान प्रणाली, बहुभाषावाद और उच्च शिक्षा, अनुसंधान तथा नवाचार में भारत के उदय जैसे विभिन्न विषयों की भी सिफारिश की है.

द टेलीग्राफ ने एक शीर्ष संस्थान के एक फैकल्टी सदस्य को यह कहते हुए उद्धृत किया कि सरकार हर सामान्य उपलब्धि को शानदार रूप में चित्रित करने की कोशिश कर रही है और इसका श्रेय प्रधानमंत्री को दे रही है.

उन्होंने कहा, ‘जो कुछ हो रहा है वह एक कल्ट फीगर (व्यक्ति) के निर्माण के लिए पूर्ण प्रचार है. राज्य सार्वजनिक संस्थानों का उपयोग करके ऐसा कर रहा है, जिनका इन गतिविधियों से कोई लेना-देना नहीं है. कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिससे सरकार या यूजीसी शैक्षणिक संस्थानों को इस तरह के प्रचार को बढ़ावा देने के लिए कह सके.’

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की तस्वीरें कई चैनलों के माध्यम से प्रसारित की गई हैं, जिनमें कोविड वैक्सीन प्रमाण-पत्र भी शामिल हैं. रोजगार मेलों में सेल्फी पॉइंट स्थापित किए गए हैं, जहां नवनियुक्त सरकारी कर्मचारियों या पदोन्नत सेवारत कर्मचारियों को मोदी के कट-आउट के सामने खड़ा होना पड़ता है और तस्वीरें खींचनी पड़ती हैं.

उन्होंने आगे कहा, ‘एक धारणा बनाई जा रही है कि इन सभी गतिविधियों के लिए केवल एक ही नेता जिम्मेदार है. चुनाव को ध्यान में रखते हुए भोले-भाले मतदाताओं को गुमराह करने के लिए ऐसा किया जा रहा है.’

एक प्रबंधन शिक्षक ने बताया कि यूजीसी ऐसे सर्कुलर जारी करता रहता है, लेकिन कैंपस प्रशासन इन्हें नजरअंदाज करने के लिए स्वतंत्र हैं. उन्होंने कहा, ‘(शैक्षणिक) संस्थानों को ऐसी सलाह पर ध्यान नहीं देना चाहिए, जो चापलूस नहीं हैं, वे इस तरह की सलाह को नजरअंदाज कर पाएंगे.’

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