असम: महिलाओं से जुड़ी एक सरकारी योजना का लाभ तीन से अधिक बच्चों वाली माताओं को नहीं मिलेगा

असम सरकार ने मुख्यमंत्री महिला उद्यमिता अभियान योजना शुरू की है. सामान्य और ओबीसी श्रेणियों की महिलाएं अगर इस योजना का लाभ उठाना चाहती हैं तो उनके तीन से अधिक बच्चे नहीं होने चाहिए, जबकि अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अनुसूचित जाति (एससी) की महिलाओं के लिए यह सीमा चार बच्चों की है.

/
हिमंता बिस्वा शर्मा. (फोटो साभार: फेसबुक)

असम सरकार ने मुख्यमंत्री महिला उद्यमिता अभियान योजना शुरू की है. सामान्य और ओबीसी श्रेणियों की महिलाएं अगर इस योजना का लाभ उठाना चाहती हैं तो उनके तीन से अधिक बच्चे नहीं होने चाहिए, जबकि अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अनुसूचित जाति (एससी) की महिलाओं के लिए यह सीमा चार बच्चों की है.

हिमंता बिस्वा शर्मा. (फोटो साभार: फेसबुक)

नई दिल्ली: असम की भाजपा नेतृत्व वाली सरकार ग्रामीण महिला उद्यमियों के लिए कुछ शर्तों के साथ एक नई वित्तीय सहायता योजना लेकर आई है, जिसमें उनके बच्चों की संख्या की सीमा भी शामिल है.

सामान्य और ओबीसी श्रेणियों की महिलाएं अगर इस योजना का लाभ उठाना चाहती हैं तो उनके तीन से अधिक बच्चे नहीं हो सकते हैं, अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) की महिलाओं के लिए यह सीमा चार बच्चों की है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने गुरुवार (11 जनवरी) को मुख्यमंत्री महिला उद्यमिता अभियान (एमएमयूए) की घोषणा करते हुए कहा कि धीरे-धीरे राज्य सरकार की सभी लाभ वाली योजनाएं ऐसे ‘जनसंख्या मानदंडों’ से बंध जाएंगी.

यह साल 2021 में की गई उनकी इस घोषणा के अनुरूप है कि राज्य सरकार के पास विशिष्ट राज्य-वित्त पोषित योजनाओं के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए दो बच्चों की नीति होगी.

हालांकि, मुख्यमंत्री महिला उद्यमिता अभियान योजना के लिए मानदंडों में फिलहाल ढील दी गई है. मोरन, मोटोक और ‘चाय जनजातियां’, जो एसटी दर्जे की मांग कर रही हैं, उन पर भी चार बच्चों की सीमा लगाई गई है.

इस योजना का उद्देश्य राज्य के ग्रामीण इलाकों में स्वयं सहायता समूहों का हिस्सा रहीं महिलाओं को ‘ग्रामीण सूक्ष्म उद्यमियों’ के रूप में विकसित करने में मदद करना है. इसका लक्ष्य प्रत्येक सदस्य के लिए 1 लाख रुपये की वार्षिक आय है.

मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि इस योजना को बच्चों की संख्या से जोड़ने का तर्क यह सुनिश्चित करना था कि महिलाएं अपने व्यवसाय स्थापित करने के लिए धन का उपयोग करें.

उन्होंने कहा, ‘अगर एक महिला के चार बच्चे हैं, तो उसे पैसे खर्च करने का समय कहां मिलेगा, व्यवसाय करने का समय कहां मिलेगा? वह बच्चों को पढ़ाई कराने में व्यस्त रहेंगी.’

उन्होंने कहा कि ग्रामीण असम में स्वयं सहायता समूहों में शामिल 39 लाख महिलाओं में से बच्चों की संख्या की सीमा के कारण लगभग 5 लाख को योजना से बाहर किए जाने की संभावना है.

सरकार द्वारा लगभग 145 व्यावसायिक योजनाएं तैयार की गई हैं, जिनमें से वे अनुदान का लाभ उठाने के लिए एक का चयन कर सकते हैं. अगर वे बुनियादी पात्रता मानदंडों को पूरा करती हैं तो पहले वर्ष में सरकार उन्हें 10,000 रुपये प्रदान करेगी. यह इस बात पर निर्भर करता है कि वे इस धनराशि का उपयोग करती हैं या नहीं, अगले दो वर्षों में उन्हें सरकार द्वारा 12,500 रुपये और बैंक से 12,500 रुपये का ऋण दिया जाएगा.

बच्चों की संख्या की एक सीमा के अलावा लाभार्थियों को दो अन्य शर्तें भी पूरी करनी होंगी. अगर उनके पास लड़कियां हैं, तो उन्हें स्कूल में नामांकित किया जाना चाहिए. अगर लड़की स्कूल जाने की उम्र की नहीं है, तो महिलाओं को एक शपथ-पत्र पर हस्ताक्षर करना होगा कि समय आने पर उन्हें स्कूल में नामांकित किया जाएगा.

साथ ही, पिछले साल सरकार के वृक्षारोपण अभियान, अमृत वृक्ष आंदोलन के तहत उन्होंने जो पेड़ लगाए थे, वे जीवित रहने चाहिए.

2019 में पिछली भाजपा सरकार ने फैसला किया था कि दो से अधिक बच्चे वाले लोग जनवरी 2021 से सरकारी नौकरियों के लिए पात्र नहीं होंगे. यह जनसंख्या और महिला सशक्तिकरण नीति पर 2017 में असम विधानसभा द्वारा पारित एक प्रस्ताव का अनुवर्ती था.

मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री महिला उद्यमिता अभियान योजना पर शर्त मौजूदा जनसंख्या नीति के अनुरूप है.