हाईकोर्ट ने मस्जिद कमेटी की याचिका ख़ारिज की, कहा- ज्ञानवापी के तहखाने में जारी रहेगी पूजा

इलाहाबाद हाईकोर्ट की पीठ ने अंजुमन इंतज़ामिया मस्जिद समिति (एआईएमसी) की अपील पर फैसला यह सुनाया, जिसमें वाराणसी ज़िला न्यायाधीश के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें हिंदू भक्तों को ज्ञानवापी मस्जिद के ‘व्यास तहखाने’ के अंदर पूजा करने की अनुमति दी गई थी.

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वाराणसी स्थित ज्ञानवापी मस्जिद. (फाइल फोटो: एएनआई)

इलाहाबाद हाईकोर्ट की पीठ ने अंजुमन इंतज़ामिया मस्जिद समिति (एआईएमसी) की अपील पर फैसला यह सुनाया, जिसमें वाराणसी ज़िला न्यायाधीश के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें हिंदू भक्तों को ज्ञानवापी मस्जिद के ‘व्यास तहखाने’ के अंदर पूजा करने की अनुमति दी गई थी.

वाराणसी स्थित ज्ञानवापी मस्जिद. (फाइल फोटो: एएनआई)

नई दिल्ली: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार (26 फरवरी) को ज्ञानवापी मस्जिद के एक तहखाने में हिंदू पक्ष को पूजा करने की अनुमति देने के वाराणसी जिला अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी.

जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल ने ज्ञानवापी मस्जिद का प्रबंधन करने वाली अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी (एआईएमसी) की याचिका को खारिज करते हुए कहा, ‘व्यास तहखाने में हिंदू पूजा जारी रहेंगी.’

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, कमेटी ने वाराणसी जिला न्यायाधीश के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें हिंदू पक्ष को ज्ञानवापी मस्जिद के ‘व्यास तहखाने’ के अंदर पूजा करने की अनुमति दी गई थी.

वाराणसी जिला अदालत ने बीते 31 जनवरी को फैसला सुनाया था कि एक पुजारी ज्ञानवापी मस्जिद के दक्षिणी तहखाने जिसे ‘व्यास तहखाना’ कहा जाता है, में पूजा कर सकता है.

जिला अदालत का आदेश शैलेंद्र कुमार पाठक की याचिका पर दिया गया था, जिन्होंने कहा था कि उनके नाना सोमनाथ व्यास ने दिसंबर 1993 तक यहां पूजा-अर्चना की थी. पाठक ने अनुरोध किया था कि एक वंशानुगत पुजारी के रूप में उन्हें तहखाने में प्रवेश करने और पूजा फिर से शुरू करने की अनुमति दी जाए.

मस्जिद में चार तहखाने हैं और उनमें से एक अभी भी व्यास परिवार के पास है.

मस्जिद कमेटी ने याचिकाकर्ता के बयान का खंडन किया था. कमेटी ने कहा कि तहखाने में कोई मूर्ति मौजूद नहीं थी, इसलिए 1993 तक वहां प्रार्थना करने का कोई सवाल ही नहीं था.

कमेटी ने बीते 2 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा वाराणसी जिला अदालत के आदेश के खिलाफ उसकी याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करने और उसे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए कहने के कुछ ही घंटों के भीतर हाईकोर्ट का रुख किया था.

15 फरवरी को दोनों पक्षों को सुनने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

मालूम हो कि इससे पहले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर स्थित ज्ञानवापी मस्जिद की अपनी सर्वे रिपोर्ट में दावा किया है कि मौजूदा संरचना (मस्जिद) के निर्माण से पहले वहां एक ‘बड़ा हिंदू मंदिर’ मौजूद था और मंदिर के कुछ हिस्सों का उपयोग इस्लामी पूजा स्थल के निर्माण में किया गया था.

यह पता लगाने के लिए कि क्या काशी विश्वनाथ मंदिर से सटी 17वीं सदी की इस मस्जिद का निर्माण किसी मंदिर की पहले से मौजूद संरचना पर किया गया था, एएसआई ने अदालत के निर्देश पर इसका वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया है. एक याचिका में हिंदू पक्ष ने यहां मंदिर होने का दावा था. उन्होंने मस्जिद परिसर में मां श्रृंगार गौरी के दर्शन और पूजा के लिए साल भर प्रवेश की भी मांग की है.