उत्तर प्रदेश: इम्तिहानों पर पेपर लीक का साया, बोर्ड परीक्षाएं भी सवालों की ज़द में

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आोयजित समीक्षा अधिकारी (आरओ) तथा सहायक समीक्षा अधिकारी (एआरओ) की परीक्षाओं में 10 लाख से अधिक अभ्यर्थी उपस्थित हुए थे, जो अब रद्द कर दी गई है. वहीं, बीते दिनों ही 12वीं की बोर्ड परीक्षा के दो विषयों के प्रश्नपत्र इम्तिहान के दौरान वॉट्सऐप ग्रुप में साझा हुए थे.

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यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ. बैकग्राउंड में परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन के वीडियो का एक स्क्रीनग्रैब. (फोटो साभार: X/@myogiadityanath)

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आोयजित समीक्षा अधिकारी (आरओ) तथा सहायक समीक्षा अधिकारी (एआरओ) की परीक्षाओं में 10 लाख से अधिक अभ्यर्थी उपस्थित हुए थे, जो अब रद्द कर दी गई है. वहीं, बीते दिनों ही 12वीं की बोर्ड परीक्षा के दो विषयों के प्रश्नपत्र इम्तिहान के दौरान वॉट्सऐप ग्रुप में साझा हुए थे.

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ. बैकग्राउंड में परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन के वीडियो का एक स्क्रीनग्रैब. (फोटो साभार: X/@myogiadityanath)

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के चलते परीक्षाओं का रद्द होना जारी है. राज्य भर में प्रश्न पत्र लीक और अन्य अनियमितताओं की व्यापक शिकायतों के बाद राज्य सरकार द्वारा पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा रद्द करने के एक हफ्ते बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ फिर से प्रदर्शनकारी उम्मीदवारों के दबाव में आ गए और समीक्षा अधिकारी (आरओ) तथा सहायक समीक्षा अधिकारी (एआरओ) की भर्ती के लिए प्रारंभिक परीक्षा रद्द कर दी है.

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आरओ और एआरओ के 411 पदों के लिए परीक्षा 11 फरवरी को आयोजित की गई थी.

सिर्फ सरकारी नौकरियों की भर्ती परीक्षा ही नहीं, बल्कि अब राज्य में होने वाली बोर्ड परीक्षाओं में भी पेपर लीक के आरोप लग रहे हैं. आगरा में पुलिस ने 29 फरवरी को आयोजित राज्य माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षा के जीव विज्ञान और गणित के प्रश्नपत्र लीक करने के आरोप में एक इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया है.

24 फरवरी को कई शहरों में अभ्यर्थियों के भारी विरोध के बाद सरकार ने पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा रद्द कर दी, लेकिन समान आरोपों के बावजूद आरओ तथा एआरओ परीक्षा में केवल जांच शुरू की. आरओ और एआरओ अभ्यर्थियों ने विरोध जारी रखा और 2 मार्च 2024 को मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने घोषणा की कि 11 फरवरी की परीक्षा रद्द कर दी गई है.

उन्होंने यूपीपीएससी को छह महीने के भीतर दोबारा परीक्षा आयोजित करने का निर्देश दिया.

आदित्यनाथ ने कहा, ‘परीक्षा की शुचिता से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा. दोषियों को ऐसी सजा दी जाएगी जो मिसाल बनेगी.’

लाखों का सवाल

आरओ और एआरओ परीक्षा के लिए 10 लाख से अधिक उम्मीदवार उपस्थित हुए थे, जबकि 48 लाख से अधिक उम्मीदवार केवल 67,000 पुलिस कॉन्स्टेबल की नौकरियों के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे थे.

इन परीक्षाओं में पेपर लीक और भ्रष्टाचार के आरोपों ने विपक्षी दलों को स्वतंत्र और निष्पक्ष परीक्षा आयोजित कराने और बेरोजगार युवाओं को नौकरियां प्रदान करने के लिए एक सुचारू प्रक्रिया सुनिश्चित करने में भाजपा सरकार की विफलता के रिकॉर्ड पर सवाल उठाने का मौका दिया है. बेरोजगारी सबसे बड़े मुद्दों में से एक बनकर उभरी है जिसका उपयोग विपक्षी दल, (समाजवादी पार्टी और कांग्रेस) सरकार के विकास के दावों में सेंध लगाने के लिए कर रहे हैं.

हालांकि, बोर्ड परीक्षाओं में कथित पेपर लीक ने राज्य में परीक्षाओं की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

आगरा के फ़तेहपुर सीकरी थाने में दर्ज एफआईआर के मुताबिक, 29 फरवरी को दोपहर करीब 3.11 बजे जब बोर्ड परीक्षाएं चल रही थीं, तब गणित और जीव विज्ञान के प्रश्नपत्रों की तस्वीरें फ़तेहपुर सीकरी के अतर सिंह इंटर कॉलेज के कंप्यूटर ऑपरेटर विनय चौधरी से जुड़े एक फोन नंबर द्वारा ‘ऑल प्रिंसिपल्स आगरा’ नामक एक वॉट्सऐप ग्रुप में साझा की गईं.

पुलिस शिकायत में जिला विद्यालय निरीक्षक दिनेश कुमार ने चार ज्ञात व्यक्तियों – चौधरी, उनके पिता राजेंद्र सिंह (अतर सिंह इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल), गंभीर सिंह (जीएसके इंटर कॉलेज में अतिरिक्त केंद्र व्यवस्थापक) और गजेंद्र सिंह (स्टेटिक मजिस्ट्रेट एवं पशु चिकित्साधिकारी) को पेपर लीक के लिए आरोपी बनाया है.

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ यूपी सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम-1998 की धारा 3 और 4 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 72 लगाई है.

पुलिस ने बताया कि चौधरी, राजेंद्र सिंह और गंभीर सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है. हालांकि, यूपी माध्यमिक शिक्षा विभाग ने परीक्षा के दिन स्पष्ट किया था कि कथित तौर पर पेपर लीक एक छात्र को नकल करने में मदद करने के लिए चौधरी नामक व्यक्ति द्वारा किया गया एक भ्रष्ट कृत्य था.

यूपी माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव दिव्यकांत शुक्ला ने दावा किया कि इससे परीक्षा प्रभावित नहीं हुई.

अधिकारी ने तर्क दिया कि परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक निर्धारित थी लेकिन पेपर लगभग 3:10 बजे वॉट्सऐप ग्रुप पर लीक हो गया. शुक्ला ने कहा, इस समय तक परीक्षा एक घंटे से अधिक समय तक आयोजित हो चुकी थी.

आत्महत्या से दो की मौत

पेपर लीक का सिलसिला और सामान्य परीक्षा कार्यक्रम में व्यवधान उन लाखों उम्मीदवारों के लिए तनाव का एक बड़ा कारण रहा है जो सरकारी नौकरी पाने की उम्मीद रखते हैं.

फिरोजाबाद में एक 22 वर्षीय महिला ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. 2 मार्च को पुलिस ने कहा कि उसके द्वारा छोड़े गए एक नोट में कहा गया है कि वह नौकरी न मिलने और हाल ही में पेपर लीक होने से निराश थी. पिछले हफ्ते, एक 24 वर्षीय युवक की कन्नौज में ऐसी ही परिस्थितियों में मौत हो गई क्योंकि वह पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा समेत कई परीक्षाओं में उपस्थित होने के बावजूद नौकरी नहीं मिलने से दुखी था.

इस बीच, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि आरओ और एआरओ परीक्षा रद्द होना दिखाता है कि ‘ भाजपा पहले तो अपने कुकर्मों को छिपाने की हर संभव कोशिश करती है लेकिन जब जनता का दबाव होता है तो चुनावी हार के डर से पीछे हट जाती है.’

यादव ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर कहा, ‘यह युवाओं की जीत है और आगामी चुनावों में भाजपा की हार का एक और निश्चित संदेश है. भाजपा की हार का पेपर लीक हो गया है. भाजपा हटाओ, नौकरी पाओ.’

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी सोशल मीडिया साइट पर पूछा कि यूपी में नौकरियों से लेकर बोर्ड परीक्षाओं तक लगभग हर पेपर क्यों लीक हो रहा है. वाड्रा ने कहा, ‘परीक्षा माफिया और सरकार में बैठे भ्रष्ट लोगों को बचाने के लिए भाजपा करोड़ों बच्चों और युवाओं की नींव को भी खोखला कर रही है.’

जहां पुलिस आगरा में बोर्ड परीक्षा पेपर लीक और आरओ तथा एआरओ परीक्षाओं की जांच कर रही है, वहीं यह अभी भी उन लोगों को गिरफ्तार कर रही है जिन्होंने कथित तौर पर 17 और 18 फरवरी को पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा का प्रश्न पत्र लीक किया था.

गाजियाबाद में ब्लूटूथ डिवाइस के माध्यम से परीक्षा में किसी को नकल करने में मदद करने की कोशिश करने के आरोप में यूपी स्पेशल टास्क फोर्स ने एक आरोपी कपिल तोमर को गिरफ्तार किया है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)