विदेशी संवाददाताओं ने ऑस्ट्रेलियाई पत्रकार के साथ भारत के व्यवहार का विरोध किया

भारत में तैनात विदेशी संवाददाताओं के एक समूह ने कहा कि भारतीय अधिकारियों ने चुनाव से ठीक पहले एबीसी की दक्षिण एशिया ब्यूरो प्रमुख अवनि डियाज़ को देश छोड़ने को मजबूर कर दिया, जबकि भारत सरकार इन चुनावों को दुनिया में सबसे बड़ी लोकतांत्रिक प्रक्रिया बताती है.

अवनि डियाज़. फोटो साभार: X/@AvaniDias.

नई दिल्ली: भारत में तैनात विदेशी संवाददाताओं के एक समूह ने एक खुले पत्र में ऑस्ट्रेलियाई ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (एबीसी) की रिपोर्टर अवनि डियाज़ के साथ किए गए भारत सरकार के व्यवहार का कड़ा विरोध किया है. अवनि डियाज़ ने बीते दिनों यह कहते हुए भारत छोड़ दिया था कि सरकार ने उनके लिए यहां काम करना मुश्किल कर दिया था.

रिपोर्ट के मुताबिक, तीस विदेशी संवाददाताओं ने कहा है कि अधिकारियों ने भले ही डियाज़ को निष्कासित नहीं किया, लेकिन उन्होंने प्रभावी ढंग से चुनाव से ठीक पहले एक विदेशी संवाददाता को देश छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया, जबकि भारत सरकार इस चुनाव को दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक प्रक्रिया बताती है.

इस खुले पत्र में कहा गया है कि ‘भारत में विदेशी पत्रकार, जो भारत के विदेशी नागरिक का दर्जा रखते हैं, वो वीज़ा और पत्रकारिता परमिट पर बढ़ते प्रतिबंधों से जूझ रहे हैं. ऐसे में डियाज़ के देश छोड़ने की परिस्थितियां और भी चिंताजनक हैं.’

इसमें आगे कहा गया, ‘हम भारत सरकार से भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप स्वतंत्र प्रेस के महत्वपूर्ण कार्य को सुविधाजनक बनाने का आह्वान करते हैं.’

एबीसी के अनुसार, डियाज़ एबीसी की दक्षिण एशिया ब्यूरो प्रमुख हैं और पिछले ढाई साल से भारत से रिपोर्ट कर रही थीं. उन्हें भारत के विदेश मंत्रालय से फोन आया था और कहा गया था कि कनाडाई खालिस्तान समर्थक की हत्या में भारत सरकार के एजेंट के शामिल होने के संबंध में उन्होंने जो रिपोर्ट तैयार की थी, वह ‘हद पार करने जैसा था.’

पिछले महीने केंद्रीय प्रसारण मंत्रालय के आदेश पर यूट्यूब ने भारत में इस रिपोर्ट पर रोक लगा दी थी और कहा था कि यह सरकारी आदेश ‘गोपनीय’ है लेकिन सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत आता है.

डियाज़ ने बताया कि भारत में उनकी रिपोर्ट पर रोक लगने के कुछ दिनों बाद विदेश मंत्रालय से आए फोन में उन्हें बताया गया कि उन्हें देश में रहने के लिए नियमित वीज़ा विस्तार (एक्सटेंशन) नहीं मिलेगा. उनसे कहा गया था कि उन्होंने ‘डॉक्यूमेंट्री’ बनाकर अपने वीज़ा नियमों का उल्लंघन किया है, लेकिन एबीसी ने बताया कि इससे पहले डियाज़ और अन्य पत्रकारों को इसमें कभी कोई समस्या नहीं आई.

एबीसी ने कहा कि भारत सरकार ने ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों की पैरवी के बाद डियाज़ के वीज़ा को दो महीने का विस्तार दिया था. लेकिन इसकी जानकारी उन्हें वापसी की फ्लाइट लेने के 24 घंटे से भी कम समय पहले दी गई.

उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर कहा कि एक सरकारी निर्देश ने आम चुनावों को कवर करने के लिए उनकी मान्यता को भी अस्वीकार कर दिया था.

एबीसी ने डियाज़ के हवाले से बताया कि भारत में उनका काम करना बहुत मुश्किल हो गया था. उन्हें मोदी की पार्टी द्वारा आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रमों में जाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा था, सरकार उन्हें चुनाव कवर करने के लिए आवश्यक पास भी नहीं देती थी.

आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि डियाज़ ने वीज़ा नियमों का उल्लंघन किया है लेकिन फिर भी वह सरकार उनका वीज़ा रिन्यू करने पर सहमत हो गई थी.

सूत्रों ने कहा, ‘डियाज़ ने अपने पेशेवर कार्यों के दौरान वीज़ा नियमों का उल्लंघन किया था. इसके बावजूद, उनके अनुरोध पर सरकार द्वारा उन्हें आश्वासन दिया गया कि आम चुनावों की कवरेज के लिए उनका वीज़ा बढ़ाया जाएगा. उनका पिछला वीज़ा 20 अप्रैल 2024 तक वैध था.’

सूत्रों ने आगे बताया कि डियाज़ ने 18 अप्रैल को वीज़ा शुल्क का भुगतान किया था और उसी दिन उनका वीज़ा जून के अंत तक बढ़ा दिया गया था. हालांकि उन्होंने 20 अप्रैल को भारत छोड़ने का फैसला कर लिया.

डियाज़ के यह कहने पर कि उन्हें चुनावों को कवर करने के लिए मान्यता से वंचित कर दिया गया था, सूत्रों ने कहा कि पत्रकार वीजा धारकों को केवल मतदान केंद्रों और मतगणना केंद्रों तक पहुंचने के लिए अनुमति की आवश्यकता होती है, लेकिन यह अनुमति तब नहीं दी जा सकती है ‘जब वीजा विस्तार की प्रक्रिया चल रही हो’.

सूत्रों ने आगे कहा, ‘यहां  ध्यान देना जरूरी है कि अन्य एबीसी संवाददाताओं मेघना बाली और सोम पाटीदार को पहले ही उनके पत्र मिल चुके हैं.’

गौरतलब है कि भारत में बिगड़ती प्रेस स्वतंत्रता की खबरें अक्सर सामने आती रहती हैं. इसी साल फरवरी में फ्रांसीसी पत्रकार वैनेसा डौगनैक ने देश छोड़ दिया था. उन्हें भारत में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाली विदेशी संवाददाता के तौर पर जाना जाता है. उनकी रिपोर्टिंग पर कथित तौर से सवाल उठने के बाद सरकार द्वारा उनके ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (ओसीआई) कार्ड को रद्द करने की बात कही थी.

जब डौगनैक के खिलाफ सरकार की कार्रवाई की खबर आई थी, तो भारत स्थित 30 विदेशी संवाददाताओं के एक समूह ने एक खुले पत्र में इस कदम पर अपनी ‘गहरी चिंता‘ व्यक्त की थी. डियाज़ उन 30 संवाददाताओं में से थीं,  जिन्होंने इस पत्र पर हस्ताक्षर किए थे.

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विदेशी संवाददाताओं द्वारा लिखा पत्र.

23 अप्रैल 2024

हम, भारत में रह रहे विदेशी संवाददाता, ऑस्ट्रेलियाई प्रसारक एबीसी के दक्षिण एशिया ब्यूरो प्रमुख और हमारी सहयोगी अवनि डियाज़ के साथ भारतीय अधिकारियों द्वारा किए गए व्यवहार पर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराना चाहते हैं.

अवनि डियाज़, जिन्होंने जनवरी 2022 से भारत को कवर किया है, चुनाव के पहले दिन शुक्रवार को देश छोड़ गईं. वह तब चली गईं जब सरकार ने उन्हें बताया कि सिख अलगाववादी आंदोलन पर उनकी रिपोर्टिंग (वह रिपोर्टिंग जिस पर तब से भारत में रोक है) ने ‘हद पार कर दी है’ और वे उनके पत्रकारिता वीजा का विस्तार नहीं करेंगे. हालांकि, उनके निकलने से एक दिन पहले उन्हें दो महीने का वीज़ा एक्सटेंशन दिया गया था, लेकिन उन्हें यह स्पष्ट कर दिया गया था कि उन्हें चुनाव को कवर करने के लिए मान्यता नहीं मिलेगी. इस प्रकार, तकनीकी रूप से उन्हें निष्कासित नहीं किया गया, लेकिन भारतीय अधिकारियों ने ऐसे चुनाव, जिसे सरकार दुनिया में सबसे बड़ी लोकतांत्रिक प्रक्रिया बताती है, की शुरुआत से ठीक पहले एक विदेशी संवाददाता को देश छोड़ने पर मजबूर कर दिया.

भारत में विदेशी पत्रकार भारत के विदेशी नागरिक का दर्जा रखने वालों के लिए वीजा और पत्रकारिता परमिट पर बढ़ते प्रतिबंधों से जूझ रहे हैं. डियाज़ के जाने की परिस्थितियां और भी चिंताजनक हैं. हम भारत सरकार से भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप स्वतंत्र प्रेस के महत्वपूर्ण कार्य को सुविधाजनक बनाने का आह्वान करते हैं.

अल्बान अल्वारेज़
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