हैदराबाद: उस्मानिया यूनिवर्सिटी में विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिबंध, बीआरएस ने ‘लोकतंत्र की हत्या’ बताया

हैदराबाद स्थित उस्मानिया विश्वविद्यालय ने यूनिवर्सिटी परिसर के साथ-साथ इसके विभिन्न घटक कॉलेजों और उनके प्रशासनिक भवनों में विरोध प्रदर्शन और धरने पर प्रतिबंध लगा दिया है. लोगों की नाराज़गी के बाद संस्थान ने कहा कि यह पूर्ण प्रतिबंध नहीं है. वहीं, विपक्ष ने इसे लोकतंत्र की हत्या क़रार दिया है.

उस्मानिया विश्वविद्यालय. (फोटो: X/@osmania1917)

नई दिल्ली: हैदराबाद स्थित उस्मानिया विश्वविद्यालय (ओयू) ने विश्वविद्यालय परिसर के साथ-साथ इसके अंतर्गत आने वाले विभिन्न कॉलेजों और उनके प्रशासनिक भवनों में विरोध प्रदर्शन और धरने पर प्रतिबंध लगा दिया है. इस निर्णय पर लोगों की नाराजगी के बाद विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया कि यह कोई ‘पूर्ण प्रतिबंध’ नहीं है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सभी विभागाध्यक्षों, प्रशासनिक अधिकारियों और घटक कॉलेजों के प्राचार्यों को जारी आदेश में कहा गया है, ‘उस्मानिया विश्वविद्यालय एक अत्यंत प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान है, जिसका उद्देश्य एक अनुकूल और शांतिपूर्ण वातावरण में शिक्षा प्रदान करना है. हाल के दिनों में यह देखा गया है कि छात्रों/छात्र समूहों द्वारा उस्मानिया विश्वविद्यालय के विभागों/कॉलेजों के प्रशासनिक भवन में प्रवेश करने और प्रदर्शन और धरना देने की कई घटनाएं हुई हैं, जिसके परिणामस्वरूप प्रशासनिक कार्य बाधित हुआ है और समाज में विश्वविद्यालय के बारे में गलत धारणा बनी है.’

आदेश में कहा गया है कि इन घटनाओं से विश्वविद्यालय के सुचारू कामकाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जिससे प्रशासनिक और शैक्षणिक प्रगति में देरी होती है.

इसमें कहा गया है, ‘कुछ मौकों पर इन घटनाओं ने सुरक्षा मुद्दों और चिंताओं को भी उठाया है. विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया है और उस्मानिया विश्वविद्यालय के विभागों/कॉलेजों/केंद्रों/प्रशासनिक भवन के परिसर में निम्नलिखित गतिविधियों पर रोक लगाने का फैसला किया है: 1. अनधिकृत प्रवेश 2. धरना और आंदोलन करना 3. नारे लगाना 4. प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन करने से रोकना 5. विश्वविद्यालय के कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ असंसदीय और गंदी भाषा का उपयोग करना. यदि कोई व्यक्ति उपरोक्त गतिविधियों में शामिल पाया जाता है, तो कानून के अनुसार ऐसे व्यक्ति के खिलाफ गंभीर कार्रवाई की जाएगी.’

इसमें कहा गया है कि विश्वविद्यालय प्रणाली में यदि किसी छात्र को कोई वास्तविक शिकायत है, तो वह सबसे पहले संस्थान स्तर पर संबंधित अधिकारी से संपर्क कर सकता है और उसके बाद पूर्व अनुमति लेकर रजिस्ट्रार और अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रख सकता है.

यह आदेश विश्वविद्यालय में विरोध प्रदर्शनों की बाढ़ के बाद आया है- हाल ही में एक छात्रावास के भोजनालय में खाने में रेजर ब्लेड पाए जाने के बाद यह आदेश दिया गया है.

गौरतलब है कि इस प्रतिबंध ने कई लोगों को हैरान किया है, खासकर यह देखते हुए कि तेलंगाना राज्य आंदोलन के दौरान ओयू राजनीतिक विरोधों का केंद्र था.

विपक्ष ने निंदा की

भारत राष्ट्र समिति के नेता केटी रामा राव ने इस घटनाक्रम के लिए कांग्रेस सरकार को दोषी ठहराया और प्रतिबंध को लोकतंत्र की हत्या करार दिया.

उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘कांग्रेस सरकार, जिसने छह गारंटियों को रोक दिया है, डेढ़ साल के भीतर सातवीं गारंटी को भी हासिल करने में विफल रही. उस्मानिया विश्वविद्यालय परिसर में छात्र विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगाने के आदेश जारी करना लोकतंत्र की हत्या है. सातवीं गारंटी के रूप में लोकतांत्रिक शासन प्रदान करने का दावा करने वाले मुख्यमंत्री विरोध प्रदर्शनों पर नकेल कस रहे हैं, जो सबसे बुरा काम है.’

बाद में जारी एक प्रेस नोट में नेता ने कहा, ‘क्या यह विरोध का लोकतांत्रिक अधिकार है जिसे राहुल गांधी और कांग्रेस ने बनाए रखने का दावा किया है? अगर कांग्रेस वास्तव में लोकतंत्र में विश्वास करती है, तो वह छात्रों की आवाज़ को दबाने के लिए तानाशाही उपायों का सहारा क्यों ले रही है?’

वहीं, केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने उस्मानिया विश्वविद्यालय द्वारा परिसर में विरोध प्रदर्शन और जुलूस पर प्रतिबंध लगाने के बाद तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की आलोचना की और कहा कि यह एक ‘अलोकतांत्रिक निर्णय’ है.

रेड्डी ने रविवार को एएनआई से कहा, ‘उस्मानिया विश्वविद्यालय का इतिहास काफी पुराना है. स्वतंत्रता संग्राम में भी इसने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी… 1969 में जब पहली तेलंगाना क्रांति शुरू हुई थी, तब पुलिस की गोलीबारी में उस्मानिया विश्वविद्यालय के लगभग 369 छात्र शहीद हो गए थे… जब टीआरएस की सरकार बनी, तो केसीआर ने विश्वविद्यालय में छात्र आंदोलन पर प्रतिबंध लगा दिया.’

किशन रेड्डी ने आगे कहा, ‘और अब रेवंत रेड्डी ने विश्वविद्यालय में जुलूस, नारेबाजी, सभा और विरोध प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है… कोई भी विश्वविद्यालय ऐसी चीजों पर प्रतिबंध नहीं लगाता… यह एक अलोकतांत्रिक निर्णय है.’

आक्रोश के बाद यूनिवर्सिटी ने स्पष्टीकरण जारी किया

आक्रोश के बाद ओयू ने स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि यह पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, बल्कि यह केवल ‘विश्वविद्यालय के भीतर खुले क्षेत्रों’ में विरोध प्रदर्शनों पर लागू है.

इसमें कहा गया है, ‘ये प्रतिबंध विशेष रूप से कॉलेज विभागों और प्रशासनिक परिसरों के भीतर शैक्षणिक और प्रशासनिक स्थानों पर लागू होते हैं. परिपत्र का उद्देश्य विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के सुचारू संचालन में बाधा उत्पन्न करने वाले व्यवधानों को रोकना है.’

इसमें आगे कहा गया है, ‘उस्मानिया विश्वविद्यालय का अपने छात्रों और हितधारकों के लोकतांत्रिक अधिकारों की वकालत करने का गौरवशाली इतिहास रहा है. हम तेलंगाना आंदोलन सहित छात्र आंदोलनों द्वारा सामाजिक उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका को पहचानते हैं और उसका बेहद सम्मान करते हैं. लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक अधिकारों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता अटल है, क्योंकि ये सिद्धांत हमारे विश्वविद्यालय की पहचान और मिशन के लिए केंद्रीय हैं.’