दिल्ली: वीसी के गणतंत्र दिवस भाषण की आलोचना करने पर यूनिवर्सिटी ने छात्रा को निलंबित किया

दिल्ली के आंबेडकर विश्वविद्यालय में एमए फाइनल की छात्रा ने इस वर्ष गणतंत्र दिवस पर दिए विश्वविद्यालय की कुलपति अनु सिंह लाठर के भाषण की कथित आलोचना की थी. निलंबन को लेकर छात्रा ने आरोप लगाया कि उनकी मुस्लिम पहचान के चलते उन्हें निशाना बनाया जा रहा है.

आंबेडकर विश्वविद्यालय, दिल्ली. (फोटो: विकिमीडिया कॉमन्स)

नई दिल्ली: डॉ. बीआर आंबेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली के अंतिम वर्ष के एमए छात्रा को इस वर्ष गणतंत्र दिवस पर विश्वविद्यालय की कुलपति अनु सिंह लाठर द्वारा दिए गए भाषण की कथित रूप से आलोचना करने के लिए निलंबित कर दिया गया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, लाठर ने अपने भाषण में कहा था कि राम जन्मभूमि आंदोलन 525 साल पुराना है और यह कोई नया मुद्दा नहीं है. कुलपति ने राम मंदिर की स्थापना के लिए राज्य की सराहना की और डॉ. बीआर आंबेडकर को सिर्फ़ दलित समुदाय का व्यक्ति न मानकर राष्ट्रीय व्यक्ति बनाने की बात कही थी.

शुक्रवार (21 मार्च) को प्रॉक्टोरियल बोर्ड द्वारा जारी आदेश में विश्वविद्यालय ने ‘अनुशासनहीनता’ और संस्थान प्रमुख के खिलाफ ‘अपमानजनक भाषा’ के इस्तेमाल का आरोप लगाया. यह आरोप ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आईसा) की कार्यकर्ता छात्रा के ईमेल को लेकर लगाया गया है, जिसे इस साल जनवरी में विश्वविद्यालय की आधिकारिक मेल पर भेजा गया था.

विश्वविद्यालय की कार्रवाई के परिणामस्वरूप छात्रा को छह महीने (पूर्ण शीतकालीन सेमेस्टर) के लिए निलंबित कर दिया गया है तथा इस अवधि के दौरान परिसर में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, आईसा के एक बयान में दावा किया गया कि कुलपति ने अपने गणतंत्र दिवस भाषण में ऐसी टिप्पणियां कीं जो स्पष्ट रूप से जातिवादी और सांप्रदायिक थीं. 28 जनवरी को छात्रा ने कुलपति द्वारा की गई टिप्पणियों की निंदा की थी.

विश्वविद्यालय ने कहा कि छात्रा को 17 फरवरी को कारण बताओ नोटिस दिया गया था और उसे 28 फरवरी को प्रॉक्टोरल बोर्ड के साथ व्यक्तिगत बातचीत के लिए उसके माता-पिता के साथ बुलाया गया था.

निलंबन आदेश में कहा गया है कि केवल छात्रा ही प्रॉक्टोरल मीटिंग में आई थी और उसके माता-पिता नहीं आए थे. इसमें आगे कहा गया कि प्रॉक्टोरल मीटिंग के बाद छात्रा द्वारा लिखित प्रतिक्रिया ‘माफी मांगने वाली नहीं’ थी.

इस बीच, निलंबित छात्रा ने आरोप लगाया कि उन्हें इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वह मुस्लिम पहचान वाली महिला हैं. उन्होंने कहा, ‘मैं अपने अंतिम सेमेस्टर में हूं और अंतिम सबमिशन मई के मध्य में होना है. यह मेरी डिग्री को एक साल के लिए बढ़ाने का एक बहुत ही सचेत प्रयास है.’

उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें अपनी आवाज़ उठाने के लिए निलंबित कर दिया गया हैं. उन्होंने आगे मांग की कि विश्वविद्यालय को उनके निलंबन और परिसर से निष्कासन को रद्द करना चाहिए.

छात्रा ने कहा, ‘यदि केवल सवाल पूछने के कृत्य को ही आपराधिक बना दिया जाए तो हमारे विश्वविद्यालयों को किस बात के लिए खड़ा होना चाहिए… इस मानसिक और भावनात्मक उत्पीड़न को और बढ़ाने के पीछे स्पष्ट प्रेरणा और कुछ नहीं बल्कि प्रशासन द्वारा सभी असहमत छात्रों के लिए एक उदाहरण स्थापित करने और उनकी आवाज को अनिश्चितकाल के लिए दबाने की एक जानबूझकर की गई साजिश है.’