नई दिल्ली: महाराष्ट्र में इस साल जनवरी से अब तक महाराष्ट्र में सांप्रदायिक हिंसा की 823 घटनाएं हुई हैं, जिसमें नागपुर में हुई हिंसा भी शामिल है, जिसमें औरंगज़ेब की कब्र को हटाने की मांग और सोशल मीडिया पर गलत तथ्य फैलाए जाने से नई मुसीबतें पैदा हुई हैं.
ज्ञात हो कि हाल के दिनों में छत्रपति संभाजीनगर जिले में स्थित मुगल सम्राट के मकबरे को ध्वस्त करने की दक्षिणपंथी संगठनों की मांग को लेकर नंदुरबार, पुणे (ग्रामीण), रत्नागिरी, सांगली, बीड और सतारा जिलों के अलावा अन्य क्षेत्रों में सांप्रदायिक अशांति देखी गई.
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, एक अधिकारी ने सोमवार को बताया कि जनवरी में सांप्रदायिक अशांति के संबंध में राज्य के विभिन्न पुलिस थानों में कुल 156 आपराधिक मामले दर्ज किए गए, फरवरी में 99 और मार्च के मध्य तक 78 मामले दर्ज किए गए. उन्होंने बताया कि धार्मिक कारणों से 102 मामले संज्ञेय अपराधों की श्रेणी में सूचीबद्ध किए गए.
एक अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि महाराष्ट्र में 2024 में 4,836 हिंदू-मुस्लिम सांप्रदायिक अपराध हुए, जिनमें से 170 घटनाएं संज्ञेय और 3,106 गैर-संज्ञेय मामले थे. इन मामलों में से 371 घटनाएं धार्मिक अपमान से संबंधित थीं.
ज्ञात हो कि 17 मार्च को मध्य नागपुर के कई इलाकों में भीड़ ने उत्पात मचाया, जिसके बाद बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद ने औरंगजेब की कब्र को हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया. उनका दावा था कि औरंगजेब की कब्र ‘दर्द और गुलामी’ का प्रतीक है.
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हाल ही में राज्य विधानसभा को बताया कि छत्रपति संभाजी महाराज के जीवन पर आधारित विक्की कौशल अभिनीत फिल्म ‘छावा’ ने औरंगजेब के खिलाफ लोगों की भावनाओं को फिर से भड़का दिया है.
वहीं, पुलिस ने सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने और भड़काऊ पोस्ट को लोगों को भड़काने वाले मुख्य कारक के रूप में चिह्नित किया है.
महाराष्ट्र साइबर ने फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स और यूट्यूब पर 144 लिंक की पहचान की है, जहां नागपुर दंगों से संबंधित भड़काऊ सामग्री पोस्ट की गई थी.
एक अधिकारी ने बताया, ’37 लिंक हटा दिए गए तथा 107 लिंक के खिलाफ अधिसूचना भेजकर कार्रवाई की गई.’
सांप्रदायिक तनाव से शांतिपूर्ण कोंकण क्षेत्र के लोग हैरान
अधिकारी ने रत्नागिरी जिले के राजापुर कस्बे की एक घटना का जिक्र किया, जहां होली में जुलूस निकल रहे लोगों ने कथित तौर पर जामा मस्जिद के सामने डांस किया और राम, महादेव, शिवाजी महाराज और संभाजी महाराज के नारे लगाते हुए गेट को क्षतिग्रस्त कर दिया.
इस घटना का वीडियो विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो गया था. अधिकारी ने बताया कि सोशल मीडिया पर विभिन्न पोस्टों में झूठा दावा किया गया कि मस्जिद पर हमला किया गया, जिससे सांप्रदायिक तनाव फैल गया.
उन्होंने कहा कि न केवल रत्नागिरी बल्कि कोंकण क्षेत्र दशकों से हिंदू-मुस्लिम सद्भाव और त्योहार परंपराओं को बनाए रखने में गर्व महसूस करता है. आम लोगों का मानना है कि तटीय जिलों रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग और रायगढ़ में हिंदू-मुस्लिम सद्भाव की मजबूत जड़ें होने के बावजूद मस्जिद की घटना एक अपवाद थी.
अधिकारी ने कहा, ‘कोंकण के लोग शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में विश्वास करते हैं और त्योहारों को मनाना पसंद करते हैं. तटीय क्षेत्र में हिंदू-मुस्लिम संघर्ष अभूतपूर्व है.’
राजापुर में हिंदू-मुस्लिम एकता की गहरी परंपराओं पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि होली की आग में इस्तेमाल होने वाले ताड़ के पेड़ (माड़) को पहले मस्जिद में ले जाना पड़ता है.
राजापुर के निवासियों ने सांप्रदायिक दंगों पर दुख व्यक्त किया है. राजापुर निवासी मुन्ना सुर्वे ने कहा कि हिंदू ईद मनाने के लिए अपने मुस्लिम मित्रों के घर जाते हैं, जिसके बदले में मुसलमान भी गणेश उत्सव, होली और ग्राम देवता की पालकी यात्रा में शामिल होते हैं.
उन्होंने कहा, ‘कोंकण में कई मुसलमानों को हिंदू देवताओं को पहली प्रार्थना करने का अधिकार है. राजापुर में वे पालकी पर नारियल चढ़ाते हैं.’
हिंदू-मुस्लिम सद्भाव की ऐसी ही परंपराएं महाराष्ट्र के अन्य जिलों में भी मौजूद हैं, जहां हिंदू उर्स और पीरों के दौरान अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और सामुदायिक भोज खाते हैं.
तटीय जिले रत्नागिरी के निवासी अली मियां काजी ने कहा, ‘हम सभी शांतिप्रिय लोग हैं. हमारे पूर्वज सदियों से यहां रह रहे हैं. हमारा राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है. हम अपने पूर्वजों द्वारा सांप्रदायिक सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई परंपराओं को संरक्षित करने के लिए एक साथ आते हैं.’
काजी ने दावा किया कि कुछ राजनेता सांप्रदायिक सद्भाव से नफरत करते हैं और भड़काऊ भाषणों और सांप्रदायिक बयानों के जरिए तनाव भड़काने की कोशिश करते हैं.
उन्होंने सिंधुदुर्ग जिले के एक गांव में बाहरी लोगों के व्यापार पर प्रतिबंध लगाने पर दुख जताया, जहां एक कबाड़ व्यापारी के 15 वर्षीय बेटे द्वारा चैंपियन ट्रॉफी क्रिकेट फाइनल मुकाबले के दौरान कथित तौर पर पाकिस्तान समर्थक नारे लगाने के बाद तनाव पैदा हो गया था.
उन्होंने कहा, ‘इस तरह के बहिष्कार से तनाव बढ़ सकता है. इनसे बचना चाहिए.’
