यूपी पत्रकार हत्या: पुलिस ने पुजारी को मास्टरमाइंड बताया, असंतुष्ट परिवार को साज़िश की आशंका

सीतापुर पुलिस ने एक पुजारी को दैनिक जागरण के पत्रकार राघवेंद्र बाजपेयी की हत्या का साज़िशकर्ता बताया है. बाजपेयी के परिवार को पुलिस की थ्योरी पर यक़ीन नहीं है. उनका आरोप है कि हत्या के पीछे गहरी साज़िश थी, जो ज़िले में ज़मीन और धान की खरीद में भ्रष्टाचार की हालिया कवरेज से जुड़ी है.

पत्रकार राघवेंद्र बाजपेयी. (फोटो साभार: सोशल मीडिया)

नई दिल्ली: दैनिक जागरण के पत्रकार और आरटीआई कार्यकर्ता राघवेंद्र बाजपेयी की सीतापुर में बाइक सवार हमलावरों द्वारा गोली मारकर हत्या किए जाने के एक महीने बाद, उत्तर प्रदेश पुलिस ने गुरुवार को कहा कि इस हत्या की योजना एक पुजारी ने बनाई थी, जिसे पत्रकार ने मंदिर में एक नाबालिग लड़के के साथ कथित तौर पर बलात्कार करते देखा था.

पुलिस ने कहा कि मंदिर के पुजारी ने 35 वर्षीय पत्रकार की हत्या करवा दी क्योंकि उसे डर था कि वह पुजारी के कृत्य को दुनिया के सामने उजागर कर सकता है. हालांकि, बाजपेयी के परिवार ने पुलिस की थ्योरी पर यकीन करने से इनकार कर दिया और आरोप लगाया कि हत्या के पीछे एक गहरी साजिश थी, और यह बाजपेयी के पत्रकारिता के काम और जिले में जमीन और धान की खरीद में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की हालिया कवरेज से जुड़ी थी.

इस संबंध में उनकी पत्नी रश्मि बाजपेयी ने कहा कि उन्हें स्थानीय पुलिस पर भरोसा नहीं है.

सीतापुर पुलिस द्वारा मामले को सुलझाने का दावा करने के तुरंत बाद द वायर द्वारा देखे गए एक वीडियो बयान में उन्होंने कहा, ‘मैं सीबीआई जांच चाहती हूं. मैं इससे संतुष्ट नहीं हूं. वे कहानियां गढ़ रहे हैं.’

बाजपेयी लखनऊ से सटे सीतापुर जिले में हिंदी अखबार दैनिक जागरण के महोली (तहसील) संवाददाता के रूप में काम करते थे. उन्होंने धान और जमीन की खरीद में कथित भ्रष्टाचार की खबरों पर रिपोर्टिंग की थी. 8 मार्च को हाईवे पर बाइक सवार हमलावरों ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी थी. इस हत्या से सीतापुर और यूपी के अन्य जिलों में पत्रकार समुदाय में आक्रोश फैल गया था और उन्होंने परिवार के लिए न्याय और मुआवजे की मांग की थी.

गुरुवार को सीतापुर पुलिस ने बताया कि उन्होंने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है – विकास राठौर उर्फ ​​बाबा शिवानंद, निर्मल सिंह और असलम गाजी. पुलिस ने बताया कि महोली के कार्यदेव मंदिर के पुजारी राठौर ने ही हत्या की साजिश रची थी.

पुलिस अधीक्षक चक्रेश मिश्रा ने बताया कि राठौर पिछले कुछ सालों से मंदिर में मुख्य पुजारी रमाकांत मिश्रा के सहायक के तौर पर रह रहा था. पुलिस ने बताया कि वह विकास मिश्रा के नाम से रह रहा था. राठौर पूजा-पाठ में मुख्य पुजारी की मदद करता था और ज्योतिष और तांत्रिक अनुष्ठानों से जुड़ी अन्य गतिविधियों के जरिये पैसे भी कमाता था.

एसपी मिश्रा ने बताया कि बाजपेयी पिछले तीन-चार महीनों से मंदिर में आ रहा था, जहां उसकी दोस्ती राठौर से हुई. अधिकारी ने बताया कि फरवरी की शुरुआत में मंदिर में जाते समय बाजपेयी ने कथित तौर पर राठौर को परिसर के प्रबंधन में मदद करने वाले एक नाबालिग लड़के के साथ यौन संबंध बनाते हुए देखा था. पुलिस ने बताया कि राठौर के अन्य पुरुषों के साथ भी यौन संबंध थे.

पुलिस के अनुसार, राठौर ने बाजपेयी को मरवाने की योजना बनाई क्योंकि उसे डर था कि पत्रकार उसकी पोल खोल देगा.

अधिकारी ने कहा, ‘यह एक मंदिर था और वह अपवित्र कामों में लिप्त था. अगर वह (बाजपेयी) ऐसा करता (उसे दुनिया के सामने उजागर करता) तो उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा और आर्थिक स्थिति को नुकसान पहुंचता.’

इसके बाद राठौर ने आपराधिक रिकॉर्ड वाले दो लोगों- निर्मल सिंह और असलम गाजी को काम पर रखा और बाजपेयी की हत्या के लिए उन्हें 4 लाख रुपये दिए.

पुलिस ने बताया कि इसके बाद दोनों लोगों ने दो पेशेवर शूटरों को काम पर रखा, जिन्होंने हत्या को अंजाम दिया.

एसपी मिश्रा ने बताया कि राठौर ने लगातार तीन दिन यानी 6, 7 और 8 मार्च को बाजपेयी को मंदिर आने के लिए फुसलाया था. अधिकारी ने बताया, ‘8 मार्च को उसने बाजपेयी को यह कहकर बुलाया कि उसकी तबीयत ठीक नहीं है. उसी दिन उसकी हत्या कर दी गई.’

पुलिस ने बताया कि हत्या के बाद राठौर ने कथित तौर पर एक पुरुष रासलीला कलाकार के साथ जश्न मनाया. दोनों ने सीतापुर के एक रेस्तरां में डिनर करने से पहले शॉपिंग की और फिर एक होटल में रात बिताई. उन्होंने छह बीयर और भांग का ऑर्डर दिया. पुलिस ने बताया कि राठौर ने कलाकार के साथ ‘अप्राकृतिक’ सेक्स भी किया.

पत्रकार के परिजनों का पुलिस की कहानी को मानने से इनकार

बाजपेयी की पत्नी रश्मि ने आरोप लगाया कि यह सब छिपाने की कोशिश है. उन्होंने कहा कि उनके पति सिर्फ़ पूजा के लिए मंदिर जाते थे और पुजारी से उनका कोई संबंध नहीं था. उन्होंने आरोप लगाया कि पुजारी किसी तरह से हत्या में शामिल हो सकते हैं, लेकिन वह अकेले इसकी योजना नहीं बना सकते.

रश्मि ने कहा, ‘संभव है कि ताकतवर लोगों ने बाबा की मदद ली हो. बाबा अकेले इतनी बड़ी घटना को अंजाम नहीं दे सकते. यह बड़े लोगों का काम है. यह किसी छोटे-मोटे लोगों का काम नहीं हो सकता. लोग अंधे नहीं हैं. मैं अंधी नहीं हूं कि किसी भी बात पर यकीन कर लूं.’

रश्मि ने कहा कि पुजारी पर जांच केंद्रित करके बाजपेयी ने जिन मुद्दों पर रिपोर्ट की थी, उन्हें दरकिनार कर दिया गया.

रश्मि ने पूछा, ‘क्या उन्होंने धान और जमीन घोटाले की भी जांच की? अगर उन्हें बाबा को गिरफ्तार करना ही था, तो उन्होंने 34 दिन क्यों लगाए?’

उन्होंने कहा कि बाजपेयी की हत्या उनके पत्रकारिता के काम की वजह से हुई. पिछले महीने हत्या के तुरंत बाद पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत में रश्मि ने कहा था, ‘उन्होंने कुछ खबरें प्रकाशित की थीं और इन खबरों से प्रभावित लोग उनसे नाखुश थे.’

सीतापुर पुलिस ने बताया कि उन्होंने बाजपेयी के लोगों के साथ एक दर्जन से ज़्यादा संभावित विवादों की जांच के बाद मामले का खुलासा किया. इसमें उनके द्वारा अपने अख़बार में धान खरीद के बारे में समाचार प्रकाशित करने से जुड़े विवाद शामिल थे, जिसके कारण कुछ सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ़ जांच और विभागीय कार्रवाई हुई थी, और एक स्थानीय प्रॉपर्टी डीलर के जरिये एक लेखपाल (राजस्व अधिकारी) द्वारा ज़मीन की खरीद भी शामिल थी. शिकायत के बाद म्यूटेशन रद्द कर दिया गया था.

पुलिस ने बताया कि उन्होंने निगरानी के जरिये कम से कम 15 बिंदुओं पर जांच की और करीब 100 लोगों से पूछताछ की, लेकिन उनमें से किसी के भी खिलाफ ऐसी कोई प्रतिकूल बात नहीं मिली, जिससे घटना से उनका कोई संबंध हो.

सीतापुर पुलिस ने बताया कि हत्या के तीन दिन बाद 11 मार्च को जब पुलिस पहली बार राठौर से पूछताछ करने मंदिर गई, तो उसने किसी भी तरह से उससे विशेष परिचय होने से इनकार कर दिया और अग्रिम जमानत के लिए दबाव बनाने के लिए तुरंत उच्च न्यायालय के एक वकील से संपर्क किया.

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