नई दिल्ली: अमेरिकी शिक्षा विभाग ने सोमवार (14 अप्रैल) को कहा कि वह हार्वर्ड विश्वविद्यालय को संघीय (फेडरल) कोष में से दिए जाने वाले लगभग 2.3 बिलियन डॉलर फंड को रोक रहा है, क्योंकि विश्वविद्यालय ने ह्वाइट हाउस की उन मांगों, जिसमें उसे विविधता, समानता और समावेशन कार्यक्रमों को बंद करने को कहा गया था, का विरोध करने का निर्णय लिया है.
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने सोमवार को घोषणा की कि वह यहूदी-विरोधीवाद के खिलाफ ट्रंप प्रशासन के अभियान के हिस्से के रूप में उनकी मांगों का अनुपालन नहीं करेगा, जिससे परिणामस्वरूप लगभग 9 बिलियन डॉलर की फंडिंग जोखिम में पड़ सकती है.
शुक्रवार (11 अप्रैल) को हार्वर्ड को लिखे एक पत्र में ट्रंप प्रशासन ने विश्वविद्यालय के भीतर व्यापक सुधारों का आह्वान किया, और कहा कि हार्वर्ड को ‘योग्यता-आधारित’ प्रवेश और नियुक्ति नीतियों को लागू करना चाहिए, साथ ही विविधता के बारे में उनके विचारों को लेकर अध्ययन निकाय, संकाय और नेतृत्व का ऑडिट करना चाहिए.
ट्रंप प्रशासन की मांगों का अनुपालन न करने की हार्वर्ड की घोषणा के बाद यहूदी-विरोधीवाद का मुकाबला करने वाले एक विभाग के टास्क फोर्स ने एक बयान में कहा, ‘हार्वर्ड का आज का बयान हमारे देश के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में व्याप्त परेशान करने वाली मानसिकता की पुष्टि करता है कि संघीय निवेश नागरिक अधिकार कानूनों को बनाए रखने की जिम्मेदारी के साथ नहीं आता है.’
टास्क फोर्स ने कहा कि वह हार्वर्ड को दिए जाने वाले 2.2 बिलियन डॉलर के अनुदान और 60 मिलियन डॉलर के अनुबंध मूल्य (contract value) को रोक रहा है.
उल्लेखनीय है कि हार्वर्ड उन कई आइवी लीग शैक्षणिक परिसरों में से एक है, जिन्हें ट्रंप प्रशासन द्वारा दबाव बनाने के अभियान में निशाना बनाया गया है. इससे पहले प्रशासन उसके एजेंडा का अमला न करने पर यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया, ब्राउन और प्रिंसटन यूनिवर्सिटी की फेडरल निधि को भी रोक चुका है.
क्या हैं प्रशासन की मांगें
अखबार के अनुसार, ट्रंप प्रशासन विश्वविद्यालय से फेस मास्क पर प्रतिबंध लगाने की भी मांग करता है. यह मांग फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाने के लिए प्रतीत होता है. प्रशासन की यह भी मांग है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय की इमारतों पर कब्जा करने वाले किसी भी छात्र को निलंबित कर दिया जाए.
प्रशासन यह भी चाहता है कि विश्वविद्यालय ‘किसी भी छात्र समूह या क्लब को मान्यता देना या फंड देना बंद कर दे जो आपराधिक गतिविधि, अवैध हिंसा या अवैध उत्पीड़न का समर्थन या प्रचार करता है’ और अपनी प्रवेश प्रक्रिया में बदलाव करके ऐसे किसी भी अंतरराष्ट्रीय छात्र को प्रवेश देने से रोक दे जो ‘अमेरिकी मूल्यों के प्रति शत्रुता रखता हो’ या जो ‘आतंकवाद या यहूदी-विरोधीवाद का समर्थन करता हो.’
विश्वविद्यालय का प्रतिरोध
हार्वर्ड के अध्यक्ष एलन गार्बर ने सोमवार को हार्वर्ड समुदाय को लिखे पत्र में कहा कि ये मांगें विश्वविद्यालय के प्रथम संशोधन अधिकारों का उल्लंघन करती हैं और ‘शीर्षक 6 के तहत सरकार के अधिकार की वैधानिक सीमाओं को पार करती हैं,’ जो छात्रों के साथ उनकी जाति, रंग या राष्ट्रीय मूल के आधार पर भेदभाव को प्रतिबंधित करता है.
गार्बर ने लिखा, ‘कोई भी सरकार, चाहे कोई भी पार्टी सत्ता में हो.. यह तय नहीं कर सकती कि निजी विश्वविद्यालय क्या पढ़ा सकते हैं, वे किसे प्रवेश दे सकते हैं और किसे नियुक्त कर सकते हैं, या अध्ययन और जांच के कौन-से क्षेत्र अपना सकते हैं.’
इसके साथ उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय ने यहूदी-विरोधी भावना को दूर करने के लिए व्यापक सुधार किए हैं.
सीनेट के डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने हार्वर्ड के इस विरोध को सही ठहराया है.
शूमर ने एक बयान में कहा, ‘ट्रंप प्रशासन विश्वविद्यालयों से अभूतपूर्व मांग कर रहा है, जिसका उद्देश्य इन महत्वपूर्ण संस्थानों को कमज़ोर करना या यहां तक कि उन्हें नष्ट करना है. विश्वविद्यालयों को परिसर में यहूदी-विरोधी भावना से लड़ने के लिए और अधिक प्रयास करने चाहिए, लेकिन प्रशासन को इसे इन संस्थानों पर व्यापक और अतिरिक्त-कानूनी हमले करने के बहाने के रूप में उपयोग नहीं करना चाहिए.’
प्रशासन ने यह भी आरोप लगाए हैं कि विश्वविद्यालयों ने पिछले साल गाजा में इजरायल के युद्ध के खिलाफ कैंपस विरोध प्रदर्शनों में यहूदी-विरोधी भावना को अनियंत्रित होने दिया. हार्वर्ड इन आरोपों से इनकार करता है.
अपने एजेंडे के अनुपालन के लिए दबाव बनाने के मकसद से ट्रंप प्रशासन ने पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय, ब्राउन और प्रिंसटन के लिए संघीय फंड को रोक दिया है. हार्वर्ड को भेजा गया मांग पत्र उसी तरह का है, जिसने कोलंबिया विश्वविद्यालय को अरबों डॉलर की कटौती के खतरे के डर से बदलाव करने को मजबूर किया था.
पूर्व छात्रों ने ट्रंप प्रशासन के इस फैसले का किया विरोध
ट्रंप प्रशासन की मांगों के ख़िलाफ़ पूर्व छात्रों के एक समूह ने विश्वविद्यालय के नेताओं को पत्र लिख कर उनसे ‘कानूनी रूप से विरोध करने और अकादमिक स्वतंत्रता और विश्वविद्यालय की स्वायत्तता को खतरा पहुंचाने वाली गैरकानूनी मांगों का पालन करने से इनकार करने’ का आह्वान किया.
ट्रंप प्रशासन की इन मांगों के ख़िलाफ़ हार्वर्ड समुदाय के सदस्यों और कैम्ब्रिज के निवासियों ने विरोध प्रदर्शन भी किया, और शुक्रवार को अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ यूनिवर्सिटी प्रोफेसर्स द्वारा इस कटौती को चुनौती देने वाला मुकदमा दायर किया गया.
अपने मुकदमे में वे तर्क देते हैं कि ट्रंप प्रशासन निधियों में कटौती शुरू करने से पहले शीर्षक 6 के तहत आवश्यक कदमों का पालन करने में विफल रहा है, जिसमें यह पता लगाना शामिल है कि विश्वविद्यालय अनुपालन नहीं कर रहा था और विश्वविद्यालय और कांग्रेस दोनों को इस कटौती की सूचना दी जानी चाहिए.
Harvard has set an example for other higher-ed institutions – rejecting an unlawful and ham-handed attempt to stifle academic freedom, while taking concrete steps to make sure all students at Harvard can benefit from an environment of intellectual inquiry, rigorous debate and… https://t.co/gAu9UUqgjF
— Barack Obama (@BarackObama) April 15, 2025
उधर, हार्वर्ड द्वारा ट्रंप प्रशासन की मांगें मानने से इनकार करने को लेकर पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा यूनिवर्सिटी की सराहना की है.
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा, ‘अकादमिक स्वतंत्रता को दबाने के एक गैरकानूनी और अमानवीय प्रयास को खारिज करते हुए हार्वर्ड ने अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए एक मिसाल कायम की है. उसने यह सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं कि हार्वर्ड के सभी छात्र बौद्धिक सवाल-जवाब, कड़ी बहस और आपसी सम्मान के माहौल से लाभान्वित हो सकें. आइए उम्मीद करें कि अन्य संस्थान भी इसका अनुसरण करेंगे.’
