नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त करने के कदम ने यूजीसी अधिनियम, 1956 के उल्लंघन के बारे में सवाल खड़े कर दिए हैं.
ज्ञात हो कि बीते 11 अप्रैल को एक आदेश के तहत जोशी को यूजीसी अध्यक्ष का अतिरिक्त प्रभार दिया गया.
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, जोशी को अतिरिक्त प्रभार देने का कदम यूजीसी अधिनियम के अध्याय II, धारा 5(2) के अनुरूप नहीं है, जिसमें कहा गया है, ‘अध्यक्ष का चयन ऐसे व्यक्तियों में से किया जाएगा जो केंद्र सरकार या किसी राज्य सरकार का अधिकारी नहीं है.’
अधिनियम की धारा 6(3) में कहा गया है कि आकस्मिक रिक्ति के दौरान यूजीसी के उपाध्यक्ष अध्यक्ष के रूप में कार्य करेंगे.
यूजीसी अधिनियम की धारा 6(3) में कहा गया है, ‘यदि अध्यक्ष के कार्यालय में कोई आकस्मिक रिक्ति होती है, चाहे वह मृत्यु, त्यागपत्र, बीमारी या अन्य अक्षमता के कारण अपने कार्यों का निर्वहन करने में असमर्थता के कारण होती है.. तब उस समय उस पद पर कार्यरत उपाध्यक्ष, धारा 5 की उपधारा (2) में निहित किसी भी बात के बावजूद, अध्यक्ष के रूप में कार्य करेगा और जब तक कि किसी अन्य व्यक्ति को अध्यक्ष के रूप में नियुक्त नहीं हो जाति है, वह पिछले अध्यक्ष की शेष अवधि के लिए अध्यक्ष का पद धारण करेगा.’
इसमें यह भी कहा गया है कि जब अध्यक्ष के पद पर रिक्ति होती है और उस समय कोई उपाध्यक्ष पद पर आसीन नहीं होता, तो ‘केंद्र सरकार, धारा 5 की उपधारा (2) में निहित किसी भी बात के बावजूद, किसी अन्य सदस्य को कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में नियुक्त करेगी और इस प्रकार नियुक्त व्यक्ति अध्यक्ष का पद अधिकतम छह महीने की अवधि से अधिक नहीं संभालेगा.’
मालूम हो कि यूजीसी अध्यक्ष का पद एम. जगदीश कुमार के 7 अप्रैल को सेवानिवृत्त होने के बाद रिक्त हो गया था. कुमार ने फरवरी 2022 में पदभार संभाला था.
केंद्र सरकार ने कहा है कि जोशी को दिया गया अतिरिक्त प्रभार केवल एक अंतरिम व्यवस्था है.
न्यू इंडियन एक्सप्रेस को सूत्रों के हवाले से बताया गया कि ‘यह पूरी तरह से अंतरिम व्यवस्था है, जो किसी आकस्मिक रिक्ति से उत्पन्न नहीं हुई है. इसलिए, किसी अन्य यूजीसी अधिकारी या उपाध्यक्ष के कार्यभार संभालने का सवाल ही नहीं उठता. यूजीसी अध्यक्ष की नियुक्ति की प्रक्रिया उचित समय पर पूरी की जाएगी.’
