राजस्थान: मस्जिद के बाहर भीड़ की अगुवाई और नारेबाज़ी के लिए भाजपा विधायक के ख़िलाफ़ केस

जयपुर पुलिस ने हवा महल विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक बालमुकुंदाचार्य के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज की है. आरोप है कि उन्होंने पहलगाम हमले के विरोध में एक बड़ी रैली की अगुवाई की, जिसने जयपुर के जौहरी बाजार में जामा मस्जिद के सामने कथित तौर पर धार्मिक नारे लगाए.

पहलगाम में पर्यटकों की हत्या के विरोध में शुक्रवार (25 अप्रैल) को जयपुर में आयोजित आक्रोश सभा के दौरान जयपुर के हवा महल विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक बालमुकुंदाचार्य उर्फ संजय शर्मा. (फोटो: फेसबुक)

जयपुर: जयपुर पुलिस ने शनिवार (26 अप्रैल) को हवा महल विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक बालमुकुंदाचार्य उर्फ ​​संजय शर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. उन पर आरोप है कि उन्होंने जयपुर के जौहरी बाजार में जामा मस्जिद के सामने बड़ी भीड़ का नेतृत्व किया और कथित तौर पर पहलगाम हमले के विरोध में धार्मिक नारे लगाए.

एफआईआर दर्ज होने के बाद भाजपा विधायक ने एक वीडियो बयान जारी कर ‘खेद’ व्यक्त करते हुए कहा कि उनका इरादा किसी भी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का नहीं था.

एफआईआर के अनुसार, घटना शुक्रवार (25 अप्रैल) रात को हुई. इससे पहले शुक्रवार शाम को कश्मीर के पहलगाम में 26 पर्यटकों की हाल ही में हुई हत्या के विरोध में शहर के अंदर बड़ी चौपड़ पर ‘आक्रोश सभा’ आयोजित की गई थी.

बालमुकुंदाचार्य सहित कई भाजपा नेताओं ने जयपुर के बीचों-बीच प्रतिष्ठित हवा महल के ठीक बगल में आयोजित विशाल विरोध प्रदर्शन में भाग लिया था. प्रदर्शन में शामिल लोगों ने ‘पाकिस्तान मुर्दाबाद’, ‘जय श्री राम’ जैसे नारे लगाए और अपने गुस्से का इजहार करने के लिए भगवा झंडे और मशालें उठाई हुई थीं.

बालमुकुंदाचार्य ने संवाददाताओं से कहा, ‘हमारे पास भारत के दो हनुमान हैं. एक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी हैं, दूसरे अमित शाह जी हैं. इन लोगों को चुन-चुनकर जन्नत के दरवाजे में भेजा जाएगा.’ उन्होंने कहा कि लोगों की हत्या करने से पहले उनका धर्म पूछने वाले आतंकवादियों की भी पहचान की जाएगी.

मस्जिद के बाहर लगे ‘जय श्री राम’ के नारे, विधायक के खिलाफ एफआईआर

आक्रोश सभा के समापन के बाद बालमुकुंदाचार्य ने कथित तौर पर एक भीड़ का नेतृत्व किया और जौहरी बाजार स्थित जामा मस्जिद के बाहर एकत्र हुए.

जामा मस्जिद के सदर मोहम्मद शब्बीर कुरैशी की शिकायत के आधार पर मामले में दर्ज एफआईआर में कहा गया है. इसमें कहा गया है, ‘जब मस्जिद के अंदर नमाज अदा की जा रही थी, हवा महल निर्वाचन क्षेत्र के विधायक बालमुकुंदाचार्य 60-70 आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों के साथ जामा मस्जिद में घुस गए और दो धर्मों के बीच सांप्रदायिक तनाव पैदा करने और दंगे भड़काने के लिए धार्मिक नारे लगाए.’

सोशल मीडिया में प्रसारित वीडियो में कथित तौर पर एक बड़ी भीड़ जामा मस्जिद के सामने ‘जय श्री राम’ जैसे नारे लगाती हुई दिखाई दे रही है. एफआईआर में कहा गया है कि भीड़ ने मुसलमानों को मारने की धमकी भी दी.

जमात-ए-इस्लामी हिंद राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद नजीमुद्दीन ने संवाददाताओं से कहा, ‘विधायक जयपुर के भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं. जामा मस्जिद में नारे लगाने के उनके कृत्य से लोग दुखी और नाराज हैं. पोस्टरों पर पाकिस्तान मुर्दाबाद लिखना कोई मुद्दा नहीं है, लेकिन वे मस्जिद के बाहर जय श्री राम के नारे लगा रहे थे और वह भीड़ के साथ मस्जिद की सीढ़ियां चढ़ गए. उन्होंने हमें आतंकित करने की कोशिश की. हम उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हैं.’

नारेबाजी के जवाब में मुस्लिम समुदाय के लोग भी एकत्रित हो गए और उन्होंने बालमुकुंदाचार्य तथा नारे लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की.

टकराव के बाद कांग्रेस विधायक अमीन कागजी (किशनपोल निर्वाचन क्षेत्र) और रफीक खान (आदर्श नगर) भी मौके पर पहुंचे. आगे की स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए मौके पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया.

जयपुर के पुलिस कमिश्नर बीजू जॉर्ज जोसेफ ने द वायर को बताया, ‘पहली नज़र में ऐसा लगता है कि विधायक ने जामा मस्जिद की सीढ़ियों पर पाकिस्तान मुर्दाबाद का पोस्टर चिपकाया है. हमने दुश्मनी को बढ़ावा देने के लिए बालमुकुंदाचार्य और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ़ एफआईआर दर्ज की है. फिलहाल स्थिति शांतिपूर्ण है.’

बालमुकुंदाचार्य के खिलाफ बीएनएस की धारा 298 (किसी वर्ग के धर्म का अपमान करने के इरादे से पूजा स्थल को नुकसान पहुंचाना या अपवित्र करना), 300 (धार्मिक सभा में व्यवधान डालना), 302 (किसी व्यक्ति की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से जानबूझकर शब्द आदि बोलना) और 351 (3) (आपराधिक धमकी) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है.

जांच राजस्थान पुलिस की सीआईडी ​​(सीबी) को सौंप दी गई है, जो जनप्रतिनिधियों के खिलाफ मामलों की जांच करने वाली नोडल एजेंसी है.

मुस्लिमों को निशाना बनाने वाले बयानों के लिए जाने जाते हैं विधायक

पहली बार विधायक बने बालमुकुंदाचार्य हवा महल सीट से मात्र 974 मतों के अंतर से चुनाव जीतने के बाद से ही चर्चा में हैं.

बालमुकुंदाचार्य, जिनका असली नाम संजय शर्मा है, हाथोज धाम मंदिर के महंत हैं. पिछले दो सालों में भगवाधारी उग्र हिंदुत्व नेता लगातार मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने के लिए चर्चा में रहे हैं.

राज्य विधानसभा में चुने जाने के कुछ दिनों बाद ही सत्तारूढ़ पार्टी के विधायक ने मांसाहारी भोजन बेचने वाले रेस्तराओं के खिलाफ अभियान शुरू किया था. सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित वीडियो में विधायक को रेस्तराओं से यह कहते हुए देखा जा सकता है कि ‘यह कराची नहीं, बल्कि अपरा काशी है’ और ‘शराबी-कबाबी (मांसाहारी भोजन करने और पीने वाले) इन दुकानों के पास इकट्ठा होते हैं, जिससे माताओं और बहनों को असुविधा होती है.’

हालांकि, बाद में बालमुकुंद आचार्य ने माफी मांगते हुए कहा कि वह केवल बिना लाइसेंस वाली दुकानों के बारे में बोल रहे थे.

बीते मार्च में बालमुकुंदाचार्य ने मस्जिदों में लाउडस्पीकरों के खिलाफ बात की थी और यहां तक ​​कि भाजपा के कानूनी प्रकोष्ठ के सदस्यों से इस मुद्दे को ‘समाधान’ करने के लिए कहा था.

उनके बयान की उनकी ही पार्टी के सदस्य और उपमुख्यमंत्री प्रेम चंद बैरवा ने आलोचना की थी और इसे ‘अशोभनीय’ करार दिया था और कहा था कि वह उनसे सहमत नहीं हैं.

मांसाहारी दुकानों के खिलाफ अभियान के पिछले उदाहरण की तरह इस बार भी उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद बालमुकुंदाचार्य ने शनिवार (26 अप्रैल) को एक वीडियो जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा कि अगर उनके बयान से किसी की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं, तो उन्हें ‘खेद’ है.

उन्होंने कहा कि उन्होंने मंदिरों, शौचालयों और मस्जिद के सामने फुटपाथ पर ‘आतंकवाद मुर्दाबाद’ और ‘पाकिस्तान मुर्दाबाद’ के स्टिकर चिपकाए हैं.

बालमुकुंदाचार्य ने कहा, ‘पाकिस्तान मुर्दाबाद और आतंकवाद मुर्दाबाद जैसे नारों से किसी की धार्मिक भावनाएं कैसे आहत हो सकती हैं. हमारा उद्देश्य यह संदेश देना था कि हिंदू और मुसलमान एक साथ खड़े हैं. अगर मंदिरों की सीढ़ियों पर स्टिकर लगाने पर किसी को आपत्ति नहीं है, तो मस्जिद के बाहर स्टिकर लगाने पर किसी को क्या आपत्ति हो सकती है. लेकिन फिर भी अगर किसी को लगता है कि मेरे किसी बयान से उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं, तो मैं खेद व्यक्त करता हूं. हम सभी धर्मों का सम्मान करते हैं.’

हालांकि, विधायक ने वीडियो में यह उल्लेख नहीं किया कि मस्जिद के बाहर भीड़ द्वारा धार्मिक नारे लगाए जा रहे थे.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)