श्रीनगर: सनन खुर्शीद के लिए परेशानी 23 अप्रैल को तब शुरू हुई, जब वह पंजाब के मोहाली के बाहरी इलाके में एक ऑटो रिक्शा से अपने कॉलेज जा रहे थे, जहां वह बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक की पढ़ाई कर रहे हैं.
मोहाली स्थित रयात-बाहरा विश्वविद्यालय के इस 20 वर्षीय छात्र ने बताया कि उसके दोस्तों ने उन्हें कॉलेज न आने के लिए मनाने की कोशिश की थी, क्योंकि एक दिन पहले पहलगाम में हुए हमले के बाद देशभर में आक्रोश और विरोध का माहौल देखने को मिल रहा था.
उन्होंने कहा, ‘हमारी परीक्षाएं आने वाली हैं. मुझे लगा कि हम पंजाब में सुरक्षित हैं.’
हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के कथित तौर पर युवा लड़के-लड़कियों के एक समूह ने शुरू में खुर्शीद को अजीब तरीके से देखा. खुर्शीद उस रिक्शा में एकमात्र कश्मीरी थे. इसके बाद इन युवा छात्रों ने कश्मीर के बारे में सांप्रदायिक बयानबाज़ी शुरू कर दी, जिससे श्रीनगर के रहने वाले खुर्शीद भी बहस में उलझ गए.
खुर्शीद ने कहा, ‘उन्होंने मुझे आतंकवादी कहा और मेरी मां-बहन को भी गालियां दीं.’ ‘जब मैं कॉलेज पहुंचा तो वहां हर कोई मुझे शक की निगाह से देख रहा था. बहुत कम लोगों ने मुझसे बात की. अगले दिन सोशल मीडिया पर छात्रों के साथ मारपीट के वीडियो वायरल होने लगे. मेरे एक दोस्त की भी पिटाई की गई,’ उन्होंने बताया।
खुर्शीद उन 45 छात्रों के समूह में शामिल हैं, जो सोमवार (28 अप्रैल) को पंजाब से कश्मीर में अपने घरों को लौटे हैं. यह घटना पहलगाम आतंकी हमले के छह दिन बाद हुई है जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था.
पीड़ित छात्रों में वे लोग भी शामिल हैं जिन्हें बदमाशों के हाथों उत्पीड़न का सामना करना पड़ा. इन हमलों की खबरें खरड़, डेरा बस्सी, होशियारपुर, चंडीगढ़, जालंधर और पंजाब के कुछ अन्य हिस्सों से आई हैं.
मोहाली के लालरू कस्बे में स्थित यूनिवर्सल ग्रुप ऑफ इंस्टिट्यूशंस (यूजीआई) के एक युवक ने द वायर को बताया कि पिछले सप्ताह बुधवार और गुरुवार की दरम्यानी रात को लोहे की रॉड और चाकुओं से लैस गैर-पंजाबी छात्रों के एक समूह ने कश्मीरी छात्रों को निशाना बनाया.
उन्होंने बताया, ‘मेरे एक दोस्त के साथ मारपीट की गई और उसके साथ बदसलूकी हुई, जबकि कॉलेज प्रबंधन और सुरक्षाकर्मियों ने हमारी इस हालत पर आंखें मूंद लीं.’
यूजीआई में एक कश्मीरी छात्रा के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई और उसे बाल पकड़कर घसीटा गया, इससे पहले कि वह एक अन्य कश्मीरी छात्रा के साथ वहां से भागने में सफल हो पाती. इस परेशान लड़की का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसमें वह कुछ पंजाबी युवकों के सामने अपनी आपबीती बता रही थी, जो उसे बचाने आए थे.

एक सूत्र ने बताया कि पीड़िता को दो अन्य छात्राओं के साथ उनके परिवार द्वारा श्रीनगर वापस भेज दिया गया है. हमले को पंजाब राज्य महिला आयोग ने ‘क्रूर’ बताया है. आयोग ने पुलिस कार्रवाई की मांग की है, लेकिन अभी यह पता नहीं चल पाया है कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है या नहीं.
द वायर से बात करते हुए रयात-बाहरा विश्वविद्यालय की नर्सिंग छात्रा उम्मत शब्बीर, जो मोहाली में एक घर लेकर रह रही थीं, ने बताया कि 22 अप्रैल को पहलगाम हमले की खबर आने के बाद से वह अपने कमरे से बाहर नहीं निकली. पहलगाम हमले के बाद रयात-बाहरा विश्वविद्यालय के अधिकांश छात्र अपने छात्रावासों और निजी आवासों के अंदर ही रहे, क्योंकि बढ़ते तनाव के बीच विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने उन्हें सुरक्षा की गारंटी देने से साफ इनकार कर दिया था.
उत्तरी कश्मीर के एक कस्बे में रहने वाले शब्बीर ने कहा, ‘हमारे घर के पास रहने वाली एक महिला दुकानदारों पर चिल्ला रही थी कि वे सोसायटी में रहने वाले कश्मीरियों को किराने का सामान न दें. वह बार-बार यही दोहरा रही थी कि सभी कश्मीरी आतंकवादी हैं. बताइए, पहलगाम से मेरा क्या लेना-देना है? मैं तो बस एक छात्र हूं.’

अन्य राज्यों में भी हुई हैं समान घटनाएं
पंजाब और देश के अन्य हिस्सों में सैकड़ों कश्मीरी छात्र विभिन्न कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ते हैं. इनमें से कुछ छात्र गरीब आर्थिक पृष्ठभूमि से आते हैं, जो 2011 में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के छात्रों के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री की विशेष छात्रवृत्ति योजना की मदद से निजी शिक्षा का खर्च उठा सकते हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना के तहत देशभर के शिक्षण संस्थानों में 20,000 से अधिक छात्र पढ़ रहे हैं. देश में राजनीतिक उथल-पुथल के बावजूद अधिकांश छात्र अपनी पढ़ाई जारी रख रहे हैं.
पहलगाम हमले के तत्काल बाद पंजाब राज्य एकमात्र ऐसा राज्य नहीं था, जहां छात्रों और अन्य कश्मीरी नागरिकों के खिलाफ हिंसा देखी गई. 2019 के पुलवामा आत्मघाती बम विस्फोट के बाद कश्मीरियों के खिलाफ लक्षित हिंसा से एक अजीब समानता थी, जिसके कारण सर्वोच्च न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ा था.
पिछले छह दिनों में पूरे भारत में कम से कम 17 मामले सामने आए हैं, जिनमें कश्मीरी छात्रों पर हमला किया गया है. इन हमलों के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने देश के विभिन्न शहरों में जम्मू-कश्मीर के निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपने कैबिनेट सहयोगियों को भेजा था.
हेल्पलाइन से नहीं मिली ‘हेल्प’
बढ़ते हमलों के बीच अब्दुल्ला सरकार ने पिछले हफ़्ते घोषणा की कि देश के अन्य हिस्सों में समस्याओं का सामना कर रहे जम्मू-कश्मीर के निवासियों के लिए एक आपातकालीन हेल्पलाइन स्थापित की गई है.
हालांकि, रयात-बाहरा विश्वविद्यालय के छात्रों ने आरोप लगाया कि हेल्पलाइन से बहुत मदद नहीं मिली क्योंकि उनके फोन कॉल का या तो जवाब नहीं दिया गया या अधिकारियों ने ‘खोखले आश्वासन’ दिए.
खुर्शीद ने कहा, ‘हमें जम्मू-कश्मीर सरकार से कोई मदद नहीं मिली. हम सभी ने हेल्पलाइन पर कॉल करने की कोशिश की, लेकिन केवल दो से तीन कॉल का ही जवाब दिया गया और उन मामलों में भी उन्होंने हमारी मदद नहीं की. केवल शिरोमणि अकाली दल अमृतसर, पंजाब पुलिस और सब्र शिकायत प्रकोष्ठ (एक सामाजिक संगठन) के सदस्यों ने ही इन कठिन समय के दौरान हमारी देखभाल की.’
पहलगाम हमले के बाद देश में ध्रुवीकरण का पहला शिकार बने छात्र, गमगीन माहौल के बीच सोमवार (28 अप्रैल) को एक बस से श्रीनगर पहुंचे. यह बस शनिवार को पंजाब से रवाना हुई थी. कश्मीर लौटने से उनके चिंतित परिवारों को राहत मिली है, लेकिन छात्रों को जल्द ही अपनी कक्षाओं में लौटने की उम्मीद नहीं है, जिससे उनका करिअर खतरे में पड़ गया है.
बीएससी की पढ़ाई कर रहे आबिद लतीफ ने बताया कि पंजाब में रहने वाले हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के कुछ निवासी पहलगाम हमले के बाद से कश्मीरी छात्रों को उनके किराए के फ्लैट से बाहर निकालने की धमकी दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि कॉलेज प्रबंधन भी उनकी सुरक्षा से हाथ पीछे खींच रहा है.
उन्होंने बताया, ‘हम दो दिन से भूखे थे और जब मैं गुरुवार को किराने का सामान खरीदने गया तो दुकानदार ने मुझे यह कहते हुए भगा दिया कि सभी कश्मीरी आतंकवादी हैं. मैं खुश हूं कि मैं जिंदा वापस आ गया.’
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